मार्च 18, 2026

बांग्लादेश में ISKCON पर प्रतिबंध की मांग: साम्प्रदायिक तनाव और राष्ट्रीय सुरक्षा के आरोप

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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। इसी बीच, अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (ISKCON) पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेज हो गई है। एक नई कानूनी याचिका में ISKCON को “कट्टरपंथी संगठन” करार देते हुए आरोप लगाया गया है कि यह संगठन राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है और साम्प्रदायिक तनाव भड़काने का काम कर रहा है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला देश में पहले से चल रहे धार्मिक विवादों को और गहराई देने वाला है।

पूर्व पुजारी की गिरफ्तारी ने बढ़ाया विवाद

ISKCON बांग्लादेश के पूर्व पुजारी चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को हाल ही में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने लगा।

कानूनी याचिका में गंभीर आरोप

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील अल मामून रसेल ने 10 अन्य वकीलों की ओर से दायर की है। याचिका में ISKCON को बांग्लादेश में एक “कट्टरपंथी संगठन” बताया गया है, जो कथित रूप से धार्मिक असहिष्णुता को बढ़ावा देता है और साम्प्रदायिक हिंसा के लिए जिम्मेदार है।

याचिका में एडवोकेट सैफुल इस्लाम की हत्या के लिए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है। यह मामला गृह मंत्रालय, विधि और न्याय मंत्रालय, और पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष उठाया गया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और साम्प्रदायिक सौहार्द को खतरा

याचिका में ISKCON की गतिविधियों को बांग्लादेश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया गया है। आरोप है कि संगठन अपने कार्यों से देश में साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ रहा है और विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच तनाव पैदा कर रहा है।

सरकार की कार्रवाई पर नजर

बांग्लादेश सरकार पर अब दबाव बढ़ रहा है कि वह ISKCON पर प्रतिबंध लगाने और याचिका में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए सख्त कदम उठाए।

निष्कर्ष

ISKCON पर प्रतिबंध की यह मांग बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और धार्मिक संगठनों की स्थिति पर एक नई बहस छेड़ रही है। इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित कानूनी कार्रवाई आने वाले समय में बांग्लादेश की धार्मिक राजनीति को प्रभावित कर सकती है।

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