मार्च 30, 2026

अमेरिका में ट्रम्प सरकार का डीईआई प्रोग्राम पर रोक: भारतीयों की नौकरियों पर संकट

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अमेरिका में ट्रम्प सरकार के हालिया फैसलों ने देश के रोजगार ढांचे को झटका दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने “विविधता, समानता और समावेश” (डीईआई) प्रोग्राम पर रोक लगाते हुए इसे लेकर बड़े बदलावों के संकेत दिए हैं। इस फैसले का असर करीब एक लाख भारतीयों की नौकरियों पर पड़ सकता है, जो इस प्रोग्राम के तहत काम कर रहे थे।

डीईआई प्रोग्राम पर रोक का फैसला

राष्ट्रपति ट्रम्प ने डीईआई भर्तियों पर रोक लगाते हुए सभी डीईआई कर्मचारियों को 31 जनवरी तक पेड लीव पर भेजने का आदेश दिया है। इसके अलावा, राज्यों में चल रहे डीईआई दफ्तरों को बंद करने का निर्देश दिया गया है। 1 फरवरी 2025 को इन कर्मचारियों के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। फेडरल और राज्य सरकारों को डीईआई से संबंधित रिपोर्ट्स देने को कहा गया है।

अमेरिका में कुल 32 लाख फेडरल कर्मचारी हैं, जिनमें से लगभग 8 लाख कर्मचारी डीईआई प्रोग्राम के तहत कार्यरत हैं। इनमें एक लाख से अधिक भारतीय कर्मचारी भी शामिल हैं, जो या तो अमेरिकी नागरिकता प्राप्त कर चुके हैं या फिर एच-1बी वीजा जैसे वर्क परमिट पर अमेरिका में काम कर रहे हैं।

डीईआई प्रोग्राम की पृष्ठभूमि और महत्व

डीईआई प्रोग्राम की शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी। यह तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी और नागरिक अधिकार आंदोलन के नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर के आदर्शों से प्रेरित था। इस प्रोग्राम का उद्देश्य धार्मिक और नस्लीय अल्पसंख्यकों, महिलाओं, दिव्यांगों और थर्ड जेंडर समुदाय को रोजगार और शिक्षा में समान अवसर प्रदान करना था।

फेडरल और राज्य सरकारों के सभी विभागों में डीईआई के तहत एक निश्चित कोटा निर्धारित था। इसे भारत में लागू आरक्षण प्रणाली के समान माना जा सकता है। डीईआई प्रोग्राम के तहत न केवल सरकारी संस्थानों बल्कि निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों के लिए नौकरियां देना अनिवार्य किया गया था।

प्राइवेट सेक्टर में भी डीईआई प्रोग्राम पर रोक

ट्रम्प प्रशासन के इस फैसले का प्रभाव प्राइवेट सेक्टर पर भी पड़ा है। अमेरिका की बड़ी कंपनियां जैसे मेटा, बोइंग, अमेजन, वॉलमार्ट, टारगेट, फोर्ड, मोलसन, हार्ले डेविडसन, और मैकडोनाल्ड ने डीईआई प्रोग्राम को बंद करने का ऐलान किया है। इससे रोजगार का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है, खासकर उन वर्गों का जिनके लिए डीईआई अवसरों का एक अहम जरिया था।

भारतीय समुदाय पर असर

इस फैसले का सीधा प्रभाव भारतीय समुदाय पर पड़ सकता है। डीईआई प्रोग्राम के तहत काम करने वाले भारतीय कर्मचारी, चाहे वे अमेरिकी नागरिक हों या एच-1बी वीजा पर कार्यरत हों, अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं। यह प्रोग्राम भारतीयों के लिए अमेरिकी रोजगार बाजार में प्रवेश का एक महत्वपूर्ण माध्यम था।

आगे की राह

डीईआई कर्मचारियों के भविष्य को लेकर अब 1 फरवरी 2025 को निर्णय लिया जाएगा। ट्रम्प प्रशासन का यह कदम उन नीतियों से मेल खाता है, जो विविधता और समावेशिता को सीमित करने की दिशा में उठाए जा रहे हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में इस फैसले का अमेरिका के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने पर कैसा असर पड़ेगा।

निष्कर्ष

डीईआई प्रोग्राम पर रोक लगाकर ट्रम्प प्रशासन ने न केवल अल्पसंख्यक वर्गों के लिए समान अवसरों को खतरे में डाला है, बल्कि भारतीय समुदाय के लिए भी एक बड़ी चुनौती खड़ी की है। यह कदम अमेरिका के समावेशी समाज की नींव पर सवाल खड़े करता है और आने वाले समय में इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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