ट्रम्प का NATO देशों को संदेश: GDP का 5% रक्षा खर्च बढ़ाने की अपील

विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) में गुरुवार को डोनाल्ड ट्रम्प ने NATO देशों से अपनी रक्षा बजट में वृद्धि करने की अपील की। ट्रम्प ने कहा कि NATO सदस्य देशों को अपने GDP का 5% रक्षा पर खर्च करना चाहिए। उन्होंने अमेरिका द्वारा वैश्विक रक्षा खर्च में उठाए गए “असमान भार” पर जोर देते हुए कहा कि यह स्थिति अब अस्वीकार्य है, विशेष रूप से यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में।
ट्रम्प ने वित्तीय योगदान में असमानता का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन संघर्ष में NATO के मुकाबले 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर अधिक खर्च किए हैं। उन्होंने इसे अन्य देशों की जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति करार दिया और इसे तत्काल संतुलित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
ट्रम्प ने कहा, “जैसा कि हम अमेरिका में सामान्य समझ को बहाल कर रहे हैं, हम तेजी से ऐसे कदम उठा रहे हैं जो वैश्विक रक्षा संतुलन को सही दिशा में ले जाएं।” उनका इशारा इस बात की ओर था कि अमेरिका अब अन्य देशों की जिम्मेदारियों का बोझ अकेले नहीं उठाएगा।
रक्षा खर्च पर असंतुलन का मुद्दा
ट्रम्प ने NATO के अन्य सदस्यों से अपील की कि वे अपनी-अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार रक्षा क्षेत्र में उचित योगदान दें। उन्होंने कहा कि रक्षा बजट में यह असंतुलन केवल अमेरिका के लिए आर्थिक दबाव नहीं है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी खर्च
ट्रम्प ने यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिका ने अकेले इस संघर्ष में 200 बिलियन डॉलर का निवेश किया है, जबकि NATO के बाकी सदस्य देशों का योगदान काफी कम रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल अमेरिका के लिए अनुचित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक साझेदारी की भावना के भी विपरीत है।
अमेरिकी नेतृत्व और NATO का भविष्य
ट्रम्प ने अपने संबोधन में यह स्पष्ट किया कि अमेरिका अब अपने रक्षा खर्च में संतुलन लाने और वैश्विक सुरक्षा साझेदारी को पुनर्गठित करने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा, “हम ऐसे निर्णय ले रहे हैं जो न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद होंगे। NATO के सभी सदस्यों को अपनी जिम्मेदारियां निभानी होंगी।”
ट्रम्प के इस बयान को वैश्विक स्तर पर काफी अहम माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अब अपने सहयोगियों से अधिक सक्रिय योगदान की उम्मीद कर रहा है। NATO देशों पर यह देखने का दबाव होगा कि वे आने वाले समय में ट्रम्प की अपील पर क्या कदम उठाते हैं।
