मऊ तहसील में बिना मानकों के चल रही पैथोलॉजी पर उठे सवाल, जांच व्यवस्था और अधिकारियों की चुप्पी बनी चर्चा का विषय
मऊ तहसील क्षेत्र में बिना डिग्री संचालित पैथोलॉजी सेंटरों और बायो मेडिकल वेस्ट (BMW) लाइसेंस को लेकर उठे सवालों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। शिकायत के बाद जांच का आश्वासन दिया गया, लेकिन रिपोर्ट का इंतजार जारी है। अब लोगों की नजर निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

मऊ तहसील क्षेत्र में संचालित कुछ पैथोलॉजी सेंटरों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर बिना आवश्यक डिग्री और निर्धारित मानकों के जांच कार्य किया जा रहा है। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बायो मेडिकल वेस्ट (BMW) लाइसेंस से जुड़े नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
🔍 बिना डिग्री जांच का आरोप, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
स्वास्थ्य क्षेत्र में पैथोलॉजी जांच का महत्वपूर्ण स्थान होता है, क्योंकि मरीजों के इलाज का बड़ा हिस्सा जांच रिपोर्ट पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि बिना योग्य व्यक्ति या बिना आवश्यक प्रमाण-पत्रों के जांच की जाती है तो मरीजों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है।
मऊ तहसील क्षेत्र में कुछ पैथोलॉजी केंद्रों पर आरोप लगाया गया है कि वहां नियमों की अनदेखी करते हुए जांच कार्य किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मामलों में सख्त निगरानी करनी चाहिए ताकि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ न हो।
🏥 BMW लाइसेंस को लेकर उठे गंभीर प्रश्न
पैथोलॉजी और चिकित्सा संस्थानों में निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निपटान के लिए संबंधित विभाग से अनुमति और लाइसेंस लेना आवश्यक होता है। आरोप है कि क्षेत्र में संचालित कुछ केंद्रों के पास बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट (BMW) से संबंधित आवश्यक लाइसेंस उपलब्ध नहीं हैं।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल कचरे का गलत तरीके से निपटान संक्रमण फैलाने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का कारण बन सकता है।
📌 किसके आदेश पर चल रहे हैं ऐसे केंद्र?
स्थानीय लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कोई संस्था निर्धारित नियमों को पूरा नहीं करती तो वह लंबे समय तक कैसे संचालित हो रही है।
लोगों का कहना है कि संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर बिना आवश्यक दस्तावेजों और अनुमति के कोई केंद्र कैसे काम कर रहा है, इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

💰 एंट्री व्यवस्था के आरोपों से मचा हड़कंप
इस मामले में कुछ लोगों द्वारा आरोप लगाया गया है कि विभागीय स्तर पर कथित रूप से एंट्री व्यवस्था चल रही है। आरोपों में पंकज गोयल, चीफ फार्मासिस्ट का नाम भी सामने आया है, जिन पर महीने की एंट्री लेने के आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो सके।
📄 अधिकारियों से की गई शिकायत, जांच का इंतजार
मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। शिकायत के बाद जांच का आश्वासन भी दिया गया है। बताया जा रहा है कि सीएमओ कार्यालय चित्रकूट द्वारा मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच कराने की बात कही गई थी।
लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी पूरी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जांच में देरी होती है तो सवाल और अधिक गंभीर हो जाते हैं।
⚖️ निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। पैथोलॉजी सेंटरों की जांच, संचालकों की योग्यता, लाइसेंस की स्थिति और बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया की जांच आवश्यक है।
यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित संस्थानों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि लगाए गए आरोप गलत हैं तो भी जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
🔎 जनता की मांग — पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय हो
मऊ तहसील क्षेत्र के लोगों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन इस मामले में जल्द से जल्द स्पष्ट रिपोर्ट जारी करें। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर किन नियमों के तहत ऐसे केंद्र संचालित हो रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या है।
स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है कि प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करे। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है।
निष्कर्ष:
मऊ तहसील में पैथोलॉजी संचालन को लेकर उठे सवाल केवल एक संस्था या व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी प्रणाली पर प्रश्न खड़े करते हैं। निष्पक्ष जांच, स्पष्ट कार्रवाई और जवाबदेही ही इस मामले में जनता का भरोसा वापस ला सकती है।
रिपोर्ट: पंकज त्रिपाठी, तहसील संवाददाता
प्रकाशन: हिट एंड हॉट न्यूज़
स्थान: मऊ, जनपद चित्रकूट (उत्तर प्रदेश)
दिनांक: 03 अगस्त 2026