मेडिकल स्टोर के बाहर परिजनों का हंगामा, फर्जी इलाज और धोखाधड़ी का आरोप; बच्चे की हालत बिगड़ने पर प्रयागराज ले जाना पड़ा
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी मरीज का इलाज केवल अधिकृत और योग्य चिकित्सक से ही कराया जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति पर बिना आवश्यक योग्यता या अनुमति के चिकित्सा कार्य करने का आरोप है, तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसके दस्तावेजों, पंजीकरण, दवाओं और उपचार संबंधी रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, मरीज के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है।

मऊ/संकट मोचन नगर। स्थानीय क्षेत्र में एक मेडिकल स्टोर संचालक पर कथित रूप से बिना उचित चिकित्सकीय अधिकार के इलाज करने और मरीज के परिजनों से पैसे लेने का मामला सामने आया है। मरीज की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने और स्थिति बिगड़ने के बाद परिजनों ने मेडिकल स्टोर के बाहर पहुंचकर नाराजगी जताई और हंगामा किया। परिजनों ने संचालक पर इलाज के नाम पर धोखाधड़ी करने तथा मरीज के स्वास्थ्य के साथ कथित तौर पर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पांच दिन में ठीक करने का दावा करने का आरोप
पीड़ित परिजन रामलोचन, निवासी टिकरा टोला, मऊ के संकट मोचन नगर क्षेत्र के बताए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक नरेन उर्फ नारायण दुकान के माध्यम से दवाएं देने के साथ कथित तौर पर मरीजों का इलाज भी करता है।
रामलोचन के मुताबिक, उनके बच्चे की तबीयत खराब होने पर वे इलाज के लिए मेडिकल स्टोर संचालक के पास पहुंचे थे। आरोप है कि संचालक ने बच्चे को महज कुछ दिनों में ठीक करने का भरोसा दिया और पांच दिन के भीतर पूरी तरह स्वस्थ करने की बात कहते हुए 5,000 रुपये लिए।
परिजनों का कहना है कि उन्हें संचालक की बात पर भरोसा था और इसी उम्मीद में बच्चे का उपचार कराया गया। हालांकि, निर्धारित समय बीतने के बाद भी बच्चे की हालत में सुधार नहीं हुआ।
हालत बिगड़ने पर प्रयागराज ले जाना पड़ा
परिजनों का आरोप है कि उपचार के बावजूद बच्चे की स्थिति सामान्य होने के बजाय और गंभीर होती चली गई। जब स्थानीय स्तर पर इलाज से राहत नहीं मिली तो परिवार को बच्चे को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए प्रयागराज ले जाना पड़ा।
परिजनों के अनुसार, प्रयागराज में बच्चे के इलाज और अन्य चिकित्सकीय खर्चों में करीब दो लाख रुपये खर्च हो गए। परिवार का दावा है कि यदि शुरुआत में ही उचित चिकित्सा सलाह और उपचार मिल जाता तो उन्हें इतनी परेशानी और आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ता।
मेडिकल स्टोर के बाहर जताया आक्रोश
घटना से नाराज मरीज के परिजन मेडिकल स्टोर के बाहर पहुंचे और संचालक के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान वहां हंगामे जैसी स्थिति बन गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज के नाम पर उनसे पैसे लिए गए और उन्हें मरीज को जल्द ठीक होने का भरोसा दिया गया, लेकिन उपचार के बाद बच्चे की स्थिति खराब हो गई।
परिजनों ने पूरे मामले की जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
प्रशासन से जांच की मांग
परिवार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मेडिकल स्टोर संचालक के पास मरीजों का उपचार करने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता और वैधानिक अनुमति थी या नहीं। साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि मरीज को किस प्रकार की दवाएं दी गईं और उपचार के दौरान किन चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन से मेडिकल स्टोर की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बिना आवश्यक योग्यता या अनुमति के चिकित्सा कार्य कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में दूसरे मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी
फिलहाल मेडिकल स्टोर संचालक पर लगाए गए आरोप पीड़ित परिवार के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। मामले में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस अथवा प्रशासन की ओर से जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित उपचार में नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि स्थानीय स्तर पर दवा दुकानों और चिकित्सा सेवाओं की निगरानी कितनी प्रभावी है। मरीज और उनके परिजन अक्सर बीमारी की स्थिति में तत्काल उपचार की तलाश करते हैं। ऐसे में योग्य चिकित्सक से परामर्श और अधिकृत चिकित्सा केंद्र पर इलाज कराना बेहद महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट: पंकज त्रिपाठी, तहसील संवाददाता
प्रकाशन: हिट एंड हॉट न्यूज़
स्थान: मऊ, जनपद चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 11 अगस्त 2026