BPSC TRE 4 को लेकर पटना में छात्रों का प्रदर्शन तेज, 15 सूत्रीय मांगों पर सरकार से समाधान की उम्मीद

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पटना। बिहार में शिक्षक भर्ती और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है। राजधानी पटना के गर्दनीबाग में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से संबंधित नीतियों और प्रक्रिया में बदलाव किए जाने की आवश्यकता है, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर मिल सके। आंदोलन में BPSC TRE 4 (Teacher Recruitment Exam) समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कई मुद्दे प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं।

छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने 15 सूत्रीय ज्ञापन रखने की तैयारी की है। इनमें नेगेटिव मार्किंग समाप्त करने, एक अभ्यर्थी-एक परिणाम की नीति लागू करने, डोमिसाइल नीति लागू करने और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तिथियां घोषित करने जैसी मांगें शामिल हैं। आंदोलन के दौरान मंगलवार को स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने के लिए आगे बढ़े।

गर्दनीबाग में लगातार जारी है छात्रों का आंदोलन

पटना का गर्दनीबाग लंबे समय से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अभ्यर्थियों के आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। इस बार भी शिक्षक भर्ती और अन्य सरकारी नौकरियों से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्र यहां एकजुट हुए हैं। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की मांग कर रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को उचित अवसर मिल सके। नेगेटिव मार्किंग को लेकर भी आंदोलनकारियों में असंतोष है। उनका तर्क है कि कई परीक्षाओं में गलत उत्तर के लिए अंक काटे जाने की व्यवस्था अभ्यर्थियों के परिणाम को प्रभावित कर सकती है। इसलिए वे नेगेटिव मार्किंग हटाने की मांग कर रहे हैं।

इसके साथ ही छात्र ‘वन कैंडिडेट-वन रिजल्ट’ यानी एक अभ्यर्थी के लिए एक स्पष्ट और अंतिम परिणाम की नीति लागू करने की मांग भी उठा रहे हैं। आंदोलनकारियों का मानना है कि अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं और परिणामों में स्पष्टता होने से अभ्यर्थियों के बीच भ्रम कम होगा।

मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च से बढ़ा तनाव

मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने का प्रयास किया। छात्र आगे बढ़ते हुए जेपी गोलंबर के पास पहुंचे, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध की स्थिति बन गई।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों की तैनाती की गई थी। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया गया। इसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया गया और मामूली लाठीचार्ज की स्थिति भी बनी।

इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई। छात्रों की मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित हुआ और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत की संभावनाएं भी बढ़ीं।

चिराग पासवान ने की प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात

छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान गर्दनीबाग पहुंचे और प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से मुलाकात की। उन्होंने छात्रों की समस्याओं को सुना और उनके 15 सूत्रीय ज्ञापन को समझने का प्रयास किया।

छात्रों के साथ बातचीत के दौरान भर्ती परीक्षाओं, शिक्षक नियुक्ति और अन्य सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। चिराग पासवान ने संकेत दिया कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार खुले मन से विचार करने के पक्ष में है।

इसके बाद उन्होंने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी मुलाकात की। इस बैठक में प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की गई। इस घटनाक्रम से अभ्यर्थियों को उम्मीद जगी है कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से आगे कोई ठोस पहल हो सकती है।

डोमिसाइल नीति लागू करने की प्रमुख मांग

छात्रों की प्रमुख मांगों में बिहार में डोमिसाइल नीति लागू करना भी शामिल है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि राज्य की सरकारी नौकरियों में बिहार के स्थानीय अभ्यर्थियों के हितों को पर्याप्त महत्व मिले।

डोमिसाइल से जुड़ा मुद्दा लंबे समय से बिहार के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच चर्चा में रहा है। छात्रों का कहना है कि राज्य के युवाओं को सरकारी नियुक्तियों में अधिक अवसर मिलना चाहिए और भर्ती नीति में स्थानीय उम्मीदवारों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

यह मांग केवल शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न सरकारी नियुक्तियों से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में सरकार के सामने इस विषय पर संतुलित नीति तैयार करने की चुनौती होगी।

70वीं BPSC परीक्षा को रद्द करने की मांग

प्रदर्शनकारियों की 15 सूत्रीय मांगों में 70वीं बीपीएससी परीक्षा को रद्द करने की मांग भी शामिल बताई गई है। अभ्यर्थियों का एक वर्ग परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर सवाल उठा रहा है।

छात्र चाहते हैं कि उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाए और परीक्षा से जुड़े विवादों का स्पष्ट समाधान निकाला जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा होता है, इसलिए परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

संविदाकर्मियों के वेटेज का भी विरोध

छात्रों ने बीएसएससी में संविदाकर्मियों को दिए जाने वाले वेटेज को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया में सभी अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर होना चाहिए।

इसके अलावा प्रदर्शनकारी संविदा आधारित नियुक्तियों के स्थान पर स्थायी सरकारी नौकरियों की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि लंबे समय तक संविदा पर काम करने वाले युवाओं को नौकरी की स्थिरता नहीं मिल पाती। ऐसे में सरकार को स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तारीख घोषित करने की मांग

छात्रों की एक महत्वपूर्ण मांग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तिथियों की घोषणा से जुड़ी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा कैलेंडर स्पष्ट नहीं होने से उनकी तैयारी प्रभावित होती है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा लंबे समय तक अध्ययन करते हैं और परीक्षा की तारीख के आधार पर अपनी रणनीति बनाते हैं। ऐसे में समय पर परीक्षा कार्यक्रम जारी होने से अभ्यर्थियों को तैयारी करने में सुविधा मिल सकती है।

छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं के लिए नियमित और स्पष्ट कैलेंडर जारी किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें बार-बार अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

शिक्षक भर्ती को लेकर युवाओं में बढ़ी उम्मीद

BPSC TRE 4 को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंता शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर है। बिहार में बड़ी संख्या में युवा शिक्षक बनने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े नियमों और परिणामों को लेकर उठने वाले सवाल सीधे तौर पर उनके भविष्य से जुड़े हैं।

अभ्यर्थी चाहते हैं कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध हो और परीक्षा से लेकर परिणाम तथा नियुक्ति तक हर चरण में स्पष्टता रहे। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की आवश्यकता को देखते हुए रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए।

सरकार के रुख पर टिकी छात्रों की नजर

चिराग पासवान की छात्रों से मुलाकात और इसके बाद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ हुई चर्चा ने आंदोलन को नया राजनीतिक आयाम दिया है। अब छात्रों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है।

फिलहाल आंदोलनकारियों की कई मांगें ऐसी हैं, जिन पर प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर निर्णय की आवश्यकता होगी। डोमिसाइल नीति, परीक्षा प्रणाली में बदलाव, 70वीं BPSC परीक्षा और संविदाकर्मियों से संबंधित नियम जैसे विषय व्यापक प्रभाव वाले हैं।

ऐसे में सरकार के सामने छात्रों की चिंताओं को सुनने के साथ-साथ नियमों, कानूनी प्रावधानों और भर्ती प्रक्रिया की व्यवहारिकता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की चुनौती होगी।

संवाद से समाधान की उम्मीद

पटना में छात्रों का यह आंदोलन एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और रोजगार सुरक्षा की मांग लगातार मजबूत हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा है और अब उन्हें सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद है।

आंदोलन के दौरान पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बनने के बावजूद छात्रों की ओर से बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद बनी हुई है। सरकार की ओर से भी छात्रों की मांगों को खुले मन से देखने का संकेत मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

अब देखना यह होगा कि सरकार 15 सूत्रीय मांगों में से किन मुद्दों पर तत्काल निर्णय लेती है और किन मांगों पर विस्तृत विचार-विमर्श की आवश्यकता पड़ती है। फिलहाल BPSC TRE 4 और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर पटना में छात्रों का आंदोलन बिहार की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को केंद्र में ले आया है।

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