जल जीवन मिशन की कवायद के बीच सीधामऊ की गलियों में जलभराव, कीचड़ और गंदगी से ग्रामीण बेहाल

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

सीधामऊ/सरवनखेड़ा, कानपुर देहात। ग्रामीण परिवारों तक पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से चल रही जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं गांवों की तस्वीर बदलने का प्रयास कर रही हैं। हालांकि, केवल घरों तक पानी पहुंच जाना ही ग्रामीण विकास की पूरी तस्वीर नहीं है। पानी की उपलब्धता के साथ उसकी निकासी, साफ-सफाई, सुरक्षित रास्ते और बेहतर जल प्रबंधन भी उतने ही जरूरी हैं। कानपुर देहात के सरवनखेड़ा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सीधामऊ में सामने आ रही स्थिति इसी ओर ध्यान आकर्षित करती है।

गांव की कई गलियों में बारिश और इस्तेमाल किए गए पानी के जमा होने से रास्तों पर कीचड़ की स्थिति बनी हुई है। कुछ स्थानों पर पानी लंबे समय तक ठहरा दिखाई देता है, जिससे पैदल आने-जाने वाले ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण मामूली बारिश के बाद भी कई रास्तों पर आवागमन मुश्किल हो जाता है।

पेयजल के साथ जलनिकासी भी जरूरी

जल जीवन मिशन का मूल उद्देश्य ग्रामीण घरों में नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। यह सुविधा ग्रामीण परिवारों के दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। लेकिन जब किसी गांव में पानी पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाती है, तब उसके साथ जलनिकासी और स्वच्छता की व्यवस्था पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना आवश्यक है।

घरों में पानी की आपूर्ति बढ़ने के साथ घरेलू इस्तेमाल के बाद निकलने वाले पानी की मात्रा भी बढ़ सकती है। यदि उसके लिए उचित निकासी मार्ग मौजूद न हो तो यही पानी गलियों में जमा होकर कीचड़, दुर्गंध और गंदगी की समस्या पैदा कर सकता है। सीधामऊ में दिखाई दे रहे जलभराव के हालात इसी व्यापक चुनौती की ओर संकेत करते हैं।

कई गलियों में आवागमन प्रभावित

स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ी परेशानी गांव के उन हिस्सों में है जहां रास्तों पर पानी जमा हो जाता है। जलभराव के कारण लोगों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन से निकलने वाले लोगों के लिए ऐसी स्थिति विशेष रूप से असुविधाजनक हो सकती है।

पानी के लंबे समय तक जमा रहने से रास्तों की सतह भी खराब होने की आशंका रहती है। मिट्टी वाले अथवा पहले से कमजोर रास्तों पर लगातार नमी और आवागमन के कारण गड्ढे बन सकते हैं। इससे समस्या केवल जलभराव तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सड़क की गुणवत्ता और ग्रामीणों की रोजमर्रा की आवाजाही से भी जुड़ जाती है।

नालियों की सफाई और नियमित रखरखाव की मांग

ग्रामीण क्षेत्र में जलनिकासी की व्यवस्था तभी प्रभावी हो सकती है जब नालियों की नियमित सफाई होती रहे। कचरा, मिट्टी और अन्य अवरोध नालियों में जमा होने पर पानी का प्रवाह रुक सकता है। इसके बाद बारिश या घरेलू पानी के बढ़ने पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न होना स्वाभाविक है।

सीधामऊ के ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग गांव का स्थलीय निरीक्षण करे। जिन स्थानों पर पानी निकासी की समस्या गंभीर है, वहां कारणों की पहचान कर स्थायी समाधान तैयार किया जाए। नालियों की सफाई के साथ जरूरत के अनुसार उनकी मरम्मत और नए निकासी मार्गों का निर्माण भी कराया जाना चाहिए।

विकास कार्यों के बाद रास्तों की स्थिति पर भी नजर जरूरी

ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने, सड़क काटने अथवा अन्य विकास कार्यों के दौरान गलियों और रास्तों की स्थिति प्रभावित हो सकती है। ऐसे कार्यों के बाद रास्तों को पहले की स्थिति में लाना भी आवश्यक होता है। यदि कहीं पाइपलाइन या अन्य कार्य के चलते सड़क की सतह क्षतिग्रस्त हुई है, तो उसकी मरम्मत कराना संबंधित व्यवस्था की जिम्मेदारी का हिस्सा होना चाहिए।

सीधामऊ में ग्रामीण चाहते हैं कि विकास योजनाओं का लाभ उन्हें पूरी तरह मिले और किसी भी परियोजना के कारण उत्पन्न होने वाली स्थानीय समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल की सुविधा उनके लिए जरूरी है, लेकिन इसके साथ स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण भी मिलना चाहिए।

बारिश के मौसम में बढ़ जाती है समस्या

मानसून के दौरान ग्रामीण इलाकों में जलनिकासी की कमजोर व्यवस्था का असर ज्यादा स्पष्ट दिखाई देता है। यदि बारिश का पानी निकलने के लिए पर्याप्त ढलान और नालियां नहीं हैं तो कम समय में ही रास्तों पर पानी भर सकता है। लगातार बारिश होने पर यह स्थिति और गंभीर हो जाती है।

जलभराव केवल आवागमन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि लंबे समय तक पानी जमा रहने पर आसपास के वातावरण की स्वच्छता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए बारिश शुरू होने से पहले नालियों की सफाई, जलनिकासी मार्गों की जांच और संवेदनशील स्थानों की पहचान करना स्थानीय प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

ग्रामीणों को प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद

सीधामऊ के लोगों की उम्मीद अब संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर है। ग्रामीण चाहते हैं कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लें और समस्या का केवल अस्थायी नहीं, बल्कि टिकाऊ समाधान निकालें।

उनकी प्रमुख मांगों में जलभराव वाले स्थानों की पहचान, नालियों की सफाई, पानी की निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था, खराब रास्तों की मरम्मत और विकास कार्यों से प्रभावित हिस्सों को दुरुस्त करना शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कदम उठाए जाएं तो बरसात के दौरान होने वाली परेशानियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

योजनाओं की सफलता का पैमाना जमीन पर दिखना चाहिए

सरकारी योजनाओं की सफलता का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है जब उनका असर आम लोगों के दैनिक जीवन में दिखाई दे। घर तक नल का पानी पहुंचना निश्चित रूप से ग्रामीण सुविधाओं के विस्तार की दिशा में अहम कदम है, लेकिन इसके साथ गांव की गलियां साफ रहें, पानी सड़कों पर न ठहरे और लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिले, यह भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सीधामऊ की स्थिति इस बात की जरूरत रेखांकित करती है कि पेयजल, जलनिकासी, स्वच्छता और सड़क व्यवस्था को अलग-अलग समस्याओं के बजाय एक-दूसरे से जुड़े विषयों के रूप में देखा जाए। किसी गांव का समग्र विकास तभी संभव है जब बुनियादी सुविधाएं एक साथ मजबूत हों।

फिलहाल सीधामऊ के ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण कर जलनिकासी की कमियों को दूर करता है और खराब रास्तों की मरम्मत कराता है, तो ग्रामीणों को रोजमर्रा की परेशानी से राहत मिल सकती है। साथ ही इससे सरकारी योजनाओं का लाभ भी अधिक प्रभावी और टिकाऊ तरीके से लोगों तक पहुंच सकेगा।

फोटो कैप्शन: सीधामऊ गांव की गलियों में जमा पानी और कीचड़ के कारण ग्रामीणों को आवागमन में हो रही परेशानी।

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