प्रयागराज में TGT-PGT भर्ती नियमों को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी, 5 सितंबर से अनशन पर अभ्यर्थी
प्रयागराज | 20 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में TGT (ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर) और PGT (पोस्ट ग्रेजुएट टीचर) भर्ती प्रक्रिया से जुड़े परीक्षा नियमों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में पुराने परीक्षा नियमों को फिर से लागू किए जाने की मांग कर रहे हैं। छात्रों के अनुसार, मौजूदा भर्ती नीति ने हजारों अभ्यर्थियों के सामने मानसिक दबाव और आर्थिक कठिनाइयां बढ़ा दी हैं।
प्रदर्शन की शुरुआत 5 सितंबर से हुई थी। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक उनका विरोध जारी रहेगा। इसी क्रम में कई अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वीडियो रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों के अनशन का 14वां दिन भी पूरा हो चुका है।

5 सितंबर से जारी है आंदोलन
प्रयागराज में चल रहे इस आंदोलन का मुख्य केंद्र TGT और PGT शिक्षक भर्ती परीक्षा से संबंधित नियमों में बदलाव का मुद्दा है। प्रदर्शनकारी पुराने परीक्षा नियमों की बहाली की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों को लेकर हुए बदलाव से लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की मुश्किलें बढ़ी हैं।
छात्र नेताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में युवा शिक्षक भर्ती की तैयारी में वर्षों से समय और पैसा लगा रहे हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में बदलाव उनके लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांग को सरकार तक पहुंचाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं।
5 सितंबर से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे लंबा खिंचता गया और इसके साथ भूख हड़ताल भी जुड़ गई। प्रदर्शन स्थल पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट और संतोषजनक निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन समाप्त करने का सवाल नहीं है।
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल ने बढ़ाई चिंता
आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रदर्शनकारियों की भूख हड़ताल है। वीडियो में बताया गया है कि कुछ छात्र कई दिनों से भोजन त्यागकर विरोध कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों का अनशन 14वें दिन तक पहुंचने की बात कही गई है।
लंबे समय तक चलने वाला अनशन प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता पैदा करता है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांगों को गंभीरता से लिए जाने के लिए यह कदम उठाया है। उनका उद्देश्य सरकार और संबंधित अधिकारियों का ध्यान भर्ती नियमों से जुड़े विवाद की ओर आकर्षित करना है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी टकराव के बजाय शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं। इसी कारण आंदोलन स्थल पर गांधीवादी विचारों और अहिंसक संघर्ष से जुड़े प्रतीकों को भी प्रमुखता दी गई है।
राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों का समर्थन
आंदोलन के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों से जुड़े लोग भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे हैं। वीडियो रिपोर्ट के मुताबिक समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से जुड़े नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने छात्रों के आंदोलन को समर्थन दिया है। इसके अलावा CJP यानी Citizens for Justice and Peace से जुड़े लोगों की उपस्थिति का भी उल्लेख किया गया है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी से आंदोलन को सार्वजनिक स्तर पर अधिक चर्चा मिली है। हालांकि प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा भर्ती परीक्षा के नियमों में बदलाव और पुराने नियमों की बहाली ही बताया जा रहा है।
छात्र नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में नहीं है। उनका फोकस भर्ती प्रक्रिया से संबंधित अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है। उनका दावा है कि इस मुद्दे से बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं का भविष्य जुड़ा हुआ है।
छात्रों ने बताई मानसिक और आर्थिक परेशानी
प्रदर्शन में शामिल छात्रों की ओर से बार-बार यह बात उठाई जा रही है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों ने अभ्यर्थियों पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ाया है। शिक्षक भर्ती की तैयारी के लिए विद्यार्थी लंबे समय तक कोचिंग, किताबों, आवास, यात्रा और अन्य शैक्षणिक खर्चों पर पैसा लगाते हैं।
ऐसे में नियमों में बदलाव होने पर उनकी तैयारी और रणनीति प्रभावित होने की बात प्रदर्शनकारी कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि वे लगातार परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया की प्रतीक्षा करते रहे हैं और अब अपनी मांगों के समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार को अभ्यर्थियों की समस्याओं को केवल प्रशासनिक विषय के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि उन युवाओं की परिस्थितियों को भी समझना चाहिए जो लंबे समय से सरकारी शिक्षक बनने के लिए तैयारी कर रहे हैं।
सरकार से निर्णय की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जल्द स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की है। वीडियो रिपोर्ट में आंदोलनकारियों की ओर से सरकार की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर निराशा व्यक्त की गई है।
प्रदर्शन स्थल पर यह भी चर्चा सामने आई कि आने वाले कुछ दिनों में सरकार की ओर से किसी निर्णय की संभावना हो सकती है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय सामने आने तक इसे केवल चर्चा या उम्मीद के तौर पर ही देखा जा सकता है।
छात्र नेताओं का कहना है कि उन्हें आश्वासन के बजाय स्पष्ट कार्रवाई चाहिए। उनके मुताबिक जब तक पुराने परीक्षा नियमों को लेकर उनकी मांग पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
गांधी, विवेकानंद और आंबेडकर के विचारों का संदेश
आंदोलन स्थल की एक विशेष बात यह है कि वहां महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और डॉ. भीमराव आंबेडकर के चित्र लगाए गए हैं। प्रदर्शनकारी इसे अपने शांतिपूर्ण और वैचारिक संघर्ष का प्रतीक बता रहे हैं।
महात्मा गांधी का नाम अहिंसक आंदोलन और सत्याग्रह से जुड़ा रहा है, जबकि स्वामी विवेकानंद और डॉ. आंबेडकर के विचार युवाओं, शिक्षा, समानता और सामाजिक जिम्मेदारी के संदर्भ में व्यापक रूप से उद्धृत किए जाते हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे इन विचारों से प्रेरणा लेते हुए अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रख रहे हैं। आंदोलन स्थल पर इन महापुरुषों के चित्र प्रदर्शन को एक वैचारिक संदेश भी देते हैं।
आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी
छात्र नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन का दायरा बढ़ाया जा सकता है। प्रदर्शनकारियों की ओर से इसे व्यापक स्तर पर ले जाने और जरूरत पड़ने पर देशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी भी दी गई है।
फिलहाल प्रयागराज में छात्रों का प्रदर्शन जारी है और भूख हड़ताल आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बनी हुई है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा होती है या नहीं, इस पर आंदोलन की अगली दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
TGT और PGT भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अभ्यर्थियों की मांग अब प्रयागराज तक सीमित रहने के बजाय व्यापक स्तर पर चर्चा का विषय बनती जा रही है। छात्रों की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि वे अपने भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर समाधान चाहते हैं और मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने के लिए तैयार हैं।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि सरकार और संबंधित भर्ती प्राधिकरण इस विवाद को किस प्रकार संबोधित करते हैं और क्या प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई स्पष्ट निर्णय सामने आता है। तब तक प्रयागराज में छात्रों का आंदोलन और उनकी भूख हड़ताल जारी रहने की बात कही जा रही है।