ओडिशा में गहरे दबाव का असर: मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, 33 ODRAF टीमें तैनात
सुदाम बाबू स्टेट ओडिशा
हिट एंड हॉट न्यूज़
भुवनेश्वर, 23 सितंबर 2026। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के क्षेत्र के कारण ओडिशा के कई हिस्सों में भारी बारिश की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार को लोक सेवा भवन में उच्चस्तरीय बैठक कर बारिश और संभावित प्रभावों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने, संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए।

बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी, मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विशेष राहत आयुक्त ने मुख्यमंत्री को गहरे दबाव की मौजूदा स्थिति, इसके संभावित मार्ग, बारिश के पूर्वानुमान और राज्य में की जा रही तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।
‘शून्य जनहानि’ पर मुख्यमंत्री का जोर
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक आपदा के दौरान शून्य जनहानि को सरकार की प्राथमिकता बनाए रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी विभागों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जलभराव वाले इलाकों और ऐसे स्थानों पर रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर ध्यान देने को कहा, जहां बारिश या बाढ़ के कारण खतरा बढ़ सकता है। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत केंद्रों में पहुंचाने तथा वहां भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार के अनुसार, फिलहाल चक्रवात बनने की संभावना नहीं है, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जा रही है। राज्य के कई हिस्सों में 23 और 24 सितंबर को भारी बारिश होने की संभावना है, जबकि 25 सितंबर के बाद मौसम में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद जताई गई है।

33 ODRAF टीमें मैदान में
आपदा से निपटने के लिए ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स यानी ODRAF की 33 टीमों को विभिन्न जिलों में तैनात किया गया है। इनमें गंजाम में छह, गजपति में तीन, कोरापुट में छह, मलकानगिरी में तीन, रायगड़ा में तीन, कालाहांडी में दो और बलांगीर में एक टीम तैनात की गई है।
इसके अतिरिक्त गंजाम के छत्रपुर में मौजूद नौ ODRAF टीमों को रिजर्व में रखा गया है। इन टीमों को जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों में तत्काल भेजा जा सकता है। बचाव अभियान के लिए नावों, लाइफ जैकेट और पावर बोट समेत आवश्यक उपकरणों को भी तैयार रखा गया है।
ODRAF के साथ-साथ NDRF और फायर सर्विस के जवानों को भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
तटीय इलाकों में विशेष सतर्कता
गहरे दबाव के प्रभाव से समुद्र में परिस्थितियां खराब होने की संभावना को देखते हुए राज्य के सभी बंदरगाहों पर लोकल वार्निंग सिग्नल नंबर-3 लगाया गया है। समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि प्रतिबंधों का सख्ती से पालन हो।
समुद्र की स्थिति को देखते हुए मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन को किसी भी संभावित जोखिम की स्थिति में तत्काल कदम उठाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
सात जिलों पर विशेष नजर
सरकार ने गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट, मलकानगिरी, नबरंगपुर और कालाहांडी को विशेष प्राथमिकता वाले जिलों में रखा है। इन जिलों में भारी बारिश के संभावित प्रभाव को देखते हुए राहत और बचाव से संबंधित संसाधनों को पहले से तैयार रखा गया है।
इसके अलावा नुआपाड़ा, बलांगीर, कंधमाल, पुरी, खुर्दा और नयागढ़ जिलों में भी आवश्यक तैयारियां की गई हैं। स्थानीय प्रशासन को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसी भी बदलाव की सूचना तुरंत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
चौबीस घंटे सक्रिय रहेंगे आपात केंद्र
सरकार ने जिला और ब्लॉक स्तर के इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटरों को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने का निर्देश दिया है। संवेदनशील गांवों और बस्तियों की पहचान की जा रही है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए आश्रय केंद्र तैयार रखे गए हैं।
राहत केंद्रों पर सूखा भोजन, बच्चों के लिए आवश्यक आहार, पीने का पानी और स्वच्छता सामग्री का पर्याप्त भंडार रखने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि राहत सामग्री जरूरतमंद लोगों तक समय पर पहुंच सके।
नदियों और जलाशयों पर लगातार निगरानी
भारी बारिश की आशंका के बीच जल संसाधन विभाग को नदियों और जलाशयों के जलस्तर की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। संवेदनशील तटबंधों और कमजोर स्थानों का निरीक्षण किया जा रहा है।
जरूरत के अनुसार जलाशयों से पानी की नियंत्रित निकासी और संबंधित विभागों के साथ समन्वय की व्यवस्था भी की गई है। इससे अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति में जोखिम को कम करने की कोशिश की जा सकेगी।
शहरी इलाकों में जल निकासी व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। निचले इलाकों और अंडरपास में पानी निकालने के लिए डी-वॉटरिंग पंप तैयार रखे गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर यातायात को दूसरे मार्गों पर भेजने की योजना भी तैयार रखने को कहा गया है।
कई विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पंचायती राज एवं पेयजल, ऊर्जा, वाणिज्य एवं परिवहन, लोक निर्माण, कृषि एवं किसान सशक्तिकरण, मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास समेत विभिन्न विभागों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है।
स्वास्थ्य विभाग को संभावित प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रखने और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहने को कहा गया है। बिजली और परिवहन से जुड़े विभागों को भी किसी व्यवधान की स्थिति में जल्द कार्रवाई के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा गहरा दबाव
बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बना गहरा दबाव पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तट के बीच विशाखापत्तनम और गोपालपुर के आसपास से होकर कलिंगपट्टनम के निकट तट पार करने की संभावना बताई गई है।
इसके प्रभाव से ओडिशा के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। मौसम की गंभीरता को देखते हुए कुछ क्षेत्रों के लिए रेड वार्निंग भी जारी की गई है। विशेष रूप से रायगड़ा, कोरापुट और गजपति समेत संवेदनशील जिलों में प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की तैयारियों की असली परीक्षा
ओडिशा पहले भी चक्रवात, बाढ़ और भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता रहा है। ऐसे में राज्य सरकार इस बार भी शुरुआती स्तर पर ही राहत और बचाव संसाधनों को सक्रिय रखने पर जोर दे रही है। 33 ODRAF टीमों की तैनाती, NDRF और फायर सर्विस की तैयारी तथा आपात केंद्रों को चौबीस घंटे सक्रिय रखने का उद्देश्य संभावित नुकसान को कम करना है।
फिलहाल प्रशासन की नजर मौसम की दिशा, वर्षा की तीव्रता, नदियों के जलस्तर और तटीय परिस्थितियों पर बनी हुई है। सरकार ने लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और संवेदनशील परिस्थितियों में अनावश्यक जोखिम न लेने की अपील की है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद जिला स्तर पर अधिकारियों ने भी अपनी तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। आने वाले घंटों में बारिश और गहरे दबाव की स्थिति में होने वाले बदलाव के आधार पर राहत एवं बचाव व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है।