ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और FTA अवसरों पर उद्योग जगत से संवाद, निर्यात सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर

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नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026। भारत में कारोबार और निर्यात को अधिक सुगम बनाने की दिशा में सरकार ने उद्योग जगत के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से जुड़े अवसरों पर चर्चा तेज कर दी है। इसी क्रम में 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, FTA अवसरों और व्यापार सुधारों को लेकर एक हितधारक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला के बाद केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया।

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बैठक का मुख्य उद्देश्य कारोबारियों और निर्यातकों के सामने आने वाली प्रक्रियागत दिक्कतों को समझना, निर्यात सुविधा व्यवस्था को मजबूत करना और भारत के विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले बाजार अवसरों की जानकारी कारोबारियों तक पहुंचाना रहा। सरकार की ओर से भौतिक सहायता के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

जिला और राज्य स्तर पर निर्यातकों को मिलेगी सहायता

कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यातकों के लिए स्थानीय स्तर पर सहायता व्यवस्था मजबूत करने का प्रस्ताव रखा। PIB के अनुसार, लगभग 1,000 प्रशिक्षित स्थानीय कर्मियों का नेटवर्क तैयार करने की योजना बताई गई है। इन कर्मियों को क्षेत्रीय भाषाओं और निर्यात संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

इनका उद्देश्य जिला और राज्य स्तर पर निर्यातकों तथा संभावित निर्यातकों को मार्गदर्शन देना होगा। उद्योग मंडलों और क्षेत्रीय व्यापार संगठनों के माध्यम से भी इस व्यवस्था को कारोबारियों तक पहुंचाने की बात कही गई है।

यह व्यवस्था विशेष रूप से उन छोटे कारोबारियों और नए निर्यातकों के लिए उपयोगी हो सकती है जिन्हें विदेशी बाजारों में प्रवेश के दौरान दस्तावेजी प्रक्रिया, प्रमाणपत्र, बाजार नियम और अन्य औपचारिकताओं को समझने में कठिनाई होती है। हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था को किस तरीके से लागू किया जाएगा और इसका पूरा संचालन ढांचा क्या होगा, यह आगे की प्रक्रिया में स्पष्ट होना है।

Trade Connect प्लेटफॉर्म पर विशेष जोर

बैठक में Trade Connect प्लेटफॉर्म का भी उल्लेख किया गया। सरकार के अनुसार, इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को निर्यातकों के लिए उत्पाद और HSN कोड के आधार पर विभिन्न देशों की व्यापार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है।

इसके माध्यम से कारोबारियों को संबंधित बाजारों में लागू टैरिफ, उपलब्ध FTA अवसरों और समझौतों का लाभ लेने की प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने की परिकल्पना है। प्लेटफॉर्म में डिजिटल और AI आधारित उपकरणों के उपयोग से संभावित निर्यात अवसरों तथा बुनियादी ढांचे से जुड़े अंतर की पहचान में सहायता देने की भी योजना बताई गई है।

ऐसे डिजिटल माध्यमों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में किसी उत्पाद को दूसरे देश में भेजने से पहले वहां के शुल्क, प्रमाणन, गुणवत्ता मानक और नियमों की जानकारी आवश्यक होती है। एकीकृत जानकारी मिलने से कारोबारियों को बाजार चयन और व्यापार प्रक्रिया समझने में सहायता मिल सकती है।

उद्योग जगत ने उठाए कई महत्वपूर्ण मुद्दे

कार्यशाला में उद्योग संघों, व्यापार संगठनों और विभिन्न क्षेत्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने व्यापार प्रक्रिया से जुड़ी कई चुनौतियों को सामने रखा। इनमें सरकारी प्रणालियों और विदेशी व्यापार प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता भी शामिल रही।

उद्योग प्रतिनिधियों ने Certificates of Origin यानी मूल प्रमाणपत्र की डिजिटल प्रक्रिया को और अधिक देशों के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर चर्चा की। FTA के तहत कई उत्पादों को निर्धारित शर्तों के अनुसार शुल्क संबंधी लाभ मिल सकता है और इसके लिए उत्पाद की उत्पत्ति से जुड़े प्रमाण जरूरी होते हैं। ऐसे दस्तावेजों की डिजिटल व्यवस्था व्यापार प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकती है।

इसके अलावा DGFT, सीमा शुल्क विभाग, बैंक और व्यापार से जुड़े अन्य पक्षों के बीच निर्यात प्रक्रिया के बेहतर एकीकरण का मुद्दा भी उठाया गया। उद्योग की ओर से लॉजिस्टिक्स, दस्तावेजी देरी और समुद्री माल ढुलाई की लागत से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा हुई।

MSME और छोटे निर्यातकों के लिए नियमों की जानकारी अहम

भारत के व्यापार ढांचे में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन छोटे कारोबारी अक्सर अंतरराष्ट्रीय बाजार की प्रक्रियाओं, प्रमाणन, गुणवत्ता मानकों और अलग-अलग देशों के नियमों से जुड़ी जटिलताओं का सामना करते हैं।

कार्यशाला में MSME के लिए नियामकीय स्पष्टता और व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। उद्योग प्रतिनिधियों ने उत्पाद की गुणवत्ता, परीक्षण और प्रमाणन से जुड़े बुनियादी ढांचे तथा अलग-अलग बाजारों की आवश्यकताओं को समझने की जरूरत बताई।

सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता बनाए रखने को भी महत्वपूर्ण बताया गया। Export Promotion Councils और उद्योग संगठनों से अपने सदस्यों को विभिन्न विदेशी बाजारों के मानकों और अनुपालन आवश्यकताओं के बारे में जागरूक करने की अपेक्षा जताई गई है।

FTA के इस्तेमाल पर लगातार बढ़ रहा ध्यान

मुक्त व्यापार समझौतों का प्रभावी उपयोग सरकार के हालिया व्यापार एजेंडे में एक प्रमुख विषय रहा है। इससे पहले 3 सितंबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में भी पीयूष गोयल ने FTA के लाभों की जानकारी देश के जिलों, MSME, व्यापारियों, स्टार्टअप और महिला उद्यमियों तक पहुंचाने पर जोर दिया था।

सरकार का जोर केवल समझौतों पर हस्ताक्षर करने तक सीमित न रहकर उनके वास्तविक उपयोग को बढ़ाने पर है। इसके लिए उद्योग जगत को संबंधित बाजारों की जानकारी, शुल्क दरों, नियमों और FTA के तहत उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी देना जरूरी माना जा रहा है।

व्यापार प्रक्रिया में डिजिटल बदलाव की भूमिका

भारत में कारोबार से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यमों से जोड़ने का काम पहले से चल रहा है। उदाहरण के तौर पर National Single Window System (NSWS) के जरिए निवेशकों को अपने व्यवसाय के लिए आवश्यक मंजूरियों की पहचान करने, आवेदन करने और उनकी स्थिति देखने की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। DPIIT के अनुसार, इसका उद्देश्य अलग-अलग प्रक्रियाओं में दोहराव कम करना और अनुमोदन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।

इसी व्यापक डिजिटल बदलाव के संदर्भ में Trade Connect जैसे प्लेटफॉर्म को निर्यातकों के लिए उपयोगी सूचना माध्यम के रूप में विकसित करने की योजना सामने आई है।

आगे क्या होगा?

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़ी इस कार्यशाला में सामने आए सुझावों का प्रभाव उनके वास्तविक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। जिला और राज्य स्तर पर प्रशिक्षित कर्मियों की प्रस्तावित व्यवस्था, डिजिटल व्यापार प्लेटफॉर्म, सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय और प्रमाणपत्रों की इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया जैसे कदम लागू होने पर निर्यातकों को अपनी गतिविधियों से संबंधित जानकारी हासिल करने में सुविधा मिल सकती है।

वहीं, उद्योग की ओर से उठाए गए लॉजिस्टिक्स लागत, दस्तावेजी प्रक्रियाओं, परीक्षण एवं प्रमाणन और नियामकीय स्पष्टता जैसे मुद्दे बताते हैं कि व्यापार सुविधा केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने तक सीमित नहीं है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों, सीमा शुल्क, बैंकिंग व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स क्षेत्र और उद्योग संगठनों के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण रहेगा।

कुल मिलाकर, 22 सितंबर की कार्यशाला में सरकार और उद्योग के बीच संवाद के जरिए निर्यात सुविधा, FTA के बेहतर उपयोग और कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से प्रस्तावित डिजिटल और स्थानीय सहायता तंत्र किस तरह जमीन पर काम करता है, इसका आकलन इसके कार्यान्वयन और कारोबारियों को मिलने वाली वास्तविक सुविधा के आधार पर किया जा सकेगा।

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