नियमित उपचार, पोषण और जागरूकता से टीबी पर नियंत्रण संभव, जिलाधिकारी ने मरीज को सौंपी पोषण किट

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

औरैया, 23 सितंबर 2026। जिले में क्षय रोग यानी टीबी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को प्रभावी बनाने के लिए उपचार के साथ मरीजों के पोषण और सामाजिक सहयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय में टीबी का उपचार करा रहे मरीज विकास पाल, पुत्र गंभीर पाल, निवासी पढ़ीन दरवाजा, औरैया को निक्षय मित्र पहल के तहत उपचार के पांचवें महीने की पोषण किट प्रदान की।

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इस दौरान जिलाधिकारी ने मरीज से उसके उपचार और स्वास्थ्य की स्थिति के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिए जा रहे उपचार को निर्धारित तरीके से जारी रखने की सलाह दी। जिलाधिकारी ने कहा कि टीबी गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन समय पर पहचान, चिकित्सकीय देखरेख और नियमित उपचार के माध्यम से इससे उबरना संभव है। उन्होंने मरीज को सलाह दी कि चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं का सेवन बीच में न रोकें और उपचार के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर स्वास्थ्यकर्मियों या डॉक्टर से संपर्क करें।

दवा बीच में छोड़ना पड़ सकता है नुकसानदायक

टीबी के उपचार में नियमित रूप से दवा लेना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कई बार उपचार शुरू होने के कुछ समय बाद मरीज को स्वास्थ्य में सुधार महसूस होने लगता है। ऐसी स्थिति में कुछ लोग स्वयं ही दवाएं बंद कर देते हैं। जिलाधिकारी ने इस तरह की लापरवाही से बचने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि मरीज को डॉक्टर द्वारा निर्धारित पूरी उपचार अवधि का पालन करना चाहिए। केवल लक्षण कम हो जाने को उपचार पूरा होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन और नियमित चिकित्सकीय निगरानी उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने अधिकारियों से भी कहा कि टीबी से उपचार करा रहे मरीजों के संपर्क में रहकर उनकी उपचार स्थिति की जानकारी ली जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाए।

पोषण भी उपचार प्रक्रिया का अहम हिस्सा

कार्यक्रम में टीबी मरीजों के लिए संतुलित एवं पौष्टिक भोजन की उपयोगिता पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि बीमारी के दौरान शरीर को पर्याप्त पोषण मिलना जरूरी है। उचित आहार मरीज को आवश्यक ऊर्जा और स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायता कर सकता है।

इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए निक्षय मित्र पहल के माध्यम से उपचाररत मरीजों को पोषण संबंधी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। विकास पाल को दी गई पोषण किट भी इसी पहल का हिस्सा है। इसका उद्देश्य उपचार के दौरान मरीज को अतिरिक्त पोषण सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि भोजन संबंधी कठिनाइयों के कारण उपचार प्रभावित न हो।

निक्षय मित्र कार्यक्रम के माध्यम से समाज के सक्षम लोग टीबी मरीजों की सहायता के लिए आगे आ सकते हैं। वे जरूरतमंद मरीजों को पोषण संबंधी सहयोग देकर उनके उपचार में सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।

टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी

जिलाधिकारी ने कहा कि टीबी से लड़ाई में जागरूकता की भूमिका महत्वपूर्ण है। बीमारी के लक्षणों और उपचार को लेकर सही जानकारी लोगों तक पहुंचने से मरीज समय पर स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बीमारी को लेकर किसी प्रकार की गलत धारणा या डर के कारण जांच और उपचार में देरी नहीं होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति में टीबी से संबंधित लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेकर आवश्यक जांच करानी चाहिए।

जिलाधिकारी ने समाज से यह भी अपील की कि टीबी मरीजों के साथ भेदभाव न किया जाए। बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को परिवार और समाज का सहयोग मिलने से वह उपचार को नियमित रूप से जारी रखने के लिए प्रोत्साहित हो सकता है।

मरीजों के साथ सहयोग की जरूरत

टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने के लिए केवल सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि परिवार और समाज की भागीदारी भी आवश्यक है। परिवार के सदस्य मरीज को समय पर दवा लेने के लिए प्रेरित कर सकते हैं और चिकित्सकीय निर्देशों के पालन में उसकी मदद कर सकते हैं।

इसी प्रकार निक्षय मित्र पहल के माध्यम से सामाजिक संगठन, संस्थाएं और इच्छुक व्यक्ति उपचाररत मरीजों के लिए पोषण संबंधी सहयोग उपलब्ध करा सकते हैं। इससे उन मरीजों को सहायता मिल सकती है जिन्हें उपचार के दौरान अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता होती है।

जिलाधिकारी ने जिले के सक्षम लोगों से अपील की कि वे इस पहल से जुड़कर टीबी मरीजों की सहायता के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से टीबी के खिलाफ जागरूकता अभियान को और मजबूत किया जा सकता है।

भ्रांतियों को दूर करने पर जोर

टीबी को लेकर समाज के कुछ हिस्सों में आज भी गलत धारणाएं मौजूद हैं। ऐसी स्थिति में सही जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है। जागरूकता की कमी के कारण कई बार लोग बीमारी के लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते या जांच कराने में देर कर देते हैं।

जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि लोगों को टीबी के लक्षण, जांच और उपचार के बारे में सरल एवं सही जानकारी दी जाए। मरीजों को यह भी समझाया जाए कि उपचार के दौरान निर्धारित दवाओं को चिकित्सकीय सलाह के बिना बंद नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मरीज को बीमारी छिपाने के बजाय स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना जरूरी है। समय पर जांच और उपचार से बीमारी के खिलाफ चल रहे अभियान को मजबूती मिल सकती है।

उपचाररत मरीजों की निगरानी पर विशेष ध्यान

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को जिले में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चिन्हित मरीजों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीज उपचार के दौरान किन परिस्थितियों से गुजर रहा है, इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को रहनी चाहिए।

जरूरत के अनुसार मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराने तथा उपचार के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से कहा कि टीबी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न स्तरों पर गतिविधियां जारी रखी जाएं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों तक बीमारी से संबंधित प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

निक्षय मित्र पहल से सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा

निक्षय मित्र पहल का उद्देश्य टीबी मरीजों को उपचार के दौरान आवश्यक सामाजिक एवं पोषण संबंधी सहयोग उपलब्ध कराने में समुदाय की भागीदारी बढ़ाना है। इस पहल से जुड़ने वाले लोग जरूरतमंद मरीजों की सहायता कर सकते हैं।

विकास पाल को पोषण किट प्रदान किया जाना इसी सामाजिक सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने वाला कदम है। इससे यह संदेश भी सामने आता है कि टीबी से लड़ाई में मरीज को अकेला छोड़ने के बजाय उसके साथ खड़ा होना जरूरी है।

परिवार के सहयोग, चिकित्सकीय निगरानी, नियमित दवा और पर्याप्त पोषण के साथ मरीज उपचार प्रक्रिया को बेहतर ढंग से जारी रख सकता है। इसलिए टीबी उन्मूलन अभियान में इन सभी पहलुओं को साथ लेकर चलना महत्वपूर्ण है।

सामूहिक प्रयास से टीबी उन्मूलन अभियान को मिलेगी मजबूती

औरैया में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रशासन ने टीबी उपचार के साथ पोषण और जागरूकता को भी महत्व देने का संदेश दिया। जिलाधिकारी ने मरीज को पोषण किट उपलब्ध कराने के साथ उपचार के दौरान नियमित दवा लेने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने पर जोर दिया।

टीबी के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन, परिवार और समाज सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। समय पर बीमारी की पहचान, उचित चिकित्सा, निर्धारित अवधि तक उपचार, संतुलित आहार और मरीज के प्रति सकारात्मक सामाजिक व्यवहार इस दिशा में उपयोगी कदम हो सकते हैं।

जिलाधिकारी ने कहा कि टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तभी मजबूत होगा जब मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ आवश्यक सामाजिक सहयोग भी मिले। निक्षय मित्र जैसे प्रयासों के जरिए समाज के विभिन्न वर्ग इस अभियान में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

औरैया में हुई यह पहल इसी व्यापक सोच को दर्शाती है कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल दवाओं तक सीमित नहीं है। जागरूकता, उपचार के प्रति अनुशासन, पोषण और मानवीय सहयोग को साथ लेकर आगे बढ़ना आवश्यक है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों तक सेवाएं पहुंचाने तथा लोगों को जागरूक करने के प्रयास इसी दिशा में जारी रखने पर जोर दिया गया।

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