बिकरू कांड: बर्खास्त दरोगा के.के. शर्मा समेत दो आरोपियों को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
कानपुर देहात, 24 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के चर्चित बिकरू कांड से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बर्खास्त दरोगा के.के. शर्मा और शिवम दल्लाल को बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। अदालत ने दोनों आरोपियों को कुछ शर्तों के साथ जमानत देने का आदेश दिया है। निचली अदालत में जमानतनामा दाखिल करने और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।

बिकरू कांड कई वर्षों से उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। इस प्रकरण में पुलिसकर्मियों पर हुए हमले, पुलिसकर्मियों की मौत, उसके बाद की पुलिस कार्रवाई और बड़ी संख्या में आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर लंबे समय तक जांच और कानूनी प्रक्रिया चलती रही। इसी मामले से संबंधित मुकदमे में अब दो आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत मिली है।
पुलिस टीम पर हमले से जुड़ा है मामला
मामला कानपुर देहात के चौबेपुर क्षेत्र के बिकरू गांव से संबंधित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2 जुलाई 2020 को पुलिस की एक टीम दबिश देने के लिए बिकरू गांव पहुंची थी। इसी दौरान पुलिस टीम पर हमला किया गया था। इस घटना में कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से प्रभावित हुए और आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे।
घटना के बाद पूरे प्रदेश में पुलिस और प्रशासन की गतिविधियां तेज हो गई थीं। पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया। मुख्य आरोपी के रूप में सामने आए विकास दुबे समेत कई आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की गई। पुलिस मुठभेड़ में विकास दुबे और उसके साथियों के मारे जाने के बाद भी मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी रही।
इस प्रकरण में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर अदालतों में सुनवाई होती रही है। समय के साथ कई आरोपियों को न्यायालयों से राहत भी मिली है।
के.के. शर्मा और शिवम दल्लाल की जमानत याचिका
इसी क्रम में आरोपी के.के. शर्मा और शिवम दल्लाल की ओर से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। दोनों पक्षों की दलीलों और मामले से संबंधित परिस्थितियों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने दोनों को सशर्त जमानत देने का निर्णय लिया।
के.के. शर्मा को मामले से जुड़े घटनाक्रम के बाद सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उनका संबंध उस प्रकरण से जोड़ा गया था जिसकी जांच पुलिस ने की थी। वहीं बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष अपने पक्ष में विभिन्न कानूनी आधार रखे।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब दोनों आरोपियों के लिए जेल से बाहर आने की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके लिए निचली अदालत में निर्धारित औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी संदर्भ
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण आदेश का भी संदर्भ सामने आया। आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता ऋषभ मिश्रा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था।
बचाव पक्ष की दलील के अनुसार, निर्धारित अवधि में मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी और कार्यवाही में लगातार देरी होती रही। इसी आधार को जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण परिस्थितियों में शामिल किया गया।
अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए दोनों आरोपियों को सशर्त जमानत प्रदान की। हालांकि जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से अंतिम रूप से बरी होना नहीं है। मुकदमे की आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी और आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित अदालत द्वारा साक्ष्यों तथा कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाएगा।
बिकरू कांड के बाद हुई थी व्यापक कार्रवाई
बिकरू की घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई थी। पुलिस ने मामले से जुड़े लोगों की तलाश शुरू की और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान अलग-अलग लोगों की भूमिका की पड़ताल की गई।
घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई के दौरान कई आरोपियों के खिलाफ मुठभेड़ की कार्रवाई भी हुई। इनमें विकास दुबे सहित कुछ अन्य आरोपी शामिल थे। वहीं बड़ी संख्या में आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया। समय बीतने के साथ इस मामले में अदालतों के सामने जमानत याचिकाएं भी आती रहीं।
बिकरू कांड की जांच और उससे जुड़े मुकदमों में पुलिस की कार्यप्रणाली, आरोपियों की भूमिका और घटनाक्रम से जुड़े कई पहलुओं पर न्यायिक स्तर पर विचार किया गया है। यही वजह है कि इस मामले की कानूनी प्रक्रिया लंबे समय तक चर्चा में बनी रही।
जमानत के बाद भी मुकदमा जारी रहेगा
के.के. शर्मा और शिवम दल्लाल को हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद दोनों के खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया समाप्त नहीं होगी। जमानत एक अंतरिम न्यायिक राहत है, जबकि मामले का अंतिम फैसला साक्ष्यों और सुनवाई पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
सशर्त जमानत के तहत आरोपियों को अदालत द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने की स्थिति में संबंधित न्यायालय कानूनी कार्रवाई कर सकता है। इसलिए जेल से बाहर आने के बाद भी दोनों आरोपियों को मुकदमे की कार्यवाही में अदालत के निर्देशों के अनुसार उपस्थित रहना होगा।
लंबे समय से चल रही है कानूनी प्रक्रिया
बिकरू कांड को कई वर्ष बीत जाने के बाद भी इससे जुड़े मामलों की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग अदालतों में जारी है। इस दौरान कुछ आरोपियों को जमानत मिली, जबकि कुछ मामलों में सुनवाई आगे बढ़ती रही। हाईकोर्ट द्वारा के.के. शर्मा और शिवम दल्लाल को जमानत दिया जाना इसी लंबी न्यायिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है।
इस आदेश के बाद अब दोनों आरोपियों के जेल से बाहर आने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी। निचली अदालत में जमानतनामा और आवश्यक दस्तावेज जमा किए जाने के बाद जेल प्रशासन को संबंधित आदेश प्राप्त होने पर आगे की कार्रवाई करनी होगी।
बिकरू कांड में पुलिसकर्मियों की मौत के कारण यह मामला बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में इससे जुड़े प्रत्येक आरोपी के संबंध में अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के निर्णय से ही तय होगी। हाईकोर्ट का मौजूदा आदेश जमानत तक सीमित है और इसे मामले में अंतिम दोषमुक्ति के रूप में नहीं देखा जा सकता।
निष्कर्ष: बिकरू कांड से जुड़े मुकदमे में बर्खास्त दरोगा के.के. शर्मा और शिवम दल्लाल को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद उनके जेल से बाहर आने का रास्ता खुल गया है। अदालत ने मामले की परिस्थितियों और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद यह राहत दी है। हालांकि दोनों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी रहेगी और मामले में अंतिम निर्णय सुनवाई पूरी होने तथा उपलब्ध साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही होगा।