SSC GD कांस्टेबल परीक्षा में तकनीकी सेंधमारी का खुलासा, UP STF ने हैकर अरुण कुमार उर्फ ‘Devil’ को दिल्ली से किया गिरफ्तार

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

लखनऊ/नोएडा, 24 सितंबर 2026। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की GD कांस्टेबल भर्ती परीक्षा-2026 में कथित तकनीकी धांधली के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने इस मामले में वांछित बताए जा रहे हैकर अरुण कुमार यादव उर्फ ‘Devil’ को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। STF के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क से जुड़ा था, जो प्रॉक्सी सर्वर और अन्य तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल करके ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहा था।

इस गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का ध्यान अब परीक्षा में इस्तेमाल किए गए तकनीकी संसाधनों, सर्वर से जुड़ी गतिविधियों और अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने पर है। STF की कार्रवाई में आरोपी के पास से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक एवं कंप्यूटर उपकरण बरामद किए जाने की बात सामने आई है।

दिल्ली के शाहबाद डेयरी इलाके से हुई गिरफ्तारी

STF के मुताबिक अरुण कुमार को दिल्ली के शाहबाद डेयरी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। करीब 30 वर्षीय अरुण मूल रूप से बिहार के पटना क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, वह ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाने में दर्ज SSC GD परीक्षा धांधली से संबंधित मुकदमे में वांछित था।

यह गिरफ्तारी उस मामले की आगे की जांच के दौरान हुई, जिसमें इससे पहले ग्रेटर नोएडा के एक परीक्षा केंद्र पर कथित तौर पर प्रॉक्सी सर्वर और अन्य उपकरणों के जरिए परीक्षा में अनुचित मदद पहुंचाने वाले गिरोह का खुलासा किया गया था। STF ने 22 मई 2026 को कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार करने और नकदी के साथ तकनीकी उपकरण बरामद करने की जानकारी दी थी।

जांच में सामने आया तकनीकी नेटवर्क

STF की जांच के अनुसार, अप्रैल-मई 2026 में आयोजित SSC GD कांस्टेबल ऑनलाइन परीक्षा के दौरान अरुण कुमार की भूमिका तकनीकी स्तर पर बताई गई है। जांच एजेंसी का दावा है कि उसने दूसरे हैकर अमित कुमार को परीक्षा प्रणाली से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण फाइलों को डिक्रिप्ट करने में मदद की।

इसके बाद दोनों ने कथित तौर पर ऐसी स्क्रिप्ट तैयार की, जिससे परीक्षा के क्लाइंट कंप्यूटरों को प्रॉक्सी सर्वर से जोड़ने की व्यवस्था की जा सके। STF के अनुसार, इसी तकनीकी ढांचे का इस्तेमाल परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद लोगों द्वारा अभ्यर्थियों के कंप्यूटर तक कथित रूप से पहुंच बनाने के लिए किया गया।

जांच में सामने आई इन जानकारियों की पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और आगे की जांच के बाद ही अंतिम रूप से होगी। फिलहाल ये सभी बातें जांच एजेंसी द्वारा सामने रखे गए आरोप और जांच के निष्कर्ष हैं।

बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद

गिरफ्तारी के दौरान STF ने अरुण कुमार के कब्जे से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बरामद सामान में 12 TFT स्क्रीन, दो लैपटॉप, 11 Raspberry Pi डिवाइस, 14 वीडियो कैप्चर डिवाइस, 13 HDTV-VGA एडाप्टर और नौ USB एडाप्टर शामिल हैं।

इसके अलावा जांच टीम को VGA स्विच, USB और ब्लूटूथ डोंगल, अन्य कंप्यूटर उपकरण तथा तकनीकी काम में इस्तेमाल होने वाले कुछ सामान भी मिलने की जानकारी सामने आई है। STF इन उपकरणों की भूमिका और परीक्षा में इनके संभावित इस्तेमाल की जांच कर रही है।

पहले भी परीक्षा धांधली के मामले से जुड़ा नाम

जांच एजेंसी के अनुसार, अरुण कुमार का नाम इससे पहले 2024 में सीतापुर में हुई ऑनलाइन नर्सिंग स्टाफ ऑफिसर परीक्षा से संबंधित कथित धांधली के मामले में भी सामने आया था।

STF का आरोप है कि उस मामले में अरुण ने मुख्य आरोपी को प्रॉक्सी सर्वर से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया था। इस पुराने मामले की जानकारी को वर्तमान SSC GD प्रकरण की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।

जांचकर्ताओं के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि आरोपी की तकनीकी गतिविधियां कितनी परीक्षाओं तक पहुंची थीं और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।

कई राज्यों तक नेटवर्क पहुंचने का दावा

STF की पूछताछ में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि अरुण के संपर्क उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में सक्रिय परीक्षा-धांधली से जुड़े लोगों से थे।

इस जानकारी के आधार पर जांच एजेंसी अब संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की कड़ियों की पड़ताल कर रही है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर एक जैसी तकनीकी व्यवस्था का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।

इससे पहले SSC GD परीक्षा मामले में ग्रेटर नोएडा के बालाजी डिजिटल जोन से जुड़े प्रकरण में कार्रवाई की गई थी। STF के अनुसार, उस कार्रवाई में नकदी और प्रॉक्सी सर्वर सहित कई उपकरण बरामद हुए थे। बाद की जांच में आरोपियों की संख्या बढ़ी और परीक्षा केंद्र से संबंधित अन्य पहलुओं की भी पड़ताल शुरू हुई।

अब तक 12 आरोपियों की गिरफ्तारी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अरुण कुमार की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संख्या 12 तक पहुंच गई है। इससे पहले STF ने कथित सॉल्वर नेटवर्क से जुड़े लोगों के अलावा परीक्षा केंद्र चयन और सुरक्षा ऑडिट से संबंधित कंपनी के दो निदेशकों को भी गिरफ्तार किया था।

जांच का दायरा अब केवल परीक्षा केंद्र पर मौजूद लोगों तक सीमित नहीं है। तकनीकी स्तर पर कथित सेंधमारी, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था, सर्वर तक पहुंच और बाहरी नेटवर्क के संभावित इस्तेमाल जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर उठे सवाल

ऑनलाइन परीक्षाओं में तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल जहां परीक्षा संचालन को सुविधाजनक बनाता है, वहीं सर्वर, कंप्यूटर और नेटवर्क की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है। SSC GD मामले में सामने आई जांच ने परीक्षा केंद्रों की तकनीकी निगरानी, सिस्टम की सुरक्षा और बाहरी हस्तक्षेप रोकने की व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित किया है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तकनीकी छेड़छाड़ किस स्तर पर हुई, इसमें किन लोगों की भूमिका थी और क्या ऐसी गतिविधियों का असर अन्य परीक्षाओं पर भी पड़ा। इस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

आगे क्या?

अरुण कुमार उर्फ ‘Devil’ की गिरफ्तारी के बाद STF अब उससे जुड़े डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। बरामद उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि उनका इस्तेमाल किन गतिविधियों में हुआ था और वे किन सिस्टम या नेटवर्क से जुड़े थे।

साथ ही, जांच एजेंसी संभावित सहयोगियों, परीक्षा केंद्रों और पूर्व में सामने आए मामलों के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में आगे और गिरफ्तारियां या नए तथ्य सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

SSC GD परीक्षा से जुड़ा यह मामला फिलहाल जांच के चरण में है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा। STF की कार्रवाई ने ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीकी सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवालों को सामने ला दिया है।

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SSC GD कांस्टेबल परीक्षा में तकनीकी सेंधमारी का खुलासा, UP STF ने हैकर अरुण कुमार उर्फ ‘Devil’ को दिल्ली से किया गिरफ्तार

लेखक:Editor Anoop Singh | प्रकाशित:सितम्बर 24, 2026

अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

लखनऊ/नोएडा, 24 सितंबर 2026। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की GD कांस्टेबल भर्ती परीक्षा-2026 में कथित तकनीकी धांधली के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने इस मामले में वांछित बताए जा रहे हैकर अरुण कुमार यादव उर्फ ‘Devil’ को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। STF के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क से जुड़ा था, जो प्रॉक्सी सर्वर और अन्य तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल करके ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहा था।

इस गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का ध्यान अब परीक्षा में इस्तेमाल किए गए तकनीकी संसाधनों, सर्वर से जुड़ी गतिविधियों और अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने पर है। STF की कार्रवाई में आरोपी के पास से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक एवं कंप्यूटर उपकरण बरामद किए जाने की बात सामने आई है।

दिल्ली के शाहबाद डेयरी इलाके से हुई गिरफ्तारी

STF के मुताबिक अरुण कुमार को दिल्ली के शाहबाद डेयरी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। करीब 30 वर्षीय अरुण मूल रूप से बिहार के पटना क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, वह ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाने में दर्ज SSC GD परीक्षा धांधली से संबंधित मुकदमे में वांछित था।

यह गिरफ्तारी उस मामले की आगे की जांच के दौरान हुई, जिसमें इससे पहले ग्रेटर नोएडा के एक परीक्षा केंद्र पर कथित तौर पर प्रॉक्सी सर्वर और अन्य उपकरणों के जरिए परीक्षा में अनुचित मदद पहुंचाने वाले गिरोह का खुलासा किया गया था। STF ने 22 मई 2026 को कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार करने और नकदी के साथ तकनीकी उपकरण बरामद करने की जानकारी दी थी।

जांच में सामने आया तकनीकी नेटवर्क

STF की जांच के अनुसार, अप्रैल-मई 2026 में आयोजित SSC GD कांस्टेबल ऑनलाइन परीक्षा के दौरान अरुण कुमार की भूमिका तकनीकी स्तर पर बताई गई है। जांच एजेंसी का दावा है कि उसने दूसरे हैकर अमित कुमार को परीक्षा प्रणाली से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण फाइलों को डिक्रिप्ट करने में मदद की।

इसके बाद दोनों ने कथित तौर पर ऐसी स्क्रिप्ट तैयार की, जिससे परीक्षा के क्लाइंट कंप्यूटरों को प्रॉक्सी सर्वर से जोड़ने की व्यवस्था की जा सके। STF के अनुसार, इसी तकनीकी ढांचे का इस्तेमाल परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद लोगों द्वारा अभ्यर्थियों के कंप्यूटर तक कथित रूप से पहुंच बनाने के लिए किया गया।

जांच में सामने आई इन जानकारियों की पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और आगे की जांच के बाद ही अंतिम रूप से होगी। फिलहाल ये सभी बातें जांच एजेंसी द्वारा सामने रखे गए आरोप और जांच के निष्कर्ष हैं।

बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद

गिरफ्तारी के दौरान STF ने अरुण कुमार के कब्जे से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बरामद सामान में 12 TFT स्क्रीन, दो लैपटॉप, 11 Raspberry Pi डिवाइस, 14 वीडियो कैप्चर डिवाइस, 13 HDTV-VGA एडाप्टर और नौ USB एडाप्टर शामिल हैं।

इसके अलावा जांच टीम को VGA स्विच, USB और ब्लूटूथ डोंगल, अन्य कंप्यूटर उपकरण तथा तकनीकी काम में इस्तेमाल होने वाले कुछ सामान भी मिलने की जानकारी सामने आई है। STF इन उपकरणों की भूमिका और परीक्षा में इनके संभावित इस्तेमाल की जांच कर रही है।

पहले भी परीक्षा धांधली के मामले से जुड़ा नाम

जांच एजेंसी के अनुसार, अरुण कुमार का नाम इससे पहले 2024 में सीतापुर में हुई ऑनलाइन नर्सिंग स्टाफ ऑफिसर परीक्षा से संबंधित कथित धांधली के मामले में भी सामने आया था।

STF का आरोप है कि उस मामले में अरुण ने मुख्य आरोपी को प्रॉक्सी सर्वर से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया था। इस पुराने मामले की जानकारी को वर्तमान SSC GD प्रकरण की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।

जांचकर्ताओं के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि आरोपी की तकनीकी गतिविधियां कितनी परीक्षाओं तक पहुंची थीं और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।

कई राज्यों तक नेटवर्क पहुंचने का दावा

STF की पूछताछ में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि अरुण के संपर्क उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में सक्रिय परीक्षा-धांधली से जुड़े लोगों से थे।

इस जानकारी के आधार पर जांच एजेंसी अब संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की कड़ियों की पड़ताल कर रही है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर एक जैसी तकनीकी व्यवस्था का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।

इससे पहले SSC GD परीक्षा मामले में ग्रेटर नोएडा के बालाजी डिजिटल जोन से जुड़े प्रकरण में कार्रवाई की गई थी। STF के अनुसार, उस कार्रवाई में नकदी और प्रॉक्सी सर्वर सहित कई उपकरण बरामद हुए थे। बाद की जांच में आरोपियों की संख्या बढ़ी और परीक्षा केंद्र से संबंधित अन्य पहलुओं की भी पड़ताल शुरू हुई।

अब तक 12 आरोपियों की गिरफ्तारी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अरुण कुमार की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संख्या 12 तक पहुंच गई है। इससे पहले STF ने कथित सॉल्वर नेटवर्क से जुड़े लोगों के अलावा परीक्षा केंद्र चयन और सुरक्षा ऑडिट से संबंधित कंपनी के दो निदेशकों को भी गिरफ्तार किया था।

जांच का दायरा अब केवल परीक्षा केंद्र पर मौजूद लोगों तक सीमित नहीं है। तकनीकी स्तर पर कथित सेंधमारी, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था, सर्वर तक पहुंच और बाहरी नेटवर्क के संभावित इस्तेमाल जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर उठे सवाल

ऑनलाइन परीक्षाओं में तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल जहां परीक्षा संचालन को सुविधाजनक बनाता है, वहीं सर्वर, कंप्यूटर और नेटवर्क की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है। SSC GD मामले में सामने आई जांच ने परीक्षा केंद्रों की तकनीकी निगरानी, सिस्टम की सुरक्षा और बाहरी हस्तक्षेप रोकने की व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित किया है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तकनीकी छेड़छाड़ किस स्तर पर हुई, इसमें किन लोगों की भूमिका थी और क्या ऐसी गतिविधियों का असर अन्य परीक्षाओं पर भी पड़ा। इस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

आगे क्या?

अरुण कुमार उर्फ ‘Devil’ की गिरफ्तारी के बाद STF अब उससे जुड़े डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। बरामद उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि उनका इस्तेमाल किन गतिविधियों में हुआ था और वे किन सिस्टम या नेटवर्क से जुड़े थे।

साथ ही, जांच एजेंसी संभावित सहयोगियों, परीक्षा केंद्रों और पूर्व में सामने आए मामलों के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में आगे और गिरफ्तारियां या नए तथ्य सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

SSC GD परीक्षा से जुड़ा यह मामला फिलहाल जांच के चरण में है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा। STF की कार्रवाई ने ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीकी सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवालों को सामने ला दिया है।