फ़रवरी 12, 2026

एक्सिम बैंक ट्रेड कॉन्क्लेव 2025: ‘विकसित भारत’ के लिए निर्यात-आधारित वृद्धि पर ज़ोर

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Anoop singh

नई दिल्ली, 24 जून 2025 — भारत के आर्थिक परिदृश्य में निर्यात को केंद्र में रखकर विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आज नई दिल्ली में “एक्सिम बैंक ट्रेड कॉन्क्लेव 2025” का आयोजन किया गया। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में देश की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने ‘विकसित भारत के लिए निर्यात-आधारित वृद्धि’ विषय पर मुख्य भाषण दिया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “भारत यदि 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना चाहता है, तो निर्यात को मजबूती देना ही होगा।” उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मज़बूत और स्थायी भूमिका निभानी चाहिए, जिसके लिए नीतिगत स्पष्टता, निवेश में सुगमता और नवाचार को बढ़ावा देना ज़रूरी है।

इस आयोजन में वित्त राज्य मंत्री श्री मुरलीधरन पप्पू चौधरी (@mppchaudhary) और वित्त सेवा विभाग के सचिव श्री एम. नागराजु (@DFS_India) की भी प्रमुख उपस्थिति रही। इन नेताओं ने भी मंच से अपने विचार साझा किए और भारत की निर्यात रणनीति, बैंकिंग सहयोग और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम में देश-विदेश से व्यापार, वित्त और नीति-निर्माण के क्षेत्र से जुड़े सैकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न पैनल चर्चाएं, प्रस्तुतीकरण और नेटवर्किंग सेशन्स आयोजित हुए, जिनका उद्देश्य भारत को ‘निर्यातक राष्ट्र’ के रूप में सशक्त बनाना था।

कॉन्क्लेव के दौरान जिन बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया, वे थे:

MSMEs को निर्यात के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता

ग्रीन और डिजिटल निर्यात की संभावनाएं

एफटीए (Free Trade Agreements) का प्रभाव और रणनीति

निर्यात बीमा और क्रेडिट गारंटी ढांचे का विस्तार

कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के सहयोग से एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ इंडिया (Exim Bank) द्वारा किया गया, जो भारत के वैश्विक व्यापार विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

निष्कर्ष:
‘ट्रेड कॉन्क्लेव 2025’ न केवल भारत के निर्यात दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार और बैंकिंग क्षेत्र मिलकर कैसे देश को आत्मनिर्भर और वैश्विक व्यापार का अग्रणी बना सकते हैं। इस प्रकार की पहलें ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में ठोस कदम मानी जा सकती हैं।


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