रायबरेली में अखिलेश यादव के स्वागत कार्यक्रम को लेकर विवाद, अभद्र नारेबाजी के आरोप पर भाजयुमो का थाने में प्रदर्शन
रविकांत पाण्डेय
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ रायबरेली
रायबरेली, उत्तर प्रदेश।
हरचंदपुर थाना क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के स्वागत कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर आपत्तिजनक एवं अभद्र नारेबाजी किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के विरोध में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ताओं ने हरचंदपुर थाने पहुंचकर प्रदर्शन किया और कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अखिलेश यादव के स्वागत के दौरान कुछ लोगों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा राज्य सरकार को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने इस तरह की नारेबाजी को राजनीतिक और सार्वजनिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की।
स्वागत कार्यक्रम के दौरान सामने आया विवाद
बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव के क्षेत्र में पहुंचने के दौरान उनके समर्थकों और समाजवादी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं की ओर से स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी दौरान कथित तौर पर कुछ नारे लगाए गए, जिन्हें लेकर विवाद खड़ा हो गया।
भाजयुमो कार्यकर्ताओं का कहना है कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल या उसके समर्थकों द्वारा विरोधी नेताओं के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता। इसी मुद्दे को लेकर कार्यकर्ताओं ने स्थानीय पुलिस से शिकायत कर संबंधित व्यक्ति की पहचान कर कार्रवाई की मांग उठाई।
हालांकि, कथित नारेबाजी को लेकर पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की प्रक्रिया पुलिस स्तर पर बताई जा रही है।
मंडल अध्यक्ष के नेतृत्व में थाने पहुंचे कार्यकर्ता
घटना से नाराज भाजयुमो कार्यकर्ता हरचंदपुर थाने पहुंचे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंडल अध्यक्ष हर्षित सिंह तोमर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के समक्ष अपनी शिकायत रखते हुए मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने आरोपी बताए जा रहे युवक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर नारेबाजी भी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि सार्वजनिक स्थान पर किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति या किसी राजनीतिक नेता के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया है तो पुलिस को मामले की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
पुलिस प्रशासन के खिलाफ भी जताई नाराजगी
धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं ने केवल कथित नारेबाजी को लेकर ही विरोध नहीं जताया, बल्कि स्थानीय पुलिस प्रशासन के रवैये को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मांग की कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए।
थाने के बाहर कार्यकर्ताओं के जुटने से कुछ समय के लिए स्थानीय स्तर पर माहौल गरमा गया। पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को संभालने के लिए प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू की। प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शन को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कराने और मामले को कानून के दायरे में आगे बढ़ाने की रही।
थाना प्रभारी ने की बातचीत
मामले की जानकारी मिलने के बाद हरचंदपुर थाना प्रभारी प्रवीण कुमार सिंह ने प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं से बातचीत की। पुलिस अधिकारी ने उनकी शिकायत सुनी और मामले में आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
पुलिस की ओर से कथित आरोपी युवक के खिलाफ जांच के बाद कानूनी कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। इसके बाद कार्यकर्ता वहां से वापस लौट गए।
पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित धाराओं के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक कार्यक्रमों में भाषा की मर्यादा पर चर्चा
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां लगातार सक्रिय हैं। अलग-अलग दलों के कार्यक्रमों में नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बयानबाजी तथा नारेबाजी आम तौर पर राजनीतिक माहौल का हिस्सा रहती है। लेकिन जब किसी कार्यक्रम में कथित तौर पर आपत्तिजनक या अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगता है, तो मामला राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर कानून-व्यवस्था से जुड़ जाता है।
राजनीतिक दलों के स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों और नीतियों का विरोध किया जा सकता है, लेकिन सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी जरूरी है। दूसरी ओर, किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
हरचंदपुर थाने में हुए प्रदर्शन के बाद अब पुलिस जांच पर सभी की नजर है। कथित नारेबाजी का वीडियो, यदि उपलब्ध है, तो वह जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है। इसके अलावा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति निर्धारित कर सकती है।
फिलहाल पुलिस ने मामले में जांच जारी होने की बात कही है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित नारेबाजी किस व्यक्ति द्वारा की गई, उसमें वास्तव में कौन से शब्द इस्तेमाल हुए और क्या उस संबंध में कोई आपराधिक प्रावधान लागू होता है।
कार्रवाई के आश्वासन के बाद शांत हुआ मामला
भाजयुमो कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के बाद स्थिति सामान्य हुई। थाना प्रभारी की ओर से आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद कार्यकर्ताओं ने धरना समाप्त कर दिया।
घटना ने एक बार फिर राजनीतिक कार्यक्रमों में आपत्तिजनक नारेबाजी और सार्वजनिक भाषा के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब आगे की तस्वीर पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट होगी।
इस पूरे प्रकरण में फिलहाल भाजयुमो की ओर से लगाए गए आरोप और पुलिस द्वारा जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। कथित आरोपी का पक्ष तथा मामले में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही घटना के संबंध में अधिक स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।