कानपुर में जल जीवन मिशन की समीक्षा: एफएचटीसी लक्ष्य पूरा करने वाले गांवों में खुलेगी ‘हर घर जल’ प्रमाणीकरण की राह

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

कानपुर नगर, 7 अक्टूबर 2026। ग्रामीण क्षेत्रों में हर परिवार को सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित जल जीवन मिशन की प्रगति को लेकर बुधवार को कानपुर नगर में महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में हुई बैठक में ‘हर घर नल से जल’ योजना के तहत चल रहे विभिन्न कार्यों की स्थिति, निर्माण की गुणवत्ता, पेयजल आपूर्ति और योजनाओं के संचालन एवं अनुरक्षण सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

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जिलाधिकारी ने अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि जल जीवन मिशन से जुड़ी परियोजनाओं को केवल कागजी प्रगति तक सीमित न रखा जाए, बल्कि ग्रामीण परिवारों को वास्तव में नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने निर्माणाधीन परियोजनाओं को तय मानकों के अनुरूप पूरा करने और प्रत्येक चरण में गुणवत्ता की निगरानी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

एफएचटीसी लक्ष्य पूरा करने वाले गांवों में खुलेगी प्रमाणीकरण की प्रक्रिया

बैठक में उन योजनाओं की विशेष रूप से समीक्षा की गई, जिनमें एफएचटीसी यानी Functional Household Tap Connection का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि ऐसे गांवों में ग्राम सभा की खुली बैठक आयोजित कर ‘हर घर जल’ मार्किंग और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाया जाए।

उन्होंने कहा कि किसी गांव में नल कनेक्शन उपलब्ध करा देना ही योजना की अंतिम सफलता नहीं है। यह भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि संबंधित परिवारों को नियमित रूप से पानी मिल रहा हो और जलापूर्ति व्यवस्था व्यवहारिक रूप से संचालित हो। इसी उद्देश्य से प्रत्येक गांव के लिए पेयजल आपूर्ति का स्पष्ट रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए गए।

अधिकारियों से कहा गया कि पानी आने का समय ग्रामीणों को पहले से पता हो। इसके लिए निर्धारित समय-सारिणी को ओवरहेड टैंक, पंप हाउस और पंचायत भवन जैसे प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया जाए। विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों को भी इस व्यवस्था से अलग न रखा जाए और वहां नियमित पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

थर्ड पार्टी जांच रिपोर्ट का दोबारा होगा परीक्षण

बैठक में जल जीवन मिशन की परियोजनाओं के थर्ड पार्टी निरीक्षण की स्थिति भी जिलाधिकारी के समक्ष रखी गई। निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली तकनीकी कमियों और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को एक समिति गठित करने के निर्देश दिए।

यह समिति थर्ड पार्टी एजेंसी द्वारा तैयार की गई निरीक्षण रिपोर्टों का पुनर्परीक्षण करेगी। जरूरत पड़ने पर समिति के सदस्य संबंधित स्थलों का भौतिक निरीक्षण भी करेंगे। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि परियोजनाओं का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार हुआ है या नहीं।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आने वाली कमियों को केवल कागजों में निस्तारित न माना जाए। जहां आवश्यकता हो, वहां मौके पर जाकर कार्य की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाए।

ओवरहेड टैंकों की हाइड्रो टेस्टिंग पर जोर

पेयजल आपूर्ति शुरू करने से पहले ओवरहेड टैंकों की तकनीकी मजबूती की जांच को भी बैठक में महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक योजना में निर्मित ओवरहेड टैंक की निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार हाइड्रो टेस्टिंग कराई जाए।

उन्होंने कहा कि परीक्षण में संतोषजनक स्थिति सामने आने के बाद ही संबंधित टैंक से जलापूर्ति शुरू की जाए। इससे भविष्य में लीकेज, संरचनात्मक समस्या या अन्य तकनीकी परेशानी की संभावना को कम किया जा सकेगा।

इसके साथ ही ग्रामीणों तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता पर भी लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए। पानी में निर्धारित मात्रा के अनुसार क्लोरीनेशन, समय-समय पर जल नमूनों की जांच और फील्ड स्तर पर परीक्षण को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बनाने को कहा गया।

एफटीके प्रशिक्षित महिलाओं की भूमिका भी अहम

जल गुणवत्ता की निगरानी में एफटीके प्रशिक्षित महिलाओं की सेवाओं का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि गांवों में पानी की गुणवत्ता की जांच केवल विभागीय स्तर पर होने वाली प्रक्रिया न रहे, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी नियमित परीक्षण किया जाए।

फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से होने वाली जांच से पानी की गुणवत्ता से संबंधित संभावित समस्याओं की शुरुआती पहचान में मदद मिल सकती है। अधिकारियों को जांच की प्रक्रिया और उसके रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने के निर्देश भी दिए गए।

निर्माण कार्यों की मौके पर निगरानी जरूरी

जिलाधिकारी ने क्षेत्रीय अभियंताओं से कहा कि वे निर्माणाधीन परियोजनाओं का नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण करें। उन्होंने कार्यस्थल पर पर्याप्त श्रमिक, तकनीकी कर्मचारी, मशीनरी और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि परियोजनाओं को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि निर्माण की गति बढ़ाने के चक्कर में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। परियोजनाओं को समय पर पूरा करना महत्वपूर्ण है, लेकिन निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन उससे भी अधिक जरूरी है।

सड़कों की खुदाई के बाद तत्काल बहाली के निर्देश

जलापूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़कों की खुदाई से आम लोगों को होने वाली परेशानी को लेकर भी जिलाधिकारी ने कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पाइपलाइन बिछाने के बाद हाइड्रो टेस्टिंग और उससे जुड़े जरूरी कार्य पूरे होते ही सड़क की बहाली कराई जाए।

जहां तकनीकी रूप से संभव हो, वहां एचडीडी मशीन जैसी तकनीक का अधिक उपयोग करने की सलाह दी गई। इससे सड़कों की अनावश्यक खुदाई कम की जा सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होने की समस्या भी घट सकती है।

जे.जे.एम. पोर्टल पर नियमित अपडेट जरूरी

बैठक में डिजिटल मॉनिटरिंग पर भी विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि प्रत्येक परियोजना की प्रगति को जल जीवन मिशन पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट किया जाए। योजनाओं के सूचना पट्ट पर भी ताजा जानकारी दर्ज की जाए।

परियोजनाओं की प्रगति को प्रमाणित करने के लिए आवश्यक फोटो, वीडियो और जियो-टैगिंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने को कहा गया। इससे परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति की निगरानी और दस्तावेजीकरण में मदद मिलेगी।

पूर्ण परियोजनाओं का ट्रायल रन और हैंडओवर समय पर हो

जिन परियोजनाओं का निर्माण अंतिम चरण में है, उनमें ट्रायल रन पूरा कर संचालन एवं अनुरक्षण की प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि योजना पूरी होने के बाद उसे लंबे समय तक निष्क्रिय न रखा जाए।

पूर्ण परियोजनाओं में जल अर्पण और हैंडओवर से जुड़ी आवश्यक औपचारिकताओं को भी निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर जोर दिया गया। इससे तैयार जलापूर्ति व्यवस्था का वास्तविक लाभ ग्रामीण परिवारों को समय पर मिल सकेगा।

शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही न हो

बैठक में पेयजल से संबंधित शिकायतों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने जनप्रतिनिधियों तथा शिकायत निवारण पोर्टल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों को प्राथमिकता से निस्तारित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में पानी की समस्या से जुड़ी शिकायत सीधे लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करती है। इसलिए शिकायत मिलने के बाद उसका समयबद्ध निस्तारण और जरूरत पड़ने पर मौके पर जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

थर्ड पार्टी निरीक्षण के दौरान सामने आई निर्माण गुणवत्ता से संबंधित लंबित कमियों और टिप्पणियों को भी तय समय में समाप्त करने के निर्देश दिए गए।

गुणवत्ता और पारदर्शिता पर रहेगा फोकस

जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बैठक में कहा कि जल जीवन मिशन सरकार की प्राथमिकता वाली योजना है। इसका उद्देश्य केवल बुनियादी ढांचा तैयार करना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित, नियमित और भरोसेमंद पेयजल उपलब्ध कराना है।

उन्होंने संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं से कहा कि परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। निर्माण से लेकर जलापूर्ति और अनुरक्षण तक प्रत्येक चरण की प्रभावी निगरानी की जाए, ताकि योजना का लाभ वास्तविक रूप से ग्रामीण परिवारों तक पहुंच सके।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन, जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता तथा जल जीवन मिशन से जुड़े अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों को परियोजनाओं की प्रगति पर लगातार निगरानी रखते हुए शासन और प्रशासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

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कानपुर में जल जीवन मिशन की समीक्षा: एफएचटीसी लक्ष्य पूरा करने वाले गांवों में खुलेगी ‘हर घर जल’ प्रमाणीकरण की राह

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 8, 2026

अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

कानपुर नगर, 7 अक्टूबर 2026। ग्रामीण क्षेत्रों में हर परिवार को सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित जल जीवन मिशन की प्रगति को लेकर बुधवार को कानपुर नगर में महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में हुई बैठक में ‘हर घर नल से जल’ योजना के तहत चल रहे विभिन्न कार्यों की स्थिति, निर्माण की गुणवत्ता, पेयजल आपूर्ति और योजनाओं के संचालन एवं अनुरक्षण सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

AI Generated syemboli photo

जिलाधिकारी ने अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि जल जीवन मिशन से जुड़ी परियोजनाओं को केवल कागजी प्रगति तक सीमित न रखा जाए, बल्कि ग्रामीण परिवारों को वास्तव में नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने निर्माणाधीन परियोजनाओं को तय मानकों के अनुरूप पूरा करने और प्रत्येक चरण में गुणवत्ता की निगरानी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

एफएचटीसी लक्ष्य पूरा करने वाले गांवों में खुलेगी प्रमाणीकरण की प्रक्रिया

बैठक में उन योजनाओं की विशेष रूप से समीक्षा की गई, जिनमें एफएचटीसी यानी Functional Household Tap Connection का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि ऐसे गांवों में ग्राम सभा की खुली बैठक आयोजित कर ‘हर घर जल’ मार्किंग और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाया जाए।

उन्होंने कहा कि किसी गांव में नल कनेक्शन उपलब्ध करा देना ही योजना की अंतिम सफलता नहीं है। यह भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि संबंधित परिवारों को नियमित रूप से पानी मिल रहा हो और जलापूर्ति व्यवस्था व्यवहारिक रूप से संचालित हो। इसी उद्देश्य से प्रत्येक गांव के लिए पेयजल आपूर्ति का स्पष्ट रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए गए।

अधिकारियों से कहा गया कि पानी आने का समय ग्रामीणों को पहले से पता हो। इसके लिए निर्धारित समय-सारिणी को ओवरहेड टैंक, पंप हाउस और पंचायत भवन जैसे प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया जाए। विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों को भी इस व्यवस्था से अलग न रखा जाए और वहां नियमित पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

थर्ड पार्टी जांच रिपोर्ट का दोबारा होगा परीक्षण

बैठक में जल जीवन मिशन की परियोजनाओं के थर्ड पार्टी निरीक्षण की स्थिति भी जिलाधिकारी के समक्ष रखी गई। निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली तकनीकी कमियों और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को एक समिति गठित करने के निर्देश दिए।

यह समिति थर्ड पार्टी एजेंसी द्वारा तैयार की गई निरीक्षण रिपोर्टों का पुनर्परीक्षण करेगी। जरूरत पड़ने पर समिति के सदस्य संबंधित स्थलों का भौतिक निरीक्षण भी करेंगे। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि परियोजनाओं का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार हुआ है या नहीं।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आने वाली कमियों को केवल कागजों में निस्तारित न माना जाए। जहां आवश्यकता हो, वहां मौके पर जाकर कार्य की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाए।

ओवरहेड टैंकों की हाइड्रो टेस्टिंग पर जोर

पेयजल आपूर्ति शुरू करने से पहले ओवरहेड टैंकों की तकनीकी मजबूती की जांच को भी बैठक में महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक योजना में निर्मित ओवरहेड टैंक की निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार हाइड्रो टेस्टिंग कराई जाए।

उन्होंने कहा कि परीक्षण में संतोषजनक स्थिति सामने आने के बाद ही संबंधित टैंक से जलापूर्ति शुरू की जाए। इससे भविष्य में लीकेज, संरचनात्मक समस्या या अन्य तकनीकी परेशानी की संभावना को कम किया जा सकेगा।

इसके साथ ही ग्रामीणों तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता पर भी लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए। पानी में निर्धारित मात्रा के अनुसार क्लोरीनेशन, समय-समय पर जल नमूनों की जांच और फील्ड स्तर पर परीक्षण को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बनाने को कहा गया।

एफटीके प्रशिक्षित महिलाओं की भूमिका भी अहम

जल गुणवत्ता की निगरानी में एफटीके प्रशिक्षित महिलाओं की सेवाओं का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि गांवों में पानी की गुणवत्ता की जांच केवल विभागीय स्तर पर होने वाली प्रक्रिया न रहे, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी नियमित परीक्षण किया जाए।

फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से होने वाली जांच से पानी की गुणवत्ता से संबंधित संभावित समस्याओं की शुरुआती पहचान में मदद मिल सकती है। अधिकारियों को जांच की प्रक्रिया और उसके रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने के निर्देश भी दिए गए।

निर्माण कार्यों की मौके पर निगरानी जरूरी

जिलाधिकारी ने क्षेत्रीय अभियंताओं से कहा कि वे निर्माणाधीन परियोजनाओं का नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण करें। उन्होंने कार्यस्थल पर पर्याप्त श्रमिक, तकनीकी कर्मचारी, मशीनरी और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि परियोजनाओं को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि निर्माण की गति बढ़ाने के चक्कर में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। परियोजनाओं को समय पर पूरा करना महत्वपूर्ण है, लेकिन निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन उससे भी अधिक जरूरी है।

सड़कों की खुदाई के बाद तत्काल बहाली के निर्देश

जलापूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़कों की खुदाई से आम लोगों को होने वाली परेशानी को लेकर भी जिलाधिकारी ने कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पाइपलाइन बिछाने के बाद हाइड्रो टेस्टिंग और उससे जुड़े जरूरी कार्य पूरे होते ही सड़क की बहाली कराई जाए।

जहां तकनीकी रूप से संभव हो, वहां एचडीडी मशीन जैसी तकनीक का अधिक उपयोग करने की सलाह दी गई। इससे सड़कों की अनावश्यक खुदाई कम की जा सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होने की समस्या भी घट सकती है।

जे.जे.एम. पोर्टल पर नियमित अपडेट जरूरी

बैठक में डिजिटल मॉनिटरिंग पर भी विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि प्रत्येक परियोजना की प्रगति को जल जीवन मिशन पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट किया जाए। योजनाओं के सूचना पट्ट पर भी ताजा जानकारी दर्ज की जाए।

परियोजनाओं की प्रगति को प्रमाणित करने के लिए आवश्यक फोटो, वीडियो और जियो-टैगिंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने को कहा गया। इससे परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति की निगरानी और दस्तावेजीकरण में मदद मिलेगी।

पूर्ण परियोजनाओं का ट्रायल रन और हैंडओवर समय पर हो

जिन परियोजनाओं का निर्माण अंतिम चरण में है, उनमें ट्रायल रन पूरा कर संचालन एवं अनुरक्षण की प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि योजना पूरी होने के बाद उसे लंबे समय तक निष्क्रिय न रखा जाए।

पूर्ण परियोजनाओं में जल अर्पण और हैंडओवर से जुड़ी आवश्यक औपचारिकताओं को भी निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर जोर दिया गया। इससे तैयार जलापूर्ति व्यवस्था का वास्तविक लाभ ग्रामीण परिवारों को समय पर मिल सकेगा।

शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही न हो

बैठक में पेयजल से संबंधित शिकायतों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने जनप्रतिनिधियों तथा शिकायत निवारण पोर्टल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों को प्राथमिकता से निस्तारित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में पानी की समस्या से जुड़ी शिकायत सीधे लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करती है। इसलिए शिकायत मिलने के बाद उसका समयबद्ध निस्तारण और जरूरत पड़ने पर मौके पर जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

थर्ड पार्टी निरीक्षण के दौरान सामने आई निर्माण गुणवत्ता से संबंधित लंबित कमियों और टिप्पणियों को भी तय समय में समाप्त करने के निर्देश दिए गए।

गुणवत्ता और पारदर्शिता पर रहेगा फोकस

जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बैठक में कहा कि जल जीवन मिशन सरकार की प्राथमिकता वाली योजना है। इसका उद्देश्य केवल बुनियादी ढांचा तैयार करना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित, नियमित और भरोसेमंद पेयजल उपलब्ध कराना है।

उन्होंने संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं से कहा कि परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। निर्माण से लेकर जलापूर्ति और अनुरक्षण तक प्रत्येक चरण की प्रभावी निगरानी की जाए, ताकि योजना का लाभ वास्तविक रूप से ग्रामीण परिवारों तक पहुंच सके।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन, जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता तथा जल जीवन मिशन से जुड़े अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों को परियोजनाओं की प्रगति पर लगातार निगरानी रखते हुए शासन और प्रशासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।