लखनऊ में गोमती नदी का बढ़ा जलस्तर, भैंसाकुंड बैकुंठ धाम में अंतिम संस्कार को लेकर बढ़ी चिंता
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच गोमती नदी का पानी अब भैंसाकुंड बैकुंठ धाम के चबूतरों तक पहुंचने की सूचना है। नदी का जलस्तर और बढ़ने की स्थिति में यहां बने कई चबूतरों के पूरी तरह जलमग्न होने की आशंका जताई जा रही है। इससे अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले परिवारों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। जलभराव के कारण शवों के अंतिम संस्कार के साथ-साथ अस्थियां सुरक्षित रखने और बाद में उन्हें चुनने की प्रक्रिया भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

मिली जानकारी के अनुसार, गोमती नदी में पानी बढ़ने के कारण भैंसाकुंड क्षेत्र में स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है। नदी का पानी सामान्य स्तर से ऊपर पहुंचने के बाद घाट पर बने चबूतरों तक पहुंच गया है। यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है तो अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित स्थानों का बड़ा हिस्सा पानी की चपेट में आ सकता है।
अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रहे परिवारों की बढ़ी परेशानी
भैंसाकुंड बैकुंठ धाम लखनऊ का प्रमुख अंतिम संस्कार स्थल माना जाता है। यहां आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से लोग अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में घाट पर पानी बढ़ने से उन परिवारों की चिंता बढ़ गई है, जिन्हें अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करना है।
सामान्य परिस्थितियों में अंतिम संस्कार के लिए परिवारों को घाट पर निर्धारित स्थान मिल जाता है, लेकिन जलस्तर बढ़ने के बाद उपलब्ध जगह सीमित होने की आशंका है। पानी यदि चबूतरों के ऊपर पहुंचता है तो वहां अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इससे लोगों को वैकल्पिक स्थान तलाशने की जरूरत पड़ सकती है।
सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों को लेकर है, जो पहले से ही भावनात्मक रूप से कठिन दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में यदि उन्हें अंतिम संस्कार के लिए स्थान और व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़े, तो स्थिति और कठिन हो सकती है।
जलस्तर बढ़ा तो पूरी तरह डूब सकते हैं चबूतरे
गोमती नदी के पानी का स्तर बढ़ने के साथ घाट के चबूतरों पर भी संकट गहराता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर आशंका है कि यदि नदी का जलस्तर कुछ और बढ़ा तो वर्तमान में दिखाई दे रहे चबूतरे भी पानी में डूब सकते हैं।
चबूतरों के डूबने से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ घाट पर आवाजाही भी मुश्किल हो सकती है। पानी के बीच लकड़ी, अन्य आवश्यक सामग्री और शव को निर्धारित स्थान तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। साथ ही परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों की सुरक्षा को लेकर भी अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ेगी।
ऐसे हालात में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी लोगों को सुरक्षित रखते हुए अंतिम संस्कार की वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की होगी।
राख और अस्थियां सुरक्षित रखना भी चुनौती
बढ़ते जलस्तर का असर केवल अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं रहने वाला है। शव के अंतिम संस्कार के बाद बचने वाली राख और अस्थियों को सुरक्षित रखना भी परिवारों के लिए मुश्किल हो सकता है।
यदि घाट का बड़ा हिस्सा पानी में डूब जाता है तो राख और अस्थियों को सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। पानी बढ़ने के कारण अस्थियां चुनने के लिए परिवारों को भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार के बाद परिजन अस्थियां एकत्र करते हैं और आगे धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका विसर्जन या अन्य संस्कार करते हैं। ऐसे में घाट पर पानी का दबाव बढ़ने से इस पूरी प्रक्रिया में बाधा आने की आशंका है।
पानी के बीच अस्थियां चुनने की तैयारी
घाट पर जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए परिजनों के सामने एक और गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। यदि अंतिम संस्कार स्थल पानी से घिर जाता है, तो राख और अस्थियों को चुनना सुरक्षित तरीके से संभव नहीं होगा।
परिजनों को पानी के बीच जाने से रोकने और उन्हें सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन को समय रहते कदम उठाने की आवश्यकता होगी। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को जलभराव वाले हिस्से से दूर रखना जरूरी होगा।
स्थानीय स्तर पर यह चिंता भी बनी हुई है कि पानी यदि लगातार बढ़ता रहा तो लकड़ी के चबूतरों और घाट की अन्य व्यवस्थाओं तक पहुंचना कठिन हो जाएगा। ऐसी स्थिति में अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक इंतजाम तत्काल करना जरूरी हो सकता है।
लकड़ी के चबूतरों तक पहुंचना मुश्किल
भैंसाकुंड बैकुंठ धाम में बढ़ते पानी का असर घाट की व्यवस्थाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। पानी चबूतरों तक पहुंचने के बाद वहां तक पहुंचने के रास्तों पर भी परेशानी बढ़ सकती है।
अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी और अन्य सामग्री को घाट तक पहुंचाना भी मुश्किल हो सकता है। यदि रास्तों पर पानी बढ़ता है तो वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की संभावना है। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों को अतिरिक्त समय और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि आपात स्थिति में घाट तक सुरक्षित पहुंच बनी रहे और किसी भी परिवार को अंतिम संस्कार के लिए असुविधा का सामना न करना पड़े।
प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था की उम्मीद
गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ भैंसाकुंड बैकुंठ धाम की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी हो गया है। यदि पानी का स्तर और बढ़ता है तो प्रशासन को पहले से वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखनी होगी।
जरूरत पड़ने पर सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर अंतिम संस्कार की अस्थायी व्यवस्था की जा सकती है। साथ ही घाट पर आने वाले लोगों को जलस्तर और सुरक्षा संबंधी निर्देशों की जानकारी देना भी आवश्यक होगा।
प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जलभराव के दौरान बिजली, प्रकाश, रास्ते और अन्य जरूरी सुविधाओं में किसी प्रकार की गंभीर समस्या न आए। भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों को पानी के ज्यादा करीब जाने से रोकने के लिए भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा सकती है।
परिवारों की बढ़ी चिंता
गोमती नदी का बढ़ता पानी उन परिवारों के लिए विशेष चिंता का कारण बन गया है, जिन्हें अंतिम संस्कार के लिए भैंसाकुंड पहुंचना पड़ रहा है। अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान परिवारों को किसी अतिरिक्त परेशानी से बचाना जरूरी है।
जलस्तर में अगर जल्द कमी नहीं आती है तो आने वाले समय में भैंसाकुंड बैकुंठ धाम की व्यवस्थाओं पर दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जाए और जरूरत पड़ने पर समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए।
गोमती के बढ़ते जलस्तर ने राजधानी के इस महत्वपूर्ण घाट की व्यवस्थाओं के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। चबूतरों तक पहुंचा पानी अब इस बात का संकेत है कि स्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता। प्रशासन की सक्रियता और समय पर किए गए इंतजाम ही अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक व्यवस्था उपलब्ध कराने में मददगार साबित होंगे।