हार्ट अटैक के दौरान सीपीआर से बचाई जा सकती है जान, सेठ बद्रीप्रसाद महाविद्यालय में एनडीआरएफ ने दिया आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
कोंच, जालौन। आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर प्राथमिक उपचार मिलना किसी व्यक्ति के जीवन को बचाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेष रूप से हार्ट अटैक या अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) जैसी जीवनरक्षक तकनीक की जानकारी काफी उपयोगी साबित हो सकती है। इसी उद्देश्य से गुरुवार को जालौन जिले के कोंच स्थित सेठ बद्रीप्रसाद महाविद्यालय में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), गाजियाबाद की टीम ने छात्र-छात्राओं के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें विद्यार्थियों को आपदा के समय सतर्कता बरतने, घायलों की मदद करने और प्राथमिक उपचार की बुनियादी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान एनडीआरएफ के अधिकारियों और प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी आपात स्थिति में घबराने के बजाय सूझबूझ से काम लेना चाहिए। दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा के समय शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि आसपास मौजूद लोगों को प्राथमिक उपचार और सुरक्षित बचाव के तरीकों की जानकारी हो, तो वे प्रशिक्षित सहायता पहुंचने तक पीड़ित की मदद कर सकते हैं।
सीपीआर की जानकारी देकर समझाया जीवन बचाने का तरीका
प्रशिक्षण कार्यक्रम में एनडीआरएफ की टीम ने विद्यार्थियों को सीपीआर के महत्व से अवगत कराया। प्रशिक्षकों ने बताया कि जब किसी व्यक्ति की हृदय गति अचानक रुक जाती है और वह सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा होता, तब तत्काल आपातकालीन सहायता बुलाने के साथ सीपीआर देना जीवन बचाने में मददगार हो सकता है।
विद्यार्थियों को इस बात की जानकारी दी गई कि ऐसी परिस्थिति में समय गंवाए बिना उचित कदम उठाना जरूरी है। सबसे पहले घटनास्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके बाद व्यक्ति की प्रतिक्रिया और सामान्य सांस की जांच करते हुए आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलानी चाहिए। यदि व्यक्ति बेहोश है और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, तो प्रशिक्षित व्यक्ति को सीपीआर शुरू करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर उपलब्ध ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (एईडी) का उपयोग उसके निर्देशों के अनुसार किया जा सकता है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना था कि आपातकालीन चिकित्सा सहायता पहुंचने तक सही तरीके से की गई मदद पीड़ित के बचने की संभावना बढ़ा सकती है। साथ ही, केवल जानकारी प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी आवश्यक है।
आग, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं से बचाव की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान केवल हृदय संबंधी आपात स्थितियों तक ही प्रशिक्षण सीमित नहीं रहा। एनडीआरएफ की टीम ने आग लगने, भूकंप आने, बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने और सड़क दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं में बचाव के उपायों पर भी विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षकों ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं के समय सबसे पहले अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। किसी भी घटना के दौरान बिना परिस्थिति का आकलन किए जोखिम उठाना उचित नहीं है। राहत एवं बचाव कार्य करते समय सावधानी बरतना जरूरी है, ताकि पीड़ित की सहायता करने वाले व्यक्ति की सुरक्षा भी बनी रहे।
आग लगने की स्थिति में सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलने, धुएं से बचाव करने और जरूरत पड़ने पर संबंधित आपातकालीन सेवाओं को सूचना देने जैसे उपायों की उपयोगिता बताई गई। इसी प्रकार भूकंप के समय सुरक्षित स्थान पर रहने, झटके रुकने के बाद सावधानीपूर्वक बाहर निकलने और बाढ़ के दौरान तेज बहाव वाले पानी से दूर रहने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
सड़क दुर्घटनाओं के संबंध में विद्यार्थियों को बताया गया कि घायल व्यक्ति की मदद करते समय घटनास्थल पर यातायात और अन्य खतरों का ध्यान रखना चाहिए। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को अनावश्यक रूप से हिलाने-डुलाने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित बचावकर्मियों की सहायता लेकर उसे सुरक्षित तरीके से चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना चाहिए।
स्ट्रेचर के इस्तेमाल और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का प्रशिक्षण
एनडीआरएफ की टीम ने विद्यार्थियों को दुर्घटना या आपदा में घायल व्यक्ति को सुरक्षित स्थान से उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया भी समझाई। इस दौरान स्ट्रेचर के सही उपयोग और घायल व्यक्ति को उठाने तथा स्थानांतरित करने में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई।
प्रशिक्षकों ने समझाया कि गंभीर चोट लगने की स्थिति में पीड़ित को गलत तरीके से उठाने से उसकी परेशानी बढ़ सकती है। विशेष रूप से सिर, गर्दन या रीढ़ की हड्डी में चोट की आशंका होने पर व्यक्ति को अनावश्यक रूप से नहीं हिलाना चाहिए। ऐसे मामलों में प्रशिक्षित बचाव दल की सहायता लेना अधिक सुरक्षित होता है।
आपदा प्रबंधन में स्ट्रेचर का सही इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे घायल व्यक्ति को व्यवस्थित तरीके से ले जाने में सहायता मिलती है। प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि बचाव कार्य में केवल तत्परता ही नहीं, बल्कि सही तकनीक और सावधानी भी आवश्यक है।
इसके अलावा, प्राथमिक उपचार के दौरान घायल व्यक्ति की स्थिति का आकलन करने, उपलब्ध संसाधनों का उचित इस्तेमाल करने और चिकित्सा सहायता मिलने तक आवश्यक सावधानियां बरतने के बारे में भी बताया गया।
एनडीआरएफ टीम ने विद्यार्थियों को किया जागरूक
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का नेतृत्व एनडीआरएफ बटालियन गाजियाबाद के एसआई बनवारी लाल ने किया। उनके नेतृत्व में आई टीम ने विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन और जीवनरक्षक उपायों के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया।
प्रशिक्षण देने वाले दल में हवलदार अवधेश कुमार, मुन्ना कुमार, मोरमुकुट दीक्षित, सुरेंद्र कुमार, अरविंद कुमार, मनोज कुमार, नितिन कुमार, अजय यादव, संतोष कुमार, महेश नायर, राहुल धामा और अमित कुमार शामिल रहे। टीम के सदस्यों ने अपने अनुभव और प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जिम्मेदारीपूर्वक व्यवहार करने की सीख दी।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि आपदा प्रबंधन केवल प्रशासन या बचाव दल की जिम्मेदारी नहीं है। आम नागरिकों की जागरूकता और सहयोग भी राहत कार्यों को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। यदि लोगों को समय रहते प्राथमिक उपचार, सुरक्षित निकासी और आपातकालीन सहायता से जुड़ी जानकारी मिल जाए, तो संकट के समय बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है।
महाविद्यालय प्रशासन ने जताया आभार
सेठ बद्रीप्रसाद महाविद्यालय में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के कोऑर्डिनेटर कन्हैया नीखर और कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. बृजेंद्र सिंह निरंजन ने एनडीआरएफ की टीम का स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को उपयोगी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए टीम के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
महाविद्यालय प्रशासन ने इस प्रकार के कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया, क्योंकि इनसे पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक जीवन में काम आने वाली जानकारियां भी प्राप्त होती हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में सही कदम उठाने की समझ विद्यार्थियों को न केवल स्वयं जागरूक बनाती है, बल्कि उन्हें अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों की सहायता करने के लिए भी तैयार करती है।
आपदा के समय जागरूकता और प्रशिक्षण की अहमियत
कोंच के सेठ बद्रीप्रसाद महाविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को जीवनरक्षक तकनीकों और आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। सीपीआर, प्राथमिक उपचार, स्ट्रेचर के इस्तेमाल और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सुरक्षा उपायों की जानकारी आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपयोगी है।
अचानक होने वाली दुर्घटनाओं में सही समय पर मदद मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में जागरूक नागरिक, प्रशिक्षित विद्यार्थी और जिम्मेदारी से काम करने वाले लोग आपातकालीन परिस्थितियों में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। एनडीआरएफ की टीम ने प्रशिक्षण के माध्यम से यही संदेश दिया कि संकट के समय घबराने के बजाय सावधानी, समझदारी और उपलब्ध प्रशिक्षण के आधार पर कदम उठाने चाहिए।
इस कार्यक्रम से विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन की बुनियादी समझ प्राप्त करने का अवसर मिला। साथ ही, उन्हें यह भी सीखने को मिला कि किसी जरूरतमंद की सहायता करने से पहले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना और समय पर विशेषज्ञों की मदद लेना कितना आवश्यक है। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम समाज में सुरक्षा संबंधी समझ विकसित करने और आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी मजबूत करने में सहायक साबित हो सकते हैं।