प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा: घाना, नामीबिया, त्रिनिडाड और टोबैगो की संसदों को करेंगे संबोधित

नई दिल्ली, 1 जुलाई 2025 — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी बहुप्रतीक्षित पांच देशों की विदेश यात्रा के तहत घाना, नामीबिया और त्रिनिडाड एवं टोबैगो की संसदों को संबोधित करेंगे। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई। इस यात्रा का उद्देश्य भारत के ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करना है।
30 वर्षों बाद घाना दौरा
विदेश मंत्रालय के सचिव (आर्थिक संबंध) डाम्मू रवि ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी का घाना दौरा करीब 30 वर्षों के अंतराल के बाद हो रहा है। इस दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ताएं होंगी, जिनमें द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती देने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी।
डाम्मू रवि ने कहा, “अगले दिन प्रधानमंत्री वहां की संसद को संबोधित करेंगे और भारतीय समुदाय से भी संवाद करेंगे, जिसकी संख्या लगभग 15,000 है।”
नामीबिया: 27 वर्षों बाद एक ऐतिहासिक कदम
प्रधानमंत्री मोदी 9 जुलाई को नामीबिया पहुंचेंगे। रवि के अनुसार, यह दौरा 27 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रहा है। भारत और नामीबिया के संबंध लंबे समय से सौहार्दपूर्ण रहे हैं और इस यात्रा से दोनों देशों के बीच सहयोग के नए द्वार खुलने की उम्मीद है।
त्रिनिडाड और टोबैगो: 1999 के बाद पहली भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा
दक्षिण मामलों की सचिव नीना मल्होत्रा ने बताया कि यह प्रधानमंत्री मोदी की त्रिनिडाड और टोबैगो की पहली यात्रा होगी और 1999 के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा है। यह दौरा त्रिनिडाड और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर के निमंत्रण पर हो रहा है।
नीना मल्होत्रा ने बताया कि यह दौरा एक ऐतिहासिक समय पर हो रहा है, जब त्रिनिडाड और टोबैगो 180 वर्षों पहले भारतीय प्रवासियों के आगमन की स्मृति मना रहा है। उन्होंने कहा, “यह साझा इतिहास हमारे दोनों देशों के बीच गहरे और स्थायी संबंधों की नींव है।”
विशेष सम्मान और सांस्कृतिक जुड़ाव
डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी त्रिनिडाड और टोबैगो की संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित करेंगे। इससे भारत और कैरिबियाई क्षेत्र के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में मजबूती आएगी।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री का संसद को संबोधित करना हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं का प्रतीक है।” एक विशेष उपहार के रूप में संसद के अध्यक्ष की कुर्सी को प्रधानमंत्री मोदी की ओर से भेंट किया जाएगा।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी की यह पांच देशों की यात्रा न केवल भारत के वैश्विक प्रभाव को बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, बल्कि इससे भारत के सांस्कृतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को भी नई ऊंचाई मिलेगी। यह दौरा “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना को साकार करता है, जिसमें भारत पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हुए आगे बढ़ रहा है।
