मार्च 31, 2026

“ऑनलाइन कट्टर विचारधारा फैलाना अब UAPA के तहत अपराध”: दिल्ली हाईकोर्ट

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Anoop singh

नई दिल्ली, 15 जुलाई 2025 – दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि डिजिटल माध्यमों से कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार करना, चाहे वह सोशल मीडिया हो या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और हरिश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि UAPA की धारा 18 न केवल भौतिक आतंकवादी कृत्यों पर लागू होती है, बल्कि किसी भी ऑनलाइन गतिविधि पर भी लागू होती है जो आतंकवादी कृत्य के लिए उकसावे या तैयारी का हिस्सा हो।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने कहा कि कट्टरपंथी और उग्रवादी सामग्री को डिजिटल रूप से प्रसारित करना अपने आप में UAPA की धारा 18 के अंतर्गत अपराध है, यदि उसका उद्देश्य आतंकवाद को बढ़ावा देना या उसमें सहायता करना हो।

यह फैसला उस समय आया जब कोर्ट अर्सलान फिरोज़ अहेंगर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अहेंगर को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 2021 में गिरफ्तार किया था। उन पर लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े होने का आरोप है।

किन धाराओं में मामला दर्ज है?

अहेंगर पर UAPA की निम्नलिखित धाराओं के तहत आरोप दर्ज हैं:

धारा 17: आतंकवाद के लिए फंडिंग

धारा 18: साजिश या उकसावे द्वारा आतंकी गतिविधि

धारा 18B: आतंकियों की भर्ती

धारा 38: आतंकी संगठन की सदस्यता

धारा 39: आतंकी संगठन को समर्थन

NIA का आरोप क्या है?

NIA के अनुसार, अहेंगर ने आतंकवादी मेहरान यासीन शल्ला के लिए काम किया था और सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टर विचारधारा का प्रचार किया। उन्होंने कई ऑनलाइन ग्रुप बनाए जिनमें रेडिकल प्रोपेगेंडा फैलाया जाता था, जिससे युवाओं को आतंकवाद में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाता था।

बचाव पक्ष की दलील और अदालत की टिप्पणी

अहेंगर ने अपने बचाव में कहा कि किसी मरे हुए आतंकी की तस्वीर साझा करना खुद में कोई अपराध नहीं है और इसे आतंकवाद से जोड़ना गलत है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है जो उन्हें साजिश या सहयोग में शामिल दिखाता हो।

हालाँकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि “आतंकी मंशा के साथ कट्टरपंथी सामग्री का ऑनलाइन प्रचार सीधे तौर पर धारा 18 के तहत आता है।”

निष्कर्ष:

अदालत ने यह भी पाया कि अहेंगर ने आतंकवादियों की तस्वीरें साझा की थीं और दूसरों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए प्रेरित किया था, जो कि UAPA के अंतर्गत गंभीर अपराध है। इस निर्णय से यह स्पष्ट संदेश गया है कि डिजिटल स्पेस में भी आतंकवाद के समर्थन या प्रचार की कोई जगह नहीं है, और ऐसा करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


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