बेंगलुरु दंगा मामला: तीन दोषियों को सात साल की सजा, NIA कोर्ट का फैसला

प्रकाशन तिथि: 24 जुलाई 2025 |
बेंगलुरु (कर्नाटक): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने वर्ष 2020 में हुए बेंगलुरु दंगे के मामले में तीन आरोपियों को सात साल की सजा और ₹36,000 का जुर्माना सुनाया है। इन तीनों ने 11 अगस्त 2020 को डीजे हाली (DJ Halli) और केजी हाली (KG Halli) पुलिस स्टेशनों पर हमले की घटना में अपना अपराध स्वीकार किया था।
अदालत ने जिन तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया, उनके नाम हैं – सैयद इक़रामुद्दीन उर्फ सैयद नवेद, सैयद आतिफ और मोहम्मद आतिफ। इन तीनों को विशेष अदालत के न्यायाधीश केम्पाराजू ने सजा सुनाई। इनकी क्रमश: केस में 14वें, 16वें और 18वें आरोपी के रूप में पहचान हुई थी।
घटना का पृष्ठभूमि:
11 अगस्त 2020 की रात करीब 9 बजे, 25 से 30 लोगों की भीड़ केजी हाली थाने के बाहर इकट्ठा हुई। उनका आरोप था कि विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के रिश्तेदार नवीन ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। वे नवीन की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व सैयद इक़रामुद्दीन ने किया। जब पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सीआरपीसी की धारा 144 लागू की और भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया, तो मामला हिंसक हो गया। उग्र भीड़ ने थाने पर हमला कर दिया और बड़े पैमाने पर हिंसा हुई।
दंगे की गंभीरता:
इस घटना में कुल 13 वाहन क्षतिग्रस्त हुए जिनमें एक इनोवा कार, पाँच दोपहिया वाहन और अन्य छह वाहन शामिल हैं। मामले में कुल 199 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ, जिनमें से 187 को गिरफ्तार किया गया, चार ने आत्मसमर्पण किया और एक आरोपी की मृत्यु हो गई। अब तक 138 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की जा चुकी है।
निष्कर्ष:
NIA की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि दंगे जैसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में न्यायिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। अदालत का यह निर्णय कानून और व्यवस्था की रक्षा के प्रति एक मजबूत संदेश भी देता है।
