फ़रवरी 14, 2026

श्रावण अमावस्या पर संगम में हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी📅 दिनांक: 24 जुलाई 2025 स्थान: प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)

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श्रावण अमावस्या के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों के संगम पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। गुरुवार सुबह से ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में संगम तट पर एकत्र होने लगे और स्नान कर भगवान शिव व अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

श्रावण अमावस्या का धार्मिक महत्व

श्रावण मास की अमावस्या को हिन्दू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। यह दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध और जलदान जैसे कर्मों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। जब यह अमावस्या श्रावण मास में आती है, तब इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इसे “हरियाली अमावस्या” के नाम से भी जाना जाता है, जो प्रकृति के नवजीवन और हरियाली का प्रतीक है।

प्रयागराज में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

भारी बारिश और हालिया बाढ़ के बावजूद भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं आई। सुबह से ही लोग स्नान के लिए संगम पहुंचने लगे। मंत्रोच्चार, दान, पूजा-अर्चना और शिवभक्ति के साथ श्रद्धालु डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित कर रहे थे।

मौसम विभाग की जानकारी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, प्रयागराज में इस दिन आसमान आमतौर पर बादलों से घिरा रहेगा और हल्की बारिश या गरज के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आर्द्रता का स्तर 90% तक रहा।

देशभर में धार्मिक उल्लास

श्रावण अमावस्या का पर्व केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया।

  • मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती की गई और श्रद्धालुओं ने folded hands के साथ पूजा की।
  • तमिलनाडु के थूथुकुडी पोर्ट बीच पर लोगों ने समुद्र में डुबकी लगाकर पितरों की शांति के लिए प्रार्थना की।

हरियाली अमावस्या का विशेष पक्ष

हरियाली अमावस्या प्रकृति के नवजीवन का प्रतीक मानी जाती है। यह समय खेती-बाड़ी, पर्यावरण और आत्मिक शुद्धि का है। इस दिन वृक्षारोपण करना भी पुण्य का कार्य माना जाता है। लोग इस दिन उपवास रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं, गरीबों को दान देते हैं और पितरों के लिए तर्पण करते हैं।

निष्कर्ष

श्रावण अमावस्या एक ऐसा अवसर है जब आस्था, प्रकृति, और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का संगम होता है। प्रयागराज के संगम में डुबकी लगाकर लोगों ने न केवल धार्मिक कर्तव्यों का निर्वहन किया, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की कामना भी की। यह दिन भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।


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