मार्च 30, 2026

तमिलनाडु: ‘बिरयानी अबिरामी’ को दो बच्चों की निर्मम हत्या के लिए आजीवन कारावास

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कांचीपुरम, 25 जुलाई 2025 — तमिलनाडु में एक दिल दहला देने वाले मामले ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। कांचीपुरम की प्रिंसिपल जिला और सत्र न्यायालय ने “बिरयानी अबिरामी” के नाम से कुख्यात हो चुकी महिला को अपने ही दो मासूम बच्चों की निर्मम हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई है।

यह मामला उस वक्त सामने आया जब कांचीपुरम जिले की रहने वाली अबिरामी ने अपने 7 वर्षीय बेटे अजय और 4 वर्षीय बेटी कार्तिका को नींद की गोलियां देकर मौत के घाट उतार दिया। यह अपराध उसने अपने अवैध संबंधों को जारी रखने के लिए किया, जिसमें उसके बच्चे बाधा बन गए थे।

न्यायालय का निर्णय और सख्त रुख

न्यायाधीश पी.यू. सेम्मल की अध्यक्षता में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने अबिरामी पर ₹15,000 का जुर्माना भी लगाया। अगर यह जुर्माना नहीं भरा गया, तो तीन साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

अवैध संबंध और निर्मम हत्या

अबिरामी, जो कि कांचीपुरम जिले के कुंडराथुर इलाके की निवासी है, अपने पति विजय के साथ 3rd कत्तालाई क्षेत्र में रहती थी। इसी दौरान उसका संबंध मीनाक्षीसुंदरम नामक एक बिरयानी होटल कर्मचारी से हो गया। अवैध प्रेम-प्रसंग में बाधा बनने वाले अपने बच्चों को वह बोझ समझने लगी थी।

उसने पहले बच्चों को नींद की गोलियां दीं और फिर उनकी हत्या कर दी। इस नृशंस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश फैला दिया।

पुलिस कार्यवाही और सजा

घटना के बाद कुंडराथुर पुलिस ने अबिरामी और मीनाक्षीसुंदरम दोनों को गिरफ्तार किया। अदालत में दोनों ने सजा में नरमी की अपील की, लेकिन न्यायाधीश ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि “मासूम बच्चों की हत्या किसी भी हालत में क्षम्य नहीं हो सकती।”

हालांकि अदालत ने मृत्युदंड नहीं सुनाया, पर भारतीय दंड संहिता की तीन धाराओं के तहत दोनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।


निष्कर्ष: यह मामला समाज को यह संदेश देता है कि व्यक्तिगत इच्छाओं की पूर्ति के लिए किए गए अमानवीय अपराध कभी भी क्षमा योग्य नहीं हो सकते। न्यायालय का यह कठोर निर्णय कानून के प्रति आस्था को और सुदृढ़ करता है।


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