मार्च 22, 2026

उपराष्ट्रपति चुनाव: अखिलेश यादव के आरोपों से गरमाई सियासत

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नई दिल्ली: देश में उपराष्ट्रपति चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, राजनीतिक सरगर्मियाँ भी तेज़ होती जा रही हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सत्तारूढ़ दल अपने सहयोगियों और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के साथ “यूज़ एंड थ्रो” की नीति अपनाता है।

अखिलेश का दावा है कि भाजपा सिर्फ अपने स्वार्थ के समय नेताओं का इस्तेमाल करती है और बाद में उन्हें हाशिए पर धकेल देती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति पद पर आसीन रहने वाले जगदीप धनखड़ को भाजपा ने उपेक्षित कर दिया और अब उन्हें पूरी तरह हाशिए पर डाल दिया गया है।

विपक्ष की रणनीति

उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष भी सक्रिय दिखाई दे रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह चुनाव केवल संख्याबल पर आधारित नहीं है, बल्कि यह सांसदों की “अंतरात्मा की आवाज़” की भी परीक्षा है। विपक्ष ने अपने साझा उम्मीदवार के समर्थन में माहौल बनाने की कवायद शुरू कर दी है, ताकि चुनावी मुकाबला सिर्फ औपचारिकता न रह जाए।

भाजपा का पलटवार

भाजपा नेताओं ने अखिलेश यादव के आरोपों को राजनीतिक हताशा करार दिया है। उनका कहना है कि सपा सहित पूरा विपक्ष जनता का विश्वास खो चुका है, इसलिए अब वे बेबुनियाद आरोपों का सहारा ले रहे हैं। भाजपा का दावा है कि एनडीए का उम्मीदवार भारी बहुमत से जीत हासिल करेगा और विपक्ष की एकजुटता महज़ दिखावा साबित होगी।

बढ़ता सियासी तापमान

जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, दोनों खेमे अपने-अपने पत्ते खोल रहे हैं। एक ओर विपक्ष “लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा” का मुद्दा उठा रहा है, वहीं भाजपा अपने बहुमत और गठबंधन की मजबूती पर भरोसा जता रही है। नतीजा चाहे जो भी हो, लेकिन यह साफ है कि उपराष्ट्रपति चुनाव ने राजनीतिक बहस को नए सिरे से तेज़ कर दिया है।


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