फ़रवरी 12, 2026

आईआईएम बोधगया बन रहा नवाचार और वैश्विक सहयोग का उभरता केंद्र

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भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), बोधगया तेजी से देश के उन प्रमुख संस्थानों में शामिल हो रहा है, जो न केवल प्रबंधन शिक्षा में उत्कृष्टता पर ध्यान दे रहे हैं, बल्कि नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी नई दिशा दे रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के संरक्षण में आईआईएम बोधगया ने हाल के वर्षों में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिल रहा मजबूत आधार

आईआईएम बोधगया का स्टार्टअप इकोसिस्टम छात्रों के नेतृत्व वाले उद्यमों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान की एनविजन सेल के माध्यम से CAN3 जैसे स्टार्टअप सामने आए हैं, जिनका राजस्व एक करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। इसके अलावा Sippin, Flowy और Aviglu जैसे नवाचार आधारित स्टार्टअप भी छात्रों की उद्यमशील सोच को दर्शाते हैं।

संस्थान में इस समय 40 से अधिक सक्रिय स्टार्टअप, 65 से ज्यादा मेंटर्स, लाइव प्रोजेक्ट्स और उद्योग समर्थित इनोवेशन गतिविधियां संचालित हो रही हैं। यह माहौल छात्रों को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजन करने वाला बनने के लिए प्रेरित कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता सहयोग

आईआईएम बोधगया की एक बड़ी उपलब्धि उसका तेजी से बढ़ता वैश्विक नेटवर्क है। संस्थान ने अब तक 39 अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनके तहत कनाडा, स्वीडन, रूस, इटली, दक्षिण कोरिया सहित कई देशों के विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ शैक्षणिक साझेदारी की जा रही है।

इन सहयोगों के तहत फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त शोध परियोजनाएं और छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। 10 से अधिक देशों में आउटबाउंड एक्सचेंज के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वहीं अमेरिका के नोट्रे डेम विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शोध के लिए फंडिंग भी की जा रही है। साथ ही, ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल के माध्यम से विदेशी छात्रों का आगमन भी बढ़ रहा है।

वैश्विक दृष्टिकोण वाले नेतृत्व का निर्माण

आईआईएम बोधगया में आयोजित मॉडल डब्ल्यूटीओ, इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) जैसे कार्यक्रम और पासपोर्ट कैंप जैसी पहलें छात्रों को वैश्विक मुद्दों की समझ देने में सहायक बन रही हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य ऐसे भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करना है, जो वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व आत्मविश्वास और समझदारी के साथ कर सकें।

शिक्षा से आगे, राष्ट्र निर्माण की भूमिका

आईआईएम बोधगया आज केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता और वैश्विक सहयोग का केंद्र बनकर उभर रहा है। स्टार्टअप संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से यह संस्थान न केवल छात्रों का भविष्य संवार रहा है, बल्कि देश की आर्थिक और बौद्धिक प्रगति में भी योगदान दे रहा है।

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