टिकाऊ सुरक्षा का मूल मंत्र: टकराव नहीं, शांति निर्माण — एंटोनियो गुटेरेस का वैश्विक संदेश

दुनिया आज अनिश्चितताओं, युद्धों और मानवीय संकटों से घिरी है। ऐसे समय में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक समुदाय को एक स्पष्ट और दूरदर्शी चेतावनी दी है—सुरक्षा की असली गारंटी हथियारों का ढेर नहीं, बल्कि शांति की जड़ें मजबूत करना है। उनके अनुसार, यदि संघर्ष को केवल अस्थायी समझौतों से दबाया जाए और उसके कारणों को नजरअंदाज कर दिया जाए, तो शांति एक भ्रम बनकर रह जाती है।
संघर्ष की सतह नहीं, जड़ों पर काम जरूरी
गुटेरेस का तर्क सीधा है—जब तक गरीबी, असमानता, राजनीतिक बहिष्कार, संसाधनों पर अन्यायपूर्ण नियंत्रण और जलवायु संकट जैसी वजहें बनी रहेंगी, तब तक टकराव बार-बार सिर उठाते रहेंगे। युद्ध विराम या शांति समझौते केवल लक्षणों को थामते हैं; बीमारी तब खत्म होती है जब उसकी जड़ पर इलाज हो। इसलिए शांति निर्माण को संकट के बाद की प्रक्रिया नहीं, बल्कि पहले कदम के रूप में अपनाने की जरूरत है।
रोकथाम: सबसे सस्ता और प्रभावी उपाय
उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि संघर्ष की रोकथाम न केवल मानवीय दृष्टि से जरूरी है, बल्कि आर्थिक रूप से भी समझदारी है। युद्धों पर होने वाला खर्च—चाहे वह सैन्य हो या पुनर्निर्माण—उस निवेश से कहीं अधिक है, जो शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और संवाद में लगाया जा सकता है। रोकथाम में निवेश भविष्य की तबाही को आज ही रोक सकता है।
संवाद, भरोसा और समावेशन की भूमिका
गुटेरेस मानते हैं कि टिकाऊ शांति का निर्माण केवल सरकारों के फैसलों से नहीं होता। इसमें नागरिक समाज, युवाओं, महिलाओं और हाशिये पर खड़े समुदायों की भागीदारी अनिवार्य है। जब लोग निर्णय-प्रक्रिया का हिस्सा बनते हैं, तब असंतोष कम होता है और विश्वास पैदा होता है। संवाद का रास्ता हथियारों के शोर से कहीं ज्यादा दूर तक जाता है।
बदलते वैश्विक संदर्भ में नई सोच
आज के समय में साइबर खतरे, जलवायु परिवर्तन और जबरन विस्थापन जैसे नए कारक संघर्ष को और जटिल बना रहे हैं। गुटेरेस के अनुसार, सुरक्षा की परिभाषा को भी बदलना होगा—जहां मानव सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय को बराबरी की अहमियत मिले। यही दृष्टिकोण देशों को दीर्घकालिक स्थिरता की ओर ले जा सकता है।
निष्कर्ष: भविष्य की सुरक्षा, आज के फैसलों में
एंटोनियो गुटेरेस का संदेश स्पष्ट और सशक्त है—शांति कोई बाद का पुरस्कार नहीं, बल्कि सबसे पहली रणनीति होनी चाहिए। अगर दुनिया वास्तव में सुरक्षित भविष्य चाहती है, तो उसे संघर्ष को जन्म देने वाली स्थितियों को बदलने का साहस दिखाना होगा। स्थायी शांति वही है जो न्याय, अवसर और सम्मान के आधार पर खड़ी हो—और यही आने वाली पीढ़ियों की असली सुरक्षा है।
