फ़रवरी 12, 2026

भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता: भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नया युग

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को केवल एक कूटनीतिक या वाणिज्यिक पहल के रूप में देखना अधूरा होगा। यह समझौता भारतीय कृषि व्यवस्था, किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की संरचना में दूरगामी बदलाव लाने की क्षमता रखता है। विशेष रूप से अमेरिकी कृषि आयात बाजार में भारतीय उत्पादों को शून्य-शुल्क (Zero Duty) पहुँच मिलना, इस समझौते को ऐतिहासिक बनाता है।

भारतीय कृषि के लिए अवसरों का विस्तार

अमेरिका का लगभग 46 अरब डॉलर का कृषि आयात बाजार अब भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए कहीं अधिक सुलभ होने वाला है। भारत पहले से ही अमेरिका के साथ कृषि व्यापार में अधिशेष की स्थिति में है, जो यह दर्शाता है कि भारतीय उत्पाद गुणवत्ता और कीमत—दोनों मोर्चों पर प्रतिस्पर्धी हैं। इस समझौते के बाद शुल्क बाधाएँ हटने से भारतीय कृषि उत्पाद अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए और अधिक आकर्षक बनेंगे।

मसाले, चाय, कॉफी, फल, आवश्यक तेल और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसे उत्पादों को पहले ही वैश्विक बाजार में पहचान मिल चुकी है। अब शून्य-शुल्क व्यवस्था से इनकी मांग में निरंतर वृद्धि संभव है, जिससे मूल्य श्रृंखला के हर स्तर पर किसानों को लाभ पहुँच सकता है।

किसानों की आय में संरचनात्मक सुधार

यह समझौता केवल निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय में स्थायी सुधार की नींव रखता है। अमेरिकी बाजार में बेहतर कीमत मिलने से बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और किसान सीधे वैश्विक मांग से जुड़ सकेंगे। इसके परिणामस्वरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की प्रवृत्ति मजबूत होगी।

विशेष रूप से उच्च मूल्य वाली फसलों—जैसे ऑर्गेनिक उत्पाद, हर्बल सामग्री और प्रसंस्कृत खाद्य वस्तुएँ—को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे छोटे और मध्यम किसानों के लिए नए अवसर खुलेंगे।

समुद्री और वानिकी उत्पादों को नई गति

BTA का एक महत्वपूर्ण पहलू समुद्री उत्पादों से जुड़ा है। अमेरिका का लगभग 25 अरब डॉलर का समुद्री आयात बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए खुलना, तटीय राज्यों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। मछलीपालन, झींगा पालन और इससे जुड़ी प्रोसेसिंग इकाइयों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

साथ ही, वानिकी आधारित उत्पादों को समर्थन मिलने से आदिवासी और वन-आश्रित समुदायों की आजीविका में सुधार संभव है। यह विकास मॉडल केवल आय बढ़ाने तक सीमित न रहकर समावेशी विकास को भी बल देता है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव

लंबी अवधि में यह समझौता ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश, भंडारण सुविधाओं, कोल्ड चेन और कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार को प्रोत्साहित करेगा। जब कृषि निर्यात एक स्थिर आय स्रोत बनेगा, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अस्थिरता कम होगी और पलायन जैसी समस्याओं पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।

इसके अतिरिक्त, भविष्यवादी और आजीविका आधारित फसलों को समर्थन देने का दृष्टिकोण, भारतीय कृषि को जलवायु परिवर्तन और वैश्विक बाज़ार की बदलती मांगों के अनुरूप ढालने में मदद करेगा।

निष्कर्ष

भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता भारतीय कृषि के लिए केवल एक व्यापारिक अवसर नहीं, बल्कि एक रणनीतिक परिवर्तन का संकेत है। यह किसानों को वैश्विक मंच से जोड़ने, उनकी आय बढ़ाने और ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम बन सकता है। यदि इसे संतुलित नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के साथ आगे बढ़ाया गया, तो यह समझौता भारतीय कृषि इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।


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