शिक्षा के अधिकार पर बढ़ता खतरा, एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया से स्कूलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की
नई दिल्ली। शिक्षा को बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत नींव माना जाता है। लेकिन दुनिया के कई संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना और सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई करना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शिक्षा पर बढ़ते हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। 9 सितंबर को मनाए जाने वाले International Day to Protect Education from Attack के अवसर पर अपने संदेश में उन्होंने कहा कि शिक्षा हर बच्चे और युवा का मौलिक मानव अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल करना कई जगहों पर पहले से अधिक खतरनाक हो गया है।
गुटेरेस के अनुसार, पिछले दो वर्षों में दुनिया भर में स्कूलों, विद्यार्थियों और शिक्षकों को निशाना बनाकर 8,500 से अधिक हमले किए गए। इन घटनाओं ने हिंसा, अपहरण और मानसिक आघात जैसी गंभीर परिस्थितियां पैदा की हैं। उनका संदेश केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार को प्राथमिकता देने की स्पष्ट अपील भी है।

शिक्षा केवल पढ़ाई नहीं, भविष्य का आधार
शिक्षा किसी भी समाज के विकास की आधारशिला होती है। स्कूल बच्चों को केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उन्हें सामाजिक व्यवहार, जिम्मेदारी, सहयोग और अपने भविष्य के लिए निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करते हैं। ऐसे में जब किसी बच्चे को हिंसा या संघर्ष के कारण स्कूल जाने से डरना पड़े, तो इसका असर उसके पूरे जीवन पर पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने शिक्षा को बच्चों और युवाओं के बेहतर भविष्य का रास्ता बताया है। उनका कहना है कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिलना चाहिए। यह जिम्मेदारी केवल स्कूल प्रशासन या शिक्षकों की नहीं, बल्कि राज्यों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी है।
दो वर्षों में 8,500 से अधिक हमलों ने बढ़ाई चिंता
गुटेरेस द्वारा सामने रखे गए आंकड़े वैश्विक स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पिछले दो वर्षों के दौरान 8,500 से अधिक हमलों में स्कूलों, विद्यार्थियों और शिक्षकों को निशाना बनाया गया। इनमें संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा संस्थानों पर हिंसा और अन्य गंभीर घटनाएं शामिल हैं।
Global Coalition to Protect Education from Attack की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 2024 और 2025 के दौरान शिक्षा पर कम से कम 8,566 हमले दर्ज किए गए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि यह संख्या इससे पहले के दो वर्षों की तुलना में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाती है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि युद्ध और संघर्ष का प्रभाव केवल सैनिकों या युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। जब स्कूल और शिक्षा संस्थान प्रभावित होते हैं, तो इसका सबसे बड़ा असर बच्चों और उनके परिवारों पर पड़ता है।
स्कूलों का सुरक्षित रहना क्यों जरूरी?
स्कूल किसी भी बच्चे के लिए सीखने और सामाजिक विकास का सुरक्षित स्थान होना चाहिए। लेकिन संघर्ष के दौरान यही स्थान कभी-कभी हिंसा की चपेट में आ जाते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है और कई परिवार अपने बच्चों को स्कूल भेजने से भी डरने लगते हैं।
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सभी देशों का दायित्व है कि वे प्रत्येक बच्चे के शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करें और स्कूलों तथा अन्य शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा करें। गुटेरेस ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से स्कूलों और शिक्षा संस्थानों पर हमले रोकने की अपील की है।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जिम्मेदारियों का पालन होना चाहिए और शिक्षा पर हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
लड़कियों और कमजोर परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान
संघर्ष और अस्थिरता की परिस्थितियों में सभी बच्चों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन कुछ वर्गों पर इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है। गुटेरेस ने विशेष रूप से लड़कियों और कमजोर परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत बताई है।
उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था को केवल भौतिक स्कूलों तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए। बदलते समय में ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल माध्यम भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए बच्चों को सुरक्षित तरीके से सीखने का अवसर देने के लिए शिक्षा प्रणालियों को प्रत्यक्ष और ऑनलाइन दोनों स्तरों पर मजबूत बनाना आवश्यक है।
Safe Schools Declaration को लागू करने पर जोर
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने देशों से Safe Schools Declaration का समर्थन और प्रभावी क्रियान्वयन करने की अपील की है। इसका उद्देश्य सशस्त्र संघर्षों के दौरान स्कूलों और शिक्षा को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है।
गुटेरेस ने शिक्षा की सुरक्षा के लिए काम करने वाले Global Coalition to Protect Education from Attack को समर्थन देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि केवल बयान जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। देशों को ठोस नीतियां बनाकर उन्हें जमीन पर लागू करना होगा।
संघर्ष से प्रभावित बच्चों को वापस शिक्षा से जोड़ना जरूरी
युद्ध और हिंसा के कारण कई बच्चे लंबे समय तक स्कूल से दूर हो जाते हैं। कुछ बच्चे विस्थापन, पारिवारिक संकट या अन्य परिस्थितियों के कारण अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते। ऐसे बच्चों को दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना एक बड़ी मानवीय जिम्मेदारी है।
गुटेरेस ने सशस्त्र बलों या समूहों से जुड़े बच्चों और युवाओं को सुरक्षित तरीके से स्कूल तथा समुदायों में वापस लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। इसका उद्देश्य बच्चों को हिंसा के माहौल से निकालकर सामान्य जीवन और शिक्षा की ओर लौटने का अवसर देना है।
दुनिया के लिए बड़ा संदेश
एंटोनियो गुटेरेस का संदेश ऐसे समय में आया है जब कई हिस्सों में संघर्ष और अस्थिरता के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बच्चों के लिए स्कूल केवल एक इमारत नहीं होता, बल्कि वह उनके सपनों, भविष्य और सामाजिक विकास का केंद्र होता है।
यदि स्कूल असुरक्षित होंगे, तो इसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ सकता है। इसलिए शिक्षा की सुरक्षा को मानवीय सहायता के साथ-साथ वैश्विक शांति और विकास के एजेंडे का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाना चाहिए।
गुटेरेस ने देशों से शिक्षा में निवेश बढ़ाने, स्कूलों की सुरक्षा मजबूत करने और संघर्ष के बीच भी बच्चों को सीखने का अवसर उपलब्ध कराने का आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी देशों की सहायता के लिए विभिन्न माध्यमों और UNESCO की नीतिगत एवं व्यावहारिक सहायता का उल्लेख किया है।
निष्कर्ष
दुनिया में 8,500 से अधिक शिक्षा-संबंधी हमलों का आंकड़ा यह बताता है कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चुनौती मौजूद है। शिक्षा किसी भी बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की पहली सीढ़ी है और इसे हिंसा से बचाना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।
एंटोनियो गुटेरेस की अपील का मूल संदेश यही है कि बच्चों को डर के माहौल में नहीं, बल्कि सुरक्षित वातावरण में सीखने और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए। युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियों में भी स्कूलों को सुरक्षित रखना, शिक्षकों और विद्यार्थियों की रक्षा करना तथा प्रभावित बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ना आवश्यक है।
अगर वैश्विक समुदाय मिलकर शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है, तो लाखों बच्चों के भविष्य को बचाया जा सकता है। आखिरकार, सुरक्षित स्कूल ही सुरक्षित भविष्य की नींव रख सकते हैं।