ब्रिटेन में रूसी खुफिया नेटवर्क की मदद के आरोप में 31 वर्षीय व्यक्ति गिरफ्तार, तोड़फोड़ की तैयारी का भी आरोप
लंदन। ब्रिटेन में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। स्विंडन निवासी 31 वर्षीय जोशुआ कैमिज पर विदेशी खुफिया सेवा की सहायता करने और कथित तौर पर तोड़फोड़ की एक कार्रवाई की तैयारी से जुड़े अपराधों में आरोप लगाए गए हैं। यह कार्रवाई ब्रिटेन की काउंटर टेररिज्म पुलिस की जांच के बाद हुई है। ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, मामले में रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी से जुड़े माने जाने वाले एक संगठन के प्रतिनिधि के साथ कथित संपर्क की भी जांच की गई है।
मेट्रोपॉलिटन पुलिस के मुताबिक, कैमिज को 4 सितंबर 2026 को स्विंडन स्थित एक पते से काउंटर टेररिज्म पुलिसिंग लंदन के अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई में विल्टशायर पुलिस के अधिकारियों ने भी सहयोग किया। पुलिस ने स्विंडन के एक अन्य पते पर तलाशी भी ली। अगले दिन कैमिज को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत विदेशी खुफिया सेवा की सहायता करने के संदेह में दोबारा गिरफ्तार कर हिरासत में लिया गया।

दो गंभीर आरोप लगाए गए
जांच पूरी होने के बाद क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस यानी सीपीएस ने कैमिज के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दो आरोपों को मंजूरी दी। पहला आरोप विदेशी खुफिया सेवा की गतिविधियों में भौतिक रूप से सहायता करने से संबंधित है। दूसरा आरोप किसी कथित तोड़फोड़ की कार्रवाई को अंजाम देने के इरादे से उससे जुड़ी तैयारी करने से संबंधित है।
अधिकारियों ने कहा है कि आरोपों का संबंध ऐसे व्यक्ति से कथित संपर्क से है जिसे रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी से जुड़े GRU Volunteer Corps का प्रतिनिधि माना जाता है। ब्रिटिश अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस संगठन को रूस की सैन्य खुफिया व्यवस्था से नियंत्रित बताया गया है। हालांकि, जांच एजेंसियों ने कथित तोड़फोड़ की योजना का वास्तविक लक्ष्य या उसका तरीका सार्वजनिक नहीं किया है।
काउंटर टेररिज्म पुलिस ने की जांच
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसकी जांच सामान्य पुलिस कार्रवाई के बजाय काउंटर टेररिज्म पुलिसिंग लंदन की निगरानी में हुई। विल्टशायर पुलिस ने स्थानीय स्तर पर जांच और कार्रवाई में सहयोग किया। अधिकारियों ने तलाशी और गिरफ्तारी के बाद मामले से संबंधित अतिरिक्त जानकारी जुटाई, जिसके आधार पर अभियोजन पक्ष ने आरोप तय करने की अनुमति दी।
क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के विशेष अपराध और काउंटर टेररिज्म डिवीजन के मुख्य अभियोजक फ्रैंक फर्ग्यूसन ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने मामले में अदालत के सामने कार्यवाही शुरू करने के लिए पर्याप्त सबूत और जनहित से जुड़ी आवश्यकताओं का आकलन किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामला अभी सक्रिय है और आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई
कैमिज के खिलाफ कार्रवाई ब्रिटेन के National Security Act 2023 के तहत की गई है। इस कानून का उद्देश्य विदेशी शक्तियों से जुड़े जासूसी, हस्तक्षेप, तोड़फोड़ और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अतिरिक्त अधिकार देना है।
ब्रिटेन ने हाल के वर्षों में विदेशी खुफिया गतिविधियों और अप्रत्यक्ष रूप से संचालित होने वाले नेटवर्क को लेकर अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में रूस से जुड़े कथित गुप्त अभियानों और तोड़फोड़ की घटनाओं को लेकर कई देशों में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ी है। ऐसे मामलों में स्थानीय नागरिकों के संभावित इस्तेमाल और विदेशी नेटवर्क के साथ उनके संपर्क को भी गंभीरता से जांचा जाता है।
GRU Volunteer Corps पर ब्रिटेन की नजर
ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, जिस GRU Volunteer Corps का नाम इस मामले में सामने आया है, उसे रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी GRU से नियंत्रित समूह के रूप में देखा जाता है। ब्रिटेन ने इस संगठन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए नए कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल किया है।
अधिकारियों का आरोप है कि ऐसे समूह विदेशी खुफिया जानकारी जुटाने और दूसरे देशों में गुप्त गतिविधियों को अंजाम देने के लिए काम कर सकते हैं। ब्रिटिश सरकार ने इस तरह के संगठनों को लेकर चिंता जताई है, खासकर तब जब उनकी गतिविधियों का संबंध देश की सुरक्षा या महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों से जुड़ा हो।
हालांकि, कैमिज के मामले में यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है कि कथित तौर पर किस तरह की तोड़फोड़ की तैयारी की जा रही थी। जांच एजेंसियों ने भी सार्वजनिक रूप से किसी संभावित लक्ष्य, स्थान या कथित योजना का विवरण नहीं दिया है। इसलिए इस स्तर पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
ब्रिटिश सरकार ने जताई सतर्कता
ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने मामले की विशिष्ट परिस्थितियों पर विस्तार से टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि पुलिस ने संभावित खतरे के खिलाफ कार्रवाई की है। उन्होंने यूरोप में हाल की ऐसी घटनाओं का उल्लेख किया जिनके बारे में ब्रिटिश सरकार का मानना है कि उनका उद्देश्य डर पैदा करना, व्यवधान उत्पन्न करना और यूक्रेन के समर्थन को कमजोर करना हो सकता है।
ब्रिटिश सरकार का कहना है कि देश की सुरक्षा को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि से निपटने के लिए कानून के तहत आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी खुफिया एजेंसियों से जुड़े कथित नेटवर्क और उनके संभावित सहयोगियों पर आने वाले समय में भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर बनी रह सकती है।
10 सितंबर को अदालत में पेशी
जोशुआ कैमिज को 10 सितंबर 2026 को लंदन स्थित वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट्स कोर्ट में पेश किया जाना है। अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल मामले से जुड़े आरोप केवल आरोप हैं और अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने तक कैमिज को कानून के अनुसार निर्दोष माना जाएगा।
अभियोजन पक्ष ने मीडिया और आम लोगों से भी अपील की है कि वे ऐसी टिप्पणी, जानकारी या सामग्री ऑनलाइन साझा न करें जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यह अपील इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सार्वजनिक चर्चा तेजी से बढ़ सकती है और अधूरी जानकारी के आधार पर निष्कर्ष निकालने का जोखिम रहता है।
रूस-ब्रिटेन संबंधों के बीच बढ़ी सुरक्षा चिंता
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब ब्रिटेन और रूस के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं। यूक्रेन युद्ध, प्रतिबंधों, जासूसी के आरोपों और यूरोप में कथित गुप्त गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच अविश्वास बढ़ा है।
ब्रिटेन पहले भी रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी से जुड़े लोगों पर देश और उसके सहयोगियों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के आरोप लगाता रहा है। ऐसे मामलों ने ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती खड़ी की है, जिसमें पारंपरिक जासूसी के साथ-साथ कथित अप्रत्यक्ष नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर सहयोग करने वाले लोगों की भूमिका की जांच भी शामिल है।
जोशुआ कैमिज के खिलाफ शुरू हुई कानूनी कार्रवाई इसी व्यापक सुरक्षा चिंता की पृष्ठभूमि में देखी जा रही है। हालांकि, इस मामले की वास्तविक प्रकृति और कथित गतिविधियों की पूरी तस्वीर अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई और जांच से ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल ब्रिटिश अधिकारी मामले की जांच आगे बढ़ा रहे हैं और अभियोजन पक्ष ने निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया पर जोर दिया है। इसलिए जब तक अदालत में आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक मामले से जुड़ी किसी भी जानकारी को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं।