ग्राम पंचायत सुरौंधा में सफाई व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर उठे सवाल, प्रधान पर मनमानी के आरोप

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रिपोर्ट: पंकज त्रिपाठी, तहसील संवाददाता
प्रकाशन: हिट एंड हॉट न्यूज़
स्थान: मऊ, जनपद चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 21 अगस्त 2026

मऊ। विकासखंड मऊ के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सुरौंधा में सफाई व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों के बीच असंतोष की स्थिति सामने आने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में तैनात सफाई कर्मी नियमित रूप से गांव में नहीं पहुंचता, जिसके कारण साफ-सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं, ग्राम पंचायत में कराए जा रहे विकास कार्यों को लेकर भी ग्राम प्रधान की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं।

ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार गांव के अलग-अलग पुरवों में विकास कार्यों की स्थिति एक जैसी नहीं है। आरोप लगाया गया है कि कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक विकास कार्य कराए गए हैं, जबकि दूसरे हिस्सों में बुनियादी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। सबसे गंभीर समस्या जल निकासी को लेकर बताई जा रही है। बारिश के मौसम में नालियों और जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से कई स्थानों पर पानी जमा होने की स्थिति पैदा हो जाती है।

सफाई कर्मी के नियमित नहीं आने का आरोप

ग्राम पंचायत सुरौंधा में सफाई व्यवस्था ग्रामीण जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाई कर्मी की नियमित उपस्थिति नहीं होने के कारण गांव की गलियों, नालियों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई प्रभावित होती है। बरसात के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि जगह-जगह पानी जमा होने से गंदगी बढ़ने की आशंका रहती है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सफाई कर्मी नियमित रूप से अपने दायित्व का निर्वहन करे और ग्राम पंचायत स्तर से भी निगरानी की जाए तो सफाई व्यवस्था में काफी सुधार किया जा सकता है। उनका यह भी कहना है कि सफाई व्यवस्था केवल किसी एक कर्मचारी की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि ग्राम पंचायत प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को भी इसकी नियमित निगरानी करनी चाहिए।

विकास कार्यों में असमानता का आरोप

ग्रामीणों द्वारा ग्राम प्रधान पर विकास कार्यों में मनमानी किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ग्राम पंचायत के सभी पुरवों और आबादी वाले क्षेत्रों में समान प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य होने चाहिए, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अधिक ध्यान दिए जाने की बात सामने आ रही है।

ग्रामीणों के अनुसार सड़क, नाली, जल निकासी, सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जरूरत पूरे गांव में है। ऐसे में विकास कार्यों का चयन जनहित और आवश्यकता के आधार पर किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिन स्थानों पर सबसे अधिक आवश्यकता है, वहां अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ग्राम प्रधान या संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जल निकासी बनी सबसे बड़ी समस्या

ग्राम पंचायत सुरौंधा में बारिश के दौरान जल निकासी की समस्या को ग्रामीणों ने प्रमुख मुद्दा बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि पर्याप्त नालियों और जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात का पानी कई जगहों पर लंबे समय तक जमा रहता है। कुछ स्थानों पर पानी घरों के आसपास पहुंचने की शिकायत भी की गई है।

जलभराव से लोगों को आवागमन में परेशानी होने के साथ-साथ घरों के आसपास गंदगी और असुविधा की स्थिति बन सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत को बारिश शुरू होने से पहले नालियों की सफाई, जल निकासी मार्गों की मरम्मत और पानी की निकासी के स्थायी समाधान पर ध्यान देना चाहिए था।

ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव में जल निकासी की समस्या का सर्वे कराकर प्राथमिकता के आधार पर नाली निर्माण और अन्य आवश्यक कार्य कराए जाएं। उनका कहना है कि केवल अस्थायी सफाई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिससे बारिश का पानी आबादी वाले क्षेत्रों में जमा न हो।

निजी क्षेत्र में विकास को लेकर भी सवाल

शिकायत में ग्राम प्रधान पर अपने आसपास के क्षेत्र और निजी उपयोग से जुड़े स्थानों पर अधिक रुचि लेने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत के संसाधनों का इस्तेमाल पूरे गांव के सामूहिक हित को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

यदि किसी विकास कार्य को लेकर ग्रामीणों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं तो संबंधित विभाग द्वारा अभिलेखों की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। ग्राम पंचायत में स्वीकृत कार्य, लागत, भुगतान, कार्यस्थल और लाभार्थियों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि विकास कार्य निर्धारित नियमों और प्राथमिकताओं के अनुसार हुए हैं या नहीं।

बजट और जमीन खरीद से जुड़े आरोपों की जांच की मांग

शिकायत में ग्राम पंचायत के बजट के कथित दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि पूर्व में किए गए कुछ कार्यों और बजट के इस्तेमाल को लेकर सवाल हैं। इसके साथ ही ग्राम सभा हटवा और कर्वी में जमीन खरीदे जाने का भी उल्लेख किया गया है।

इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए। हालांकि, जमीन खरीद अथवा व्यक्तिगत संपत्ति से जुड़े दावों की पुष्टि के लिए राजस्व अभिलेखों, संपत्ति संबंधी दस्तावेजों और अन्य वैधानिक रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी। केवल आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

ग्रामीणों ने जांच और समान विकास की उठाई मांग

ग्राम पंचायत के ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विकास कार्यों को किसी व्यक्ति या क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। सड़क, नाली, सफाई, जल निकासी, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं प्रत्येक पुरवे और आबादी के लिए जरूरी हैं।

ग्रामीणों ने संबंधित विकास विभाग और प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। साथ ही सफाई कर्मी की उपस्थिति और उसके कार्यों की भी जांच की जाए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

निष्पक्ष जांच से स्पष्ट हो सकती है तस्वीर

ग्राम पंचायत सुरौंधा से सामने आए आरोपों के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। पंचायत के विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव, स्वीकृति, माप पुस्तिका, भुगतान, कार्यस्थल और संबंधित अभिलेखों की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

वहीं, सफाई व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण किया जा सकता है। यदि सफाई कर्मी निर्धारित जिम्मेदारी के अनुसार गांव में उपस्थित नहीं हो रहा है तो उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई संभव है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें किसी व्यक्ति विशेष से विवाद नहीं, बल्कि गांव में समान और आवश्यकता आधारित विकास की अपेक्षा है। उनका मानना है कि पंचायत के बजट का उपयोग पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और सबसे पहले उन समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए, जिनसे बड़ी संख्या में ग्रामीण प्रभावित होते हैं।

फिलहाल ग्राम पंचायत सुरौंधा में सफाई व्यवस्था, जल निकासी और विकास कार्यों को लेकर लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। संबंधित अधिकारियों की जांच और ग्राम प्रधान का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने तथ्यात्मक हैं।

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