नेपाल में भोटे कोशी बाढ़ से तबाही के बाद राहत अभियान तेज, पीएम बालेन शाह बोले- हर नागरिक तक पहुंचेगी मदद

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काठमांडू, 30 अगस्त 2026: नेपाल में भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बाढ़ ने कई इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। हालात को देखते हुए नेपाल सरकार ने राहत, बचाव और पुनर्वास के प्रयासों को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न सरकारी एजेंसियों को पूरी क्षमता के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा है कि सरकार तब तक अपने प्रयास जारी रखेगी, जब तक बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक नागरिक सुरक्षित नहीं हो जाता और उसे दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता नहीं मिलती।

भोटे कोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ का असर विशेष रूप से रसुवा, नुवाकोट और धादिंग सहित निचले इलाकों में देखने को मिला है। कई स्थानों पर बाढ़ के कारण लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना पड़ा। खराब मौसम, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किल के बावजूद नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं।

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हर प्रभावित नागरिक की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने राहत अभियान को लेकर कहा कि सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी लोगों की जान की रक्षा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान को बीच में नहीं रोका जाएगा। सरकार का उद्देश्य केवल तत्काल राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करना भी है।

प्रधानमंत्री ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहने पर जोर दिया है। उनके मुताबिक संकट की इस घड़ी में सरकारी तंत्र को जमीन पर मौजूद लोगों की जरूरतों के अनुसार काम करना होगा।

7,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया

बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान चलाया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हवाई और जमीनी अभियानों के माध्यम से 7,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े 279 कर्मचारी भी शामिल हैं, जो विभिन्न स्थानों पर कठिन परिस्थितियों में फंस गए थे।

बचाव अभियान में नेपाल की सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के हजारों जवानों को लगाया गया है। लगभग 18,708 सुरक्षा कर्मी राहत एवं बचाव गतिविधियों में तैनात बताए गए हैं। इसके अलावा सैन्य और निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टर भी प्रभावित इलाकों तक पहुंचने तथा लोगों को निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

हेलीकॉप्टरों से लगातार राहत और बचाव

दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में कई जगहों पर सड़क और जमीनी संपर्क प्रभावित होने के कारण हवाई अभियान बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। जानकारी के मुताबिक 16 हेलीकॉप्टरों की मदद से अब तक सैकड़ों बचाव मिशन पूरे किए जा चुके हैं।

हेलीकॉप्टरों के जरिए ऐसे इलाकों में भी पहुंच बनाई जा रही है, जहां सामान्य वाहनों या पैदल दलों के लिए जाना मुश्किल है। इससे फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने, जरूरी सामान पहुंचाने और गंभीर रूप से घायल लोगों को चिकित्सा सहायता देने में मदद मिल रही है।

भारत और चीन के विशेषज्ञ भी सहायता में जुटे

नेपाल के राहत अभियान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी देखने को मिल रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारत और चीन के विशेषज्ञ प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर सहायता प्रदान कर रहे हैं। प्राकृतिक आपदा के दौरान पड़ोसी देशों की विशेषज्ञता और सहयोग नेपाल के राहत प्रयासों को अतिरिक्त मजबूती दे रहा है।

दुर्गम इलाकों में राहत कार्यों के लिए बेहतर समन्वय की आवश्यकता होती है। ऐसे में विभिन्न देशों के विशेषज्ञों की मौजूदगी से बचाव, चिकित्सा और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

मोबाइल अस्पतालों में घायलों का इलाज

बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी प्रशासन सक्रिय है। धुंचे और बटार समेत कुछ रणनीतिक स्थानों पर मोबाइल सैन्य अस्पतालों के जरिए घायलों का उपचार किया जा रहा है। काठमांडू से भेजी गई विशेषज्ञ चिकित्सा टीमें भी इन प्रयासों में सहयोग कर रही हैं।

प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही रक्त की उपलब्धता और जरूरतमंद मरीजों तक रक्त पहुंचाने की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘ब्लड इंफॉर्मेशन पोर्टल’ शुरू किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

राहतकर्मियों के लिए बढ़ाया गया प्रोत्साहन

खतरनाक परिस्थितियों में लगातार काम कर रहे सुरक्षा और राहतकर्मियों के मनोबल को बनाए रखना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री ने प्रभावित इलाकों में तैनात सुरक्षा बलों के लिए दैनिक स्नैक भत्ते और प्रोत्साहन राशि में तत्काल वृद्धि की घोषणा की है।

इस फैसले का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक काम कर रहे जवानों और राहतकर्मियों को अतिरिक्त सहायता देना है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य अक्सर चुनौतीपूर्ण होते हैं, इसलिए कर्मचारियों के लिए जरूरी सुविधाओं और प्रोत्साहनों को बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राहत शिविरों में हजारों विस्थापित लोग

बाढ़ के कारण अपना घर छोड़ने वाले लोगों के लिए राहत शिविर बनाए गए हैं। जानकारी के अनुसार रसुवा में तीन और नुवाकोट में 15 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा सार्वजनिक भवनों का इस्तेमाल अस्थायी आश्रय के रूप में किया जा रहा है।

इन राहत केंद्रों में लगभग 3,500 विस्थापित नागरिकों के रहने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन के सामने इन लोगों को भोजन, साफ पानी, स्वास्थ्य सुविधाएं, कपड़े और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती है।

सरकार की कोशिश है कि राहत शिविरों में रह रहे परिवारों को तत्काल आवश्यक सुविधाएं मिलें और स्थिति सामान्य होने के बाद उन्हें सुरक्षित तरीके से उनके क्षेत्रों में वापस भेजने या स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था की जा सके।

स्थानीय स्तर पर भी भेजी गई आर्थिक सहायता

राहत और पुनर्निर्माण के लिए स्थानीय प्रशासन को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 6.75 करोड़ नेपाली रुपये की राशि 15 स्थानीय स्तर की इकाइयों को सीधे वितरित की गई है। इस धनराशि का उपयोग प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों और स्थानीय स्तर पर राहत कार्यों को आगे बढ़ाने में किया जा सकता है।

स्थानीय प्रशासन की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसे प्रभावित परिवारों की वास्तविक जरूरतों और क्षेत्र की परिस्थितियों की सबसे बेहतर जानकारी होती है।

आगे पुनर्निर्माण पर रहेगा जोर

बाढ़ का पानी कम होने के बाद चुनौती समाप्त नहीं होगी। सड़क, पुल, बिजली, जलापूर्ति और अन्य बुनियादी सुविधाओं को हुए नुकसान का आकलन करना और उन्हें दोबारा तैयार करना भी जरूरी होगा। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने राहत कार्यों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे की बहाली को भी आगे बढ़ाने की बात कही है।

नेपाल जैसे पहाड़ी देश में प्राकृतिक आपदाओं के बाद पुनर्निर्माण एक जटिल प्रक्रिया होती है। इसलिए प्रशासन को तत्काल राहत के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने की तैयारी पर भी ध्यान देना होगा।

सरकार का अभियान जारी रखने का भरोसा

भोटे कोशी बाढ़ ने नेपाल के कई परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा किया है। ऐसे समय में राहत एवं बचाव अभियान की गति और प्रभावित नागरिकों तक सहायता पहुंचाना सबसे महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सरकार की ओर से भरोसा दिलाया है कि जब तक प्रभावित नागरिक सुरक्षित नहीं हो जाते और पुनर्वास की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए जाते, तब तक सरकारी मशीनरी सक्रिय रहेगी।

फिलहाल सुरक्षा बल, चिकित्सा दल, स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मिलकर राहत कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार के सामने विस्थापित परिवारों की सहायता, क्षतिग्रस्त ढांचे की मरम्मत और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बहाल करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

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