पुरानी पेंशन की मांग को लेकर अटेवा़ कानपुर देहात का लखनऊ कूच, 25 सितंबर को ईको गार्डन में जुटेंगे शिक्षक-कर्मचारी

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

कानपुर देहात, 24 सितंबर 2026। पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली और सरकारी विभागों में निजीकरण के विरोध से जुड़ी मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश में शिक्षक-कर्मचारी संगठनों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में अटेवा कानपुर देहात ने 25 सितंबर को लखनऊ के ईको गार्डन में प्रस्तावित महारैली में बड़ी भागीदारी की तैयारी की है। संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने जिले के विभिन्न विभागों के शिक्षक-कर्मचारियों से राजधानी पहुंचकर कार्यक्रम में शामिल होने का आह्वान किया है।

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अटेवा की ओर से आयोजित होने वाली इस प्रदेश स्तरीय रैली का मुख्य मुद्दा पुरानी पेंशन योजना की बहाली है। संगठन का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए पेंशन व्यवस्था महत्वपूर्ण है। कानपुर देहात में भी संगठन की ओर से लगातार संपर्क अभियान चलाकर कर्मचारियों को 25 सितंबर के कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है।

25 सितंबर को लखनऊ में प्रस्तावित महारैली

अटेवा पेंशन बचाओ मंच के प्रदेश स्तरीय आह्वान पर 25 सितंबर को लखनऊ के ईको गार्डन में महारैली प्रस्तावित है। पिछले दिनों कानपुर देहात के अकबरपुर स्थित अटेवा कार्यालय में रैली की तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े शिक्षक और कर्मचारी पदाधिकारियों ने भाग लिया तथा जिले से अधिक से अधिक लोगों को लखनऊ ले जाने की रणनीति पर चर्चा की।

संगठन के स्थानीय पदाधिकारियों ने बताया कि रैली में शामिल होने के लिए कर्मचारियों के बीच जनसंपर्क किया जा रहा है। अलग-अलग विभागों और कर्मचारी संगठनों से जुड़े लोगों को कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है। उनका उद्देश्य जिले से व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना है।

पुरानी पेंशन बहाली प्रमुख मांग

अटेवा की ओर से पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने की मांग लंबे समय से उठाई जाती रही है। संगठन का तर्क है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भविष्य में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए पेंशन व्यवस्था पर स्पष्ट और भरोसेमंद नीति जरूरी है।

कानपुर देहात के पदाधिकारियों ने भी इसी मुद्दे को आंदोलन का प्रमुख आधार बताया है। उनके अनुसार शिक्षक और कर्मचारी अपने सेवाकाल के बाद मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और इसी कारण पुरानी पेंशन की मांग को लेकर विभिन्न जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के कई जिलों से 25 सितंबर की लखनऊ रैली में भाग लेने की तैयारियों की खबरें सामने आई हैं। लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, हाथरस, प्रतापगढ़, बागपत और अन्य जिलों में भी संगठनात्मक बैठकें तथा जनसंपर्क अभियान चलाए गए हैं।

निजीकरण का मुद्दा भी आंदोलन में शामिल

पुरानी पेंशन के अलावा सरकारी विभागों में निजीकरण का विरोध भी इस अभियान से जुड़े प्रमुख मुद्दों में शामिल है। अटेवा और सहयोगी संगठनों से जुड़े पदाधिकारी सरकारी सेवाओं में कर्मचारियों की भूमिका, रोजगार सुरक्षा और सेवा शर्तों से जुड़े सवालों को भी सामने रखते रहे हैं।

लखनऊ में होने वाली प्रस्तावित रैली को लेकर विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से समर्थन की घोषणाएं भी सामने आई हैं। प्रतापगढ़ में हुई एक बैठक में कई कर्मचारी संगठनों ने महारैली का समर्थन करने की बात कही थी। वहीं दूसरे जिलों में भी शिक्षक-कर्मचारियों से राजधानी पहुंचने की अपील की गई है।

कुछ स्थानों पर रैली से जुड़े कार्यक्रमों में शिक्षक-कर्मचारियों के लिए टीईटी की अनिवार्यता का मुद्दा भी उठाया गया है। हालांकि अलग-अलग जिलों में स्थानीय संगठनों द्वारा उठाई गई मांगों का दायरा अलग हो सकता है।

कानपुर देहात में तैयारियों ने पकड़ा जोर

कानपुर देहात में अटेवा की बैठक के दौरान पदाधिकारियों ने रैली में अधिक से अधिक शिक्षक-कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। संगठन से जुड़े जिला पदाधिकारियों के अनुसार, जिले के विभिन्न हिस्सों में संपर्क कर कर्मचारियों को लखनऊ कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है।

बैठक में यह भी कहा गया कि आंदोलन को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के बीच समन्वय आवश्यक है। पदाधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में साथियों से संपर्क कर उन्हें रैली की जानकारी देने की जिम्मेदारी संभाली है।

कानपुर क्षेत्र में भी 25 सितंबर के कार्यक्रम को लेकर संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। कानपुर में अटेवा की एक बैठक में शांतिपूर्ण रैली में भाग लेने और अधिक से अधिक कर्मचारियों को लखनऊ पहुंचाने की अपील की गई थी। स्थानीय पदाधिकारियों ने विभिन्न विभागों के कर्मचारियों से कार्यक्रम में भागीदारी का आग्रह किया।

प्रदेशभर में चल रहा संपर्क अभियान

25 सितंबर की रैली से पहले उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बैठकों और जागरूकता अभियानों का सिलसिला दिखाई दे रहा है। लखीमपुर में पदाधिकारियों ने ब्लॉक और तहसील स्तर तक संपर्क कर भागीदारी बढ़ाने की रणनीति बनाई। गोरखपुर में भी विभिन्न विभागीय संगठनों के पदाधिकारियों की बैठक हुई, जबकि बागपत में शिक्षकों से संपर्क कर लखनऊ पहुंचने का आह्वान किया गया।

प्रयागराज में भी कर्मचारियों ने जागरूकता रैली निकालकर पुरानी पेंशन, निजीकरण और अन्य मांगों को लेकर 25 सितंबर के कार्यक्रम के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास किया।

इससे स्पष्ट है कि लखनऊ का प्रस्तावित कार्यक्रम केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न जिलों के कर्मचारी संगठनों ने अपने-अपने स्तर पर इसकी तैयारियां की हैं।

संगठनों के बीच एकजुटता पर जोर

कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों की मांगों में कई समान मुद्दे हैं। ऐसे में सामूहिक रूप से अपनी बात सरकार और संबंधित स्तरों तक पहुंचाने के लिए बड़े कार्यक्रमों को माध्यम बनाया जा रहा है।

कानपुर देहात के अटेवा पदाधिकारियों ने भी शिक्षक-कर्मचारियों से एकजुट होकर लखनऊ पहुंचने की अपील की है। संगठन की बैठकों में लगातार यह बात सामने रखी जा रही है कि मांगों को लेकर आंदोलन को शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से आगे बढ़ाया जाए।

सरकार के सामने मांग रखने की तैयारी

25 सितंबर की महारैली के माध्यम से शिक्षक और कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को सरकार के सामने रखने की तैयारी में हैं। पुरानी पेंशन योजना की बहाली इस अभियान का केंद्रीय मुद्दा है, जबकि निजीकरण और कुछ अन्य सेवा संबंधी विषय भी विभिन्न संगठनों की ओर से उठाए जा रहे हैं।

अभी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 25 सितंबर को लखनऊ के ईको गार्डन में कार्यक्रम में कितनी भागीदारी होती है और उसके बाद कर्मचारी संगठनों की रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल कानपुर देहात सहित प्रदेश के कई जिलों में रैली को लेकर तैयारियां जारी हैं।

कुल मिलाकर, पुरानी पेंशन की मांग को लेकर अटेवा कानपुर देहात ने 25 सितंबर के लखनऊ कार्यक्रम के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले के शिक्षक-कर्मचारियों से राजधानी पहुंचने की अपील की जा रही है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे जनसंपर्क और बैठकों के बीच ईको गार्डन में प्रस्तावित महारैली कर्मचारी संगठनों के लिए अपनी मांगों को सामूहिक रूप से सामने रखने का एक प्रमुख मंच बनने जा रही है।

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