UPI के 0.4 प्रतिशत MDR के विरोध में प्रतापगढ़ कांग्रेस का प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन

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अंशुमान द्विवेदी प्रतापगढ़

रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़

प्रतापगढ़, 18 सितंबर 2026। यूपीआई के जरिए होने वाले चुनिंदा बड़े व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेन्ट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर राजनीतिक विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में प्रतापगढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की और छोटे तथा मध्यम व्यापारियों पर डिजिटल भुगतान के माध्यम से किसी अतिरिक्त आर्थिक दबाव को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस नेताओं ने सरकार से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की।

पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट पहुंचे कार्यकर्ता

कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मार्च आंबेडकर चौराहे स्थित पार्टी कार्यालय से शुरू हुआ। कार्यकर्ता पैदल कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने यूपीआई लेनदेन से संबंधित शुल्क व्यवस्था के खिलाफ अपनी बात रखी और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने देश में कारोबार और आम लोगों के भुगतान के तरीके को काफी बदल दिया है। ऐसे में व्यापारियों से बड़े यूपीआई लेनदेन पर MDR लिया जाना उनके अनुसार अतिरिक्त वित्तीय भार की दिशा में कदम है। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की।

यहां यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि मौजूदा सरकारी जानकारी के अनुसार 0.4 प्रतिशत राशि MDR है, जिसे सरकार स्वयं टैक्स के रूप में नहीं वसूलती। वित्त मंत्रालय के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के निर्दिष्ट person-to-merchant (P2M) लेनदेन पर MDR लागू होगा, जबकि person-to-person (P2P) यूपीआई भुगतान मुफ्त रहेगा।

कांग्रेस ने उठाया व्यापारियों पर संभावित असर का मुद्दा

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छोटे दुकानदार और मध्यम वर्ग के व्यापारी पहले ही कई तरह की आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। व्यापार संचालन की लागत, बाजार में प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की बदलती भुगतान आदतों के बीच डिजिटल भुगतान पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

जिला सचिव विजय प्रताप त्रिपाठी ने कहा कि छोटे व्यापारियों की आय और कारोबार की प्रकृति को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जानी चाहिए। उनके अनुसार यदि डिजिटल भुगतान से जुड़ी लागत बढ़ती है तो इसका असर व्यापार के लाभ और संचालन पर पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, मौजूदा ढांचे में सरकार ने कहा है कि MDR ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाना है। वित्त मंत्रालय के अनुसार ग्राहकों के लिए यूपीआई भुगतान मुफ्त रहेगा और बैंकों को व्यापारियों द्वारा MDR की लागत ग्राहकों पर डालने से रोकने के लिए निर्देश दिए गए हैं।

15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था

राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की नई व्यवस्था के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा merchant UPI transactions पर नया MDR ढांचा लागू होगा। सामान्य श्रेणी में 2,000 रुपये से अधिक के P2M लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR निर्धारित किया गया है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।

इसके साथ ही कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे निर्दिष्ट क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर पांच रुपये का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। पूंजी बाजार से संबंधित कुछ भुगतानों के लिए 0.02 प्रतिशत MDR की व्यवस्था बताई गई है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-MDR व्यवस्था जारी रहेगी और 2,000 रुपये तक के व्यापारी लेनदेन पर शुल्क नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक लगभग 96 प्रतिशत P2M यूपीआई लेनदेन नई व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

कांग्रेस ने सांसदों को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी दी सफाई

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी ने उस राजनीतिक बहस का भी उल्लेख किया जिसमें यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस के सांसद इस प्रक्रिया से जुड़ी समिति में शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के सांसदों को इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर के लिए कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया और पार्टी के किसी सांसद ने इस व्यवस्था के समर्थन में हस्ताक्षर नहीं किए।

यह बयान कांग्रेस की ओर से प्रदर्शन के दौरान रखा गया राजनीतिक पक्ष है। ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित समिति के आधिकारिक दस्तावेज और संसदीय रिकॉर्ड देखना आवश्यक होगा।

UPI शुल्क और टैक्स के बीच अंतर

यूपीआई से संबंधित इस पूरे विवाद में MDR और टैक्स के बीच अंतर समझना भी जरूरी है। वित्त मंत्रालय ने 15 सितंबर 2026 को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि MDR सरकार या NPCI द्वारा टैक्स के रूप में वसूली जाने वाली राशि नहीं है। यह भुगतान प्रणाली से जुड़े बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई एप्लिकेशन प्रदाताओं सहित विभिन्न प्रतिभागियों के बीच वितरित की जाती है।

इससे पहले अप्रैल 2025 में वित्त मंत्रालय ने उन दावों को भी खारिज किया था जिनमें 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर GST लगाए जाने की बात कही गई थी। उस समय मंत्रालय ने कहा था कि ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के सामने नहीं था।

अब सितंबर 2026 में 0.4 प्रतिशत MDR की नई व्यवस्था की आधिकारिक घोषणा के बाद मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इसे लेकर व्यापारियों की चिंताओं को सामने रखा है, जबकि सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य यूपीआई के पूरे भुगतान ढांचे को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है।

बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता रहे मौजूद

प्रतापगढ़ में हुए प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें वरिष्ठ कांग्रेस नेता दयानंद जायसवाल, वेदांत तिवारी, नगर अध्यक्ष मोहम्मद इश्तियाक, विजय शंकर त्रिपाठी, आलोक सिंह, रियाज सुल्तान, संजय कुमार पांडेय, रवि भूषण सिन्हा, मासूम हैदर, भवानी शंकर दुबे, सुरेश कुमार सरोज, सलमान खान, मीरा देवी गौतम, रविंद्र मिश्र, मोनू मिश्र, अभय किशोर त्रिपाठी, डॉ. सर्वेश शुक्ला, अंजनी कुमार, रमाशंकर मिश्रा, शैलेश पांडे, जीवेश शुक्ला, अरविंद कुमार, मो. दिलशाद, मो. सब्बीर और तैयब सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी व्यापारियों, किसानों, मजदूरों, छोटे दुकानदारों और आम लोगों से जुड़े आर्थिक मुद्दों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से व्यापारिक संगठनों की चिंताओं पर विचार करने और यूपीआई भुगतान व्यवस्था से जुड़े नए शुल्क के प्रभाव का आकलन करने की मांग की।

आगे भी जारी रह सकता है राजनीतिक विरोध

UPI भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। नई MDR व्यवस्था को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं। सरकार इसे भुगतान तंत्र की लागत और दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़कर देख रही है, जबकि कांग्रेस और कुछ व्यापारी संगठन अतिरिक्त लागत को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

प्रतापगढ़ में कांग्रेस का प्रदर्शन इसी व्यापक बहस का स्थानीय रूप रहा। ज्ञापन के जरिए पार्टी ने राष्ट्रपति के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए केंद्र सरकार से व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की है। आने वाले समय में व्यापारिक संगठनों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर यह मुद्दा और चर्चा में आ सकता है।

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा 2,000 रुपये से अधिक के P2M यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होना है, जबकि आम P2P भुगतान और 2,000 रुपये तक के अधिकांश व्यापारी लेनदेन मुफ्त बने रहेंगे।

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