प्रयागराज में TGT-PGT अभ्यर्थियों के प्रदर्शन पर देर रात पुलिस कार्रवाई, भर्ती नियमों को लेकर छात्रों में नाराजगी
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में TGT (Trained Graduate Teacher) और PGT (Post Graduate Teacher) भर्ती परीक्षाओं से जुड़े नियमों में बदलाव का विरोध कर रहे अभ्यर्थियों के प्रदर्शन ने देर रात नया मोड़ ले लिया। शिक्षक भर्ती की पुरानी व्यवस्था लागू करने और नई पात्रता शर्तों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों को पुलिस ने रात करीब एक बजे प्रदर्शन स्थल से हटा दिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल के साथ एंबुलेंस भी मौके पर पहुंची थी।
प्रदर्शनकारी छात्र कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। बताया गया कि पत्थर गिरजाघर के पास छात्रों ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बदलाव के विरोध में धरना शुरू किया था। आंदोलन में शामिल कुछ अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। छात्रों का कहना है कि भर्ती नियमों में अचानक किए गए बदलाव से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के सामने अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

शिक्षक भर्ती के नियमों में बदलाव बना विवाद की वजह
TGT और PGT भर्ती से संबंधित पात्रता एवं चयन प्रक्रिया में बदलाव को लेकर अभ्यर्थियों में असंतोष देखने को मिल रहा है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का मुख्य जोर पुरानी भर्ती व्यवस्था को लागू करने पर है। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था में कुछ पदों के लिए B.Ed जैसी अतिरिक्त योग्यता को अनिवार्य किए जाने से ऐसे उम्मीदवारों की स्थिति प्रभावित हो सकती है, जिन्होंने पहले से लागू नियमों के आधार पर अपनी तैयारी की थी।
अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि शिक्षक बनने की तैयारी में उन्होंने काफी समय और संसाधन लगाए हैं। यदि परीक्षा या भर्ती की पात्रता में अचानक परिवर्तन किया जाता है तो पहले से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने TET और CTET जैसी पात्रता संबंधी शर्तों को लेकर भी सवाल उठाए। छात्रों की मांग है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का बदलाव स्पष्ट नियमों, पर्याप्त सूचना और अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।
शिक्षक दिवस से चल रहा था आंदोलन
वीडियो रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों का आंदोलन शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर से पत्थर गिरजाघर क्षेत्र में चल रहा था। आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर धरना देने के साथ भूख हड़ताल का रास्ता भी अपनाया। उनका कहना था कि जब तक भर्ती प्रक्रिया को लेकर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
कई अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती उनके लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों का महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही थी। ऐसे में नियमों में बदलाव की खबर सामने आने के बाद छात्रों ने इसे अपने भविष्य से जुड़ा विषय बताते हुए विरोध शुरू किया।
देर रात भारी पुलिस बल पहुंचा
प्रदर्शन स्थल पर रात करीब एक बजे पुलिस की मौजूदगी बढ़ गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिसकर्मियों के साथ एंबुलेंस भी मौके पर पहुंची। प्रशासन की ओर से भीड़ और सार्वजनिक स्थान पर सभा से संबंधित नियमों का हवाला दिया गया।
पुलिस ने धारा 163 BNSS के तहत लागू प्रतिबंधों का उल्लेख करते हुए प्रदर्शनकारियों को स्थल खाली करने के लिए कहा। इस प्रावधान के तहत प्रशासन परिस्थितियों के अनुसार सार्वजनिक स्थान पर लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा सकता है।
रात के समय हुई इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों को वहां से हटाया गया। पुलिस की कार्रवाई के कारण आंदोलन का तत्काल स्वरूप बदल गया, लेकिन छात्रों की नाराजगी खत्म नहीं हुई।
छात्रों ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन अपने रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दे को लेकर था। छात्रों का दावा है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे थे। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में बदलाव का असर सीधे उन उम्मीदवारों पर पड़ेगा जिन्होंने पहले से उपलब्ध नियमों के आधार पर परीक्षा की तैयारी की है।
अभ्यर्थियों ने यह सवाल भी उठाया कि यदि भर्ती प्रक्रिया में नई शर्तें जोड़ी जाती हैं तो उम्मीदवारों को पर्याप्त समय और स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, पात्रता मानदंड में बदलाव से तैयारी कर चुके उम्मीदवारों के लिए समान अवसर का प्रश्न खड़ा होता है।
छात्रों की प्रमुख मांगों में पुरानी भर्ती व्यवस्था को बहाल करना और भर्ती नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट करना शामिल है। वे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन
इस प्रदर्शन को कुछ राजनीतिक और छात्र संगठनों का समर्थन भी मिला। रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह तथा छात्र संगठन AISA से जुड़ी नेहा बोरा के समर्थन का उल्लेख किया गया है।
राजनीतिक समर्थन मिलने के बाद शिक्षक भर्ती का यह मुद्दा केवल अभ्यर्थियों तक सीमित न रहकर व्यापक सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया। विपक्षी और छात्र संगठनों की ओर से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा युवाओं के हितों से जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, किसी भी भर्ती प्रक्रिया में अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी विभाग और सक्षम प्रशासनिक संस्थाओं के नियमों के अनुसार ही होता है। इसलिए आगे की स्थिति आधिकारिक आदेशों और भर्ती से संबंधित अधिसूचनाओं पर निर्भर करेगी।
B.Ed और TET-CTET को लेकर क्यों है असमंजस?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की चिंता का एक बड़ा हिस्सा अलग-अलग शैक्षणिक एवं पात्रता मानदंडों से जुड़ा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि किसी पद के लिए पहले से अलग योग्यता व्यवस्था थी और बाद में अतिरिक्त शर्तें जोड़ दी जाती हैं, तो उम्मीदवारों की पात्रता प्रभावित हो सकती है।
B.Ed, TET और CTET जैसी योग्यताओं का शिक्षक भर्ती में अपना महत्व है, लेकिन अभ्यर्थियों का तर्क है कि इनका इस्तेमाल किस पद और किस भर्ती चक्र में किस तरह किया जाएगा, यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए।
यही वजह है कि छात्र सरकार और भर्ती से जुड़े अधिकारियों से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अस्पष्टता दूर होने से अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी और भविष्य की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
आंदोलन हटाया गया, लेकिन मांगें बरकरार
पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल से छात्रों को हटा दिया गया, लेकिन आंदोलन से जुड़े अभ्यर्थियों ने अपने मुद्दे से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद पैदा करना नहीं बल्कि भर्ती प्रक्रिया से संबंधित अपनी चिंताओं को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाना है।
अभ्यर्थी चाहते हैं कि भर्ती नियमों में किसी भी परिवर्तन को लेकर सरकार स्पष्ट स्थिति सामने रखे। साथ ही वे चाहते हैं कि पहले से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के हितों को ध्यान में रखा जाए और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
अब आगे क्या होगा?
प्रयागराज में TGT-PGT भर्ती को लेकर पैदा हुआ विवाद आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण हो सकता है। एक तरफ प्रशासन सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमों का पालन कराने पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में बदलाव को लेकर अपने सवालों के जवाब चाहते हैं।
मामले का समाधान तभी संभव होगा जब भर्ती नियमों, पात्रता और चयन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने आए। छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद इस विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल देर रात की पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल खाली करा दिया गया है, लेकिन TGT-PGT अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें अभी भी बनी हुई हैं। छात्र पुरानी भर्ती व्यवस्था, स्पष्ट नियम और पारदर्शी चयन प्रक्रिया की मांग पर कायम हैं। आने वाले समय में सरकार और संबंधित भर्ती संस्थाओं की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर अभ्यर्थियों के साथ-साथ शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं की नजर रहेगी।