तालाबीरा-II और III कोयला खदानों ने बनाया नया रिकॉर्ड, 2025-26 में 19.14 मिलियन टन उत्पादन

ओडिशा की तालाबीरा-II और III ओपन कास्ट कोयला खदानों ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक वार्षिक उत्पादन दर्ज किया है। रिकॉर्ड उत्पादन से घरेलू कोयला उपलब्धता बढ़ाने, बिजली क्षेत्र की जरूरतें पूरी करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में इन खदानों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
ओडिशा देश के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में शामिल है और यहां संचालित बड़ी कोयला खदानें भारत की ऊर्जा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इसी क्रम में तालाबीरा-II और III ओपन कास्ट कोयला खदानों ने वित्त वर्ष 2025-26 में उत्पादन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड कायम किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन दोनों खदानों से पूरे वित्त वर्ष में 19.14 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 11.28 प्रतिशत अधिक है।
यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू कोयला उत्पादन और आपूर्ति क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। कोयला आज भी देश के बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण ईंधन है। इसलिए घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ना बिजली संयंत्रों को ईंधन की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जाता है।
उत्पादन में 11.28 प्रतिशत की बढ़ोतरी
तालाबीरा-II और III खदानों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 19.14 मिलियन टन वार्षिक कोयला उत्पादन दर्ज किया। यह इन खदानों का अब तक का सबसे ऊंचा वार्षिक उत्पादन बताया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में उत्पादन में 11.28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उत्पादन में यह बढ़ोतरी केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि इससे घरेलू कोयला आपूर्ति को मजबूती मिलने का संकेत भी मिलता है। भारत में बिजली की मांग, औद्योगिक गतिविधियों और आर्थिक विकास के साथ ऊर्जा की आवश्यकता लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में देश के भीतर कोयले का उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिशों को भी बल मिलता है।
तालाबीरा-II और III की उत्पादन उपलब्धि इस बात को रेखांकित करती है कि देश में मौजूद कोयला संसाधनों का प्रभावी तरीके से उपयोग ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
17.69 मिलियन टन कोयले की रिकॉर्ड आपूर्ति
सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि इन खदानों से कोयले की आपूर्ति के मामले में भी वित्त वर्ष 2025-26 में उल्लेखनीय प्रदर्शन हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 17.69 मिलियन टन कोयले की रिकॉर्ड आपूर्ति की गई।
उत्पादित कोयले को विभिन्न उपभोक्ता क्षेत्रों तक पहुंचाना ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। खदान से कोयला निकलने के बाद उसकी समय पर ढुलाई और संबंधित क्षेत्रों तक आपूर्ति यह सुनिश्चित करती है कि बिजली संयंत्रों और अन्य औद्योगिक इकाइयों को आवश्यक ईंधन मिलता रहे।
इस लिहाज से 17.69 मिलियन टन की आपूर्ति का आंकड़ा तालाबीरा-II और III की उत्पादन क्षमता के साथ-साथ उनकी आपूर्ति व्यवस्था की भूमिका को भी सामने लाता है।
बिजली क्षेत्र को 10.72 मिलियन टन कोयला
रिकॉर्ड आपूर्ति में बिजली क्षेत्र की हिस्सेदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुल आपूर्ति में से लगभग 10.72 मिलियन टन कोयला बिजली क्षेत्र को दिया गया।
भारत की बिजली व्यवस्था में कोयले की बड़ी भूमिका है। कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र देश के बिजली उत्पादन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संभालते हैं। ऐसे में बिजली क्षेत्र के लिए कोयले की नियमित उपलब्धता बिजली उत्पादन की निरंतरता से जुड़ी हुई है।
तालाबीरा-II और III से बिजली क्षेत्र को हुई बड़ी मात्रा में आपूर्ति इस बात को दर्शाती है कि इन खदानों का उत्पादन देश की ऊर्जा व्यवस्था के लिए सीधे उपयोगी है। पर्याप्त कोयला उपलब्ध होने से बिजली संयंत्रों के ईंधन प्रबंधन में मदद मिल सकती है और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता को समर्थन मिल सकता है।
गैर-विनियमित क्षेत्र को भी मिली आपूर्ति
बिजली क्षेत्र के अलावा तालाबीरा-II और III से 6.97 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति गैर-विनियमित क्षेत्र को की गई। यानी खदानों से निकलने वाला कोयला केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य औद्योगिक जरूरतों के लिए भी उपलब्ध कराया गया।
गैर-विनियमित क्षेत्र में कोयले की मांग रखने वाले विभिन्न उद्योग शामिल हो सकते हैं। ऐसे क्षेत्रों के लिए घरेलू कोयला आपूर्ति औद्योगिक गतिविधियों को बनाए रखने में उपयोगी होती है। उत्पादन और आपूर्ति में वृद्धि से उद्योगों को ईंधन की उपलब्धता का समर्थन मिल सकता है।
इस तरह 10.72 मिलियन टन बिजली क्षेत्र और 6.97 मिलियन टन गैर-विनियमित क्षेत्र को आपूर्ति का आंकड़ा बताता है कि इन खदानों का योगदान ऊर्जा व्यवस्था के कई हिस्सों तक पहुंच रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। बिजली, परिवहन, उद्योग और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए लगातार ऊर्जा उपलब्ध होना जरूरी है। कोयला भारत के ऊर्जा मिश्रण में लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ने से देश को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है। खासकर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति से जुड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं, तब घरेलू संसाधनों की उपलब्धता रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो जाती है।
तालाबीरा-II और III का रिकॉर्ड उत्पादन इसी व्यापक लक्ष्य से जुड़ा हुआ है। इन खदानों से अधिक उत्पादन और बड़ी मात्रा में आपूर्ति होने से घरेलू कोयला आधारित ऊर्जा व्यवस्था को मजबूती मिलती है।
आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में कदम
भारत पिछले कुछ वर्षों से घरेलू ऊर्जा संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और आयात निर्भरता को कम करने पर जोर देता रहा है। कोयला उत्पादन में बढ़ोतरी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
तालाबीरा-II और III की उपलब्धि को इसी संदर्भ में देखा जा सकता है। 19.14 मिलियन टन का रिकॉर्ड उत्पादन और 17.69 मिलियन टन की आपूर्ति यह बताती है कि खदानों की उत्पादन क्षमता का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
हालांकि, ऊर्जा क्षेत्र के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, भूमि प्रबंधन, स्थानीय समुदायों के हित और खनन क्षेत्रों के पुनर्वास जैसे पहलुओं पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। भारत के ऊर्जा परिवर्तन के दौर में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की जरूरत और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है।
आगे भी बढ़ सकती है भूमिका
तालाबीरा-II और III खदानों का रिकॉर्ड प्रदर्शन आने वाले समय में घरेलू कोयला उत्पादन को लेकर सकारात्मक संकेत देता है। यदि उत्पादन, परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था में निरंतर सुधार होता है, तो ऐसी खदानें देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में और बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 का प्रदर्शन यह भी दिखाता है कि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कोयले को उपयोगकर्ता क्षेत्रों तक पहुंचाना उतना ही आवश्यक है। बिजली क्षेत्र को 10.72 मिलियन टन और गैर-विनियमित क्षेत्र को 6.97 मिलियन टन की आपूर्ति इस व्यापक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा है।
निष्कर्ष
ओडिशा की तालाबीरा-II और III ओपन कास्ट कोयला खदानों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 19.14 मिलियन टन रिकॉर्ड कोयला उत्पादन करके नया स्तर स्थापित किया है। पिछले वर्ष की तुलना में 11.28 प्रतिशत की वृद्धि और 17.69 मिलियन टन की रिकॉर्ड आपूर्ति इन खदानों के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।
बिजली क्षेत्र को 10.72 मिलियन टन तथा गैर-विनियमित क्षेत्र को 6.97 मिलियन टन कोयला मिलने से घरेलू ऊर्जा और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को समर्थन मिला है। आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता के बेहतर इस्तेमाल, सुचारु परिवहन और जिम्मेदार खनन के साथ तालाबीरा-II और III देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।