पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान बिक्री का नया दौर, किसानों के लिए खरीद कार्यक्रम से जुड़ी अहम जानकारी
12 अक्टूबर 2026 | उत्तर प्रदेश | कृषि समाचार
खरीफ की फसल तैयार होने के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के धान उत्पादकों के लिए उपज बेचने का समय आ गया है। वर्ष 2026-27 के विपणन सत्र में निर्धारित पश्चिमी क्षेत्रों के लिए 12 अक्टूबर से सरकारी खरीद शुरू करने का कार्यक्रम तय किया गया है। अपनी फसल सरकारी व्यवस्था के अंतर्गत बेचने की योजना बना रहे किसानों को खरीद से संबंधित निर्देशों को ध्यानपूर्वक समझना चाहिए।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस सत्र के दौरान 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 4,500 खरीद केंद्रों की व्यवस्था बताई गई है। सामान्य धान की सरकारी खरीद के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल है। इन व्यवस्थाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को स्थानीय स्तर पर लागू पात्रता और प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करनी होगी।
किसानों के सामने अब बिक्री की तैयारी की चुनौती
फसल उगाने के बाद उसकी बिक्री तक पहुंचने में कई तरह की तैयारियां करनी पड़ती हैं। किसानों को उपज की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ यह भी देखना होता है कि बिक्री के लिए आवश्यक कागजात उपलब्ध हैं या नहीं।
सरकारी केंद्र पर जाने से पहले किसान संबंधित अधिकारियों से संपर्क करके खरीद की स्थिति की जानकारी ले सकते हैं। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलेगी कि किस स्थान पर धान जमा करना है और किन औपचारिकताओं को पूरा करना आवश्यक है।
खरीद की निर्धारित तारीख क्षेत्र के अनुसार लागू हो सकती है। इस कारण किसानों को अपने जिले से संबंधित सरकारी सूचना की पुष्टि करनी चाहिए, न कि केवल सामान्य समाचार के आधार पर बिक्री के लिए निकलना चाहिए।
सरकारी खरीद के लिए निर्धारित लक्ष्य
चालू विपणन सत्र में प्रदेश के लिए 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य बताया गया है। खरीद कार्य को व्यवस्थित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में केंद्रों की व्यवस्था की गई है।
सरकारी एजेंसियों को उपज प्राप्त करने, निर्धारित मानकों के अनुरूप उसकी जांच करने और बिक्री का विवरण दर्ज करने जैसी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। किसानों के लिए भी जरूरी है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और बिक्री से संबंधित जानकारी सही उपलब्ध कराएं।
राज्य का खरीद लक्ष्य किसी एक किसान की उपज की निश्चित मात्रा नहीं दर्शाता। वास्तविक खरीद संबंधित नियमों, पात्रता और गुणवत्ता की शर्तों के अनुसार की जाएगी।
घोषित दर के आधार पर उपज की कीमत
सामान्य धान के लिए 2,441 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य बताए जाने से किसानों को संभावित बिक्री राशि का अनुमान लगाने में सहायता मिल सकती है।
यदि किसी किसान की 10 क्विंटल उपज इस दर पर स्वीकार होती है, तो उसका सकल मूल्य 24,410 रुपये बनेगा। इसी प्रकार 35 क्विंटल धान का सकल मूल्य 85,435 रुपये होगा।
ये उदाहरण केवल घोषित दर पर आधारित गणनाएं हैं। वास्तविक भुगतान खरीदी गई मात्रा और लागू सरकारी नियमों के अनुसार तय होगा। किसानों को अपनी उपज की श्रेणी के बारे में भी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
खरीद केंद्र जाने से पहले किन बातों पर ध्यान दें?
किसानों को अपनी पंजीकरण संबंधी जानकारी और बैंक खाते के विवरण की जांच कर लेनी चाहिए। यदि दस्तावेजों में कोई गलती हो, तो खरीद प्रक्रिया से पहले संबंधित विभाग से सुधार का तरीका पूछना उपयोगी रहेगा।
धान की सफाई और उचित सुखाई भी जरूरी है। उपज में नमी तथा अन्य गुणवत्ता संबंधी मानकों को लेकर सरकारी निर्देश लागू हो सकते हैं। इसलिए किसान धान को बिक्री के लिए तैयार करते समय निर्धारित शर्तों की जानकारी अवश्य लें।
इसके साथ ही केंद्र तक पहुंचने की व्यवस्था, वहां खरीद का समय और आवश्यक दस्तावेजों की सूची पहले से पता कर लेना बेहतर रहेगा।
बिक्री के प्रमाण को संभालकर रखें
धान स्वीकार किए जाने के बाद खरीद से संबंधित रसीद और उपलब्ध रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए। भविष्य में भुगतान की जानकारी लेने या किसी विवरण में अंतर मिलने पर ये दस्तावेज उपयोगी हो सकते हैं।
बैंक खाते का सही विवरण उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। यदि भुगतान में समस्या सामने आए, तो किसान अपने बिक्री रिकॉर्ड के साथ संबंधित विभाग या खरीद एजेंसी से संपर्क कर सकते हैं।
खरीद कार्यक्रम को लेकर किसानों के लिए जरूरी संदेश
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निर्धारित खरीद कार्यक्रम के तहत किसानों को अपनी फसल बेचने से पहले स्थानीय निर्देशों की जानकारी लेनी चाहिए। राज्य का कुल खरीद लक्ष्य, केंद्रों की संख्या और समर्थन मूल्य महत्वपूर्ण जानकारियां हैं, लेकिन व्यक्तिगत बिक्री की प्रक्रिया संबंधित नियमों के आधार पर ही पूरी होगी।
किसानों के हित में जरूरी है कि वे आधिकारिक सूचना के आधार पर तैयारी करें और उपज की गुणवत्ता तथा दस्तावेजों पर विशेष ध्यान दें। खरीद कार्यक्रम, तारीख और समर्थन मूल्य से जुड़े आंकड़ों को प्रकाशित करने से पहले उत्तर प्रदेश के संबंधित सरकारी विभाग से सत्यापित किया जाना चाहिए।