अयोध्या कंदैला दोहरे हत्याकांड: मां-बेटे की मौत से गांव में तनाव, जमीन विवाद की जांच तेज
अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में पूराकलंदर थाना क्षेत्र के कंदैला गांव में 25 अगस्त 2026 को हुई हिंसक वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। इस घटना में रामलगन मौर्य की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनके साथ मौजूद उनकी मां पार्वती देवी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। कई दिनों तक अस्पताल में उपचार चलने के बाद पार्वती देवी ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद यह मामला मां-बेटे की मौत से जुड़े दोहरे हत्याकांड के रूप में सामने आया है। पुलिस ने मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और लगातार दबिश देकर गिरफ्तारियां कीं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी विजयभान सिंह को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

बाइक से घर लौटते समय हुआ हमला
रिपोर्टों के मुताबिक 25 अगस्त की शाम रामलगन मौर्य अपनी मां पार्वती देवी के साथ बाइक से घर लौट रहे थे। दोनों कंदैला गांव के आसपास पहुंचे ही थे कि उन पर हमला किया गया। पुलिस और स्थानीय रिपोर्टों में बताया गया है कि हमलावरों ने पहले विस्फोटक फेंके और इसके बाद गोलीबारी की। हमले में रामलगन गंभीर रूप से घायल हुए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पार्वती देवी भी हमले में घायल हुईं।
घटना के बाद आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल और विवादित भूमि से जुड़ी जानकारी जुटाई।
इलाज के दौरान पार्वती देवी की मौत
हमले में घायल पार्वती देवी को पहले स्थानीय स्तर पर उपचार दिया गया। उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें लखनऊ स्थित केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। वहां कई दिनों तक उनका उपचार चला, लेकिन 14 सितंबर 2026 को उनकी मौत हो गई। इस तरह 25 अगस्त की घटना में पहले बेटे रामलगन मौर्य और बाद में उनकी मां पार्वती देवी की भी जान चली गई।
पार्वती देवी की मौत की खबर सामने आने के बाद मामले को लेकर परिजनों और समर्थकों में नाराजगी बढ़ी। लखनऊ में अस्पताल की मोर्चरी के बाहर भी विरोध की स्थिति बनी और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग उठाई गई।
जमीन और रास्ते के पुराने विवाद का मामला
पुलिस की जांच और उपलब्ध रिपोर्टों में इस घटना की पृष्ठभूमि में जमीन तथा रास्ते से जुड़ा पुराना विवाद बताया गया है। परिजनों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच करीब तीन बिस्वा जमीन और रास्ते को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद को लेकर मार्च 2026 में भी दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी।
रिपोर्टों के अनुसार विवादित जमीन की स्थिति को लेकर राजस्व अधिकारियों ने भी जानकारी जुटाई थी। बताया गया कि जमीन के बीच से रास्ता निकलता है और इसी रास्ते को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। मामले से संबंधित दीवानी मुकदमे का भी उल्लेख सामने आया है।
हालांकि हत्या के पीछे जमीन विवाद को प्रमुख वजह बताया जा रहा है, लेकिन अंतिम रूप से घटना की पूरी पृष्ठभूमि और प्रत्येक आरोपी की भूमिका पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही स्पष्ट होगी।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
घटना के बाद पुलिस ने नामजद आरोपियों की तलाश शुरू की। शुरुआती जांच में मुख्य आरोपी राजमणि सिंह समेत कई लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। पुलिस की टीमों ने सर्विलांस और अन्य माध्यमों से आरोपियों का पता लगाने का प्रयास किया। बाद की कार्रवाई में गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ती गई।
17 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी विजयभान सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके खिलाफ इनाम घोषित किया था और लगातार उसकी तलाश की जा रही थी। 18 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट में भी उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की गई है।
इससे पहले पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में राजमणि सिंह, दीपक प्रजापति और मनीष शर्मा के नाम भी सामने आए थे। पुलिस ने वारदात की साजिश और हमले से जुड़े पहलुओं की जांच के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया था।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
मामले में शुरुआत में आठ नामजद आरोपियों का उल्लेख सामने आया था। बाद की रिपोर्टों में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी और कुछ के फरार होने की जानकारी दी गई। सितंबर के मध्य में पुलिस ने तीन फरार नामजद आरोपियों—मीरा सिंह, विजयभान सिंह और विजय प्रताप सिंह—पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद विजयभान सिंह की गिरफ्तारी हो गई।
अब पुलिस की कार्रवाई का अगला चरण अन्य आरोपियों की तलाश और मामले में उनकी कथित भूमिका की जांच से जुड़ा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि घटना की योजना किस प्रकार बनी और वारदात में कौन-कौन लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल थे।
घटना के बाद गांव में पुलिस की निगरानी
मां-बेटे की मौत के बाद कंदैला गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने निगरानी बढ़ाई। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित रखने का प्रयास किया। स्थानीय प्रशासन ने भी विवाद की पृष्ठभूमि और भूमि से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
ऐसे मामलों में पुलिस के सामने केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियों को निष्पक्ष तरीके से सामने लाने की चुनौती होती है। भूमि विवाद, पुराने मुकदमों और दोनों पक्षों के बीच पहले हुए विवादों को जांच में शामिल किया जा रहा है।
परिवार ने की सख्त कार्रवाई की मांग
पार्वती देवी की मौत के बाद परिवार की ओर से सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई गई। विरोध के दौरान पुलिस प्रशासन से जल्द कार्रवाई करने की अपील की गई। मामले ने स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज कर दी है।
पुलिस अधिकारियों की ओर से लगातार यह कहा गया है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें काम कर रही हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
न्यायिक जांच के नतीजे पर टिकी नजर
अयोध्या का कंदैला मामला अब पुलिस जांच से आगे न्यायिक प्रक्रिया की दिशा में बढ़ रहा है। दो लोगों की मौत के कारण मामला बेहद गंभीर हो गया है। पुलिस के सामने घटना की पूरी कड़ी जोड़ने, सभी आरोपियों की भूमिका निर्धारित करने और उपलब्ध साक्ष्यों को अदालत के सामने रखने की जिम्मेदारी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार रामलगन मौर्य की 25 अगस्त को हुई हत्या और घायल पार्वती देवी की 14 सितंबर को हुई मौत एक ही हमले से जुड़ी है। जमीन और रास्ते के पुराने विवाद को इस घटना की पृष्ठभूमि में बताया गया है, लेकिन आरोपों और तथ्यों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
कंदैला गांव की इस घटना ने पुराने विवादों के समय रहते समाधान और स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था की निगरानी की जरूरत को भी सामने रखा है। अब सभी की नजर पुलिस की आगे की कार्रवाई और अदालत में मामले की प्रगति पर है।