अलेक्जेंड्रिया पहुंचा INS Trishul, मिस्र की नौसेना ने किया गर्मजोशी से स्वागत; दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच बढ़ा समुद्री सहयोग
अलेक्जेंड्रिया | 20 सितंबर 2026
भारतीय नौसेना के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS Trishul ने अपनी परिचालन तैनाती के तहत मिस्र के अलेक्जेंड्रिया बंदरगाह का दौरा किया। यह पोर्ट कॉल 14 से 17 सितंबर 2026 तक चला। अलेक्जेंड्रिया पहुंचने पर मिस्र की नौसेना के पोत Al Qadeer ने भारतीय युद्धपोत की अगवानी की और उसे बंदरगाह तक एस्कॉर्ट किया। इस दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग और पेशेवर संपर्क को आगे बढ़ाने पर जोर रहा।
यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब भारत और मिस्र के बीच रक्षा एवं समुद्री क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। INS Trishul का अलेक्जेंड्रिया दौरा केवल एक नियमित बंदरगाह पड़ाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके दौरान दोनों नौसेनाओं के कर्मियों को एक-दूसरे के साथ अनुभव साझा करने और समुद्री संचालन से जुड़े तालमेल को मजबूत करने का अवसर भी मिला।

अलेक्जेंड्रिया बंदरगाह पर हुआ स्वागत
14 सितंबर को अलेक्जेंड्रिया हार्बर पहुंचने पर INS Trishul का मिस्र की नौसेना के पोत Al Qadeer ने स्वागत किया। मिस्र की ओर से की गई यह अगवानी दोनों देशों के नौसैनिक संबंधों में पारंपरिक मित्रता को दर्शाती है। भारतीय नौसेना के पोत का मिस्र के प्रमुख बंदरगाह पर पहुंचना दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य और समुद्री संपर्क का हिस्सा है।
INS Trishul की यात्रा के दौरान चालक दल ने विभिन्न आधिकारिक गतिविधियों में हिस्सा लिया। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच संपर्क बढ़ाना और पेशेवर स्तर पर सहयोग को मजबूत करना रहा।
Chatby War Memorial में भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि
INS Trishul के कमांडिंग ऑफिसर और चालक दल ने अलेक्जेंड्रिया स्थित Chatby War Memorial का भी दौरा किया। यहां दोनों विश्व युद्धों के दौरान जान गंवाने वाले सैनिकों की स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस युद्ध स्मारक में 12 सैनिकों की समाधियां हैं और यहां उन 19 भारतीय सैनिकों के नाम भी दर्ज हैं, जिन्होंने पूर्वी भूमध्य सागर में डूबे जहाजों में अपनी जान गंवाई थी। भारतीय नौसेना के अधिकारियों और जवानों द्वारा स्मारक पर श्रद्धांजलि देना भारत के सैन्य इतिहास और उन सैनिकों के बलिदान के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
यह कार्यक्रम INS Trishul की अलेक्जेंड्रिया यात्रा का एक महत्वपूर्ण मानवीय और ऐतिहासिक पक्ष रहा। नौसैनिक सहयोग के साथ-साथ ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों के बीच साझा ऐतिहासिक संबंधों को भी सामने लाते हैं।
भारत के राजदूत ने INS Trishul का किया दौरा
मिस्र में भारत के राजदूत सुरेश के. रेड्डी ने भी INS Trishul का दौरा किया। उन्होंने जहाज के कमांडिंग ऑफिसर और चालक दल के सदस्यों के साथ बातचीत की।
इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में भारतीय नौसेना की मौजूदगी के महत्व पर प्रकाश डाला। राजदूत का युद्धपोत पर पहुंचना भारत के राजनयिक और रक्षा संबंधों के बीच समन्वय का एक उदाहरण रहा।
राजनयिक संपर्क और सैन्य सहयोग के बीच तालमेल किसी भी द्विपक्षीय समुद्री साझेदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। INS Trishul की यात्रा के दौरान यह पहलू भी देखने को मिला।
Egyptian Navy के साथ PASSEX अभ्यास
अलेक्जेंड्रिया प्रवास के दौरान INS Trishul ने मिस्र की नौसेना के पोत ENS Bernees के साथ Passage Exercise यानी PASSEX में हिस्सा लिया। यह अभ्यास दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री संचालन में तालमेल और आपसी समझ बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया।
अभ्यास में समन्वित समुद्री संचालन, संचार संबंधी गतिविधियां और समुद्र में पुनःपूर्ति के लिए संपर्क से जुड़े अभ्यास शामिल रहे। इन गतिविधियों के माध्यम से दोनों नौसेनाओं के कर्मियों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझने और पेशेवर अनुभव साझा करने का अवसर मिला।
नौसैनिक अभ्यासों में संचार और संचालन के बीच तालमेल विशेष महत्व रखता है। अलग-अलग देशों की नौसेनाएं जब एक साथ समुद्री गतिविधियों में हिस्सा लेती हैं, तो ऐसी गतिविधियां आपसी प्रक्रियाओं और संचालन संबंधी समझ को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।
समुद्री सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कदम
भारत और मिस्र के बीच समुद्री संबंध लंबे समय से चले आ रहे हैं। दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच होने वाले संपर्कों में बंदरगाह यात्राएं, पेशेवर संवाद और समुद्री अभ्यास शामिल रहे हैं। INS Trishul का अलेक्जेंड्रिया दौरा इसी व्यापक समुद्री सहयोग का हिस्सा है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि INS Trishul का पोर्ट कॉल और ENS Bernees के साथ PASSEX दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों की पुष्टि करते हैं। मंत्रालय के मुताबिक, इन गतिविधियों से भारत और मिस्र के बीच समुद्री सहयोग को और मजबूत करने में मदद मिलती है।
यह सहयोग केवल सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं है। समुद्री क्षेत्र में पेशेवर संपर्क बढ़ने से दोनों देशों के नौसैनिक कर्मियों को अनुभव साझा करने और समुद्री संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलता है।
भूमध्य सागर में भारत की नौसैनिक मौजूदगी
INS Trishul की अलेक्जेंड्रिया यात्रा भारत की व्यापक परिचालन तैनाती के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। किसी भारतीय नौसैनिक पोत का भूमध्य सागर क्षेत्र में पहुंचना भारत की समुद्री गतिविधियों के व्यापक दायरे को दर्शाता है।
भारतीय नौसेना की विभिन्न परिचालन तैनातियों के दौरान मित्र देशों के बंदरगाहों पर पोर्ट कॉल किए जाते हैं। इन यात्राओं का उद्देश्य संबंधित देशों के साथ नौसैनिक संपर्क बनाए रखना, पेशेवर संवाद बढ़ाना और समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाना होता है।
अलेक्जेंड्रिया यात्रा के दौरान INS Trishul और मिस्र की नौसेना के बीच हुए कार्यक्रमों ने भी इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाया।
साझा इतिहास से आधुनिक समुद्री साझेदारी तक
भारत और मिस्र के संबंधों में इतिहास और आधुनिक रणनीतिक सहयोग दोनों की भूमिका रही है। Chatby War Memorial पर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि ने दोनों देशों के बीच साझा ऐतिहासिक जुड़ाव को रेखांकित किया, जबकि PASSEX ने वर्तमान समय के समुद्री सहयोग को सामने रखा।
एक ओर युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि ने अतीत के बलिदानों को याद किया, वहीं दूसरी ओर दोनों नौसेनाओं का संयुक्त अभ्यास भविष्य के पेशेवर सहयोग की दिशा में गतिविधि रहा।
इस प्रकार INS Trishul की चार दिवसीय अलेक्जेंड्रिया यात्रा में सैन्य, राजनयिक और ऐतिहासिक—तीनों पहलू दिखाई दिए।
भारत-मिस्र नौसैनिक संबंधों के लिए क्या मायने रखता है यह दौरा?
INS Trishul का पोर्ट कॉल भारत और मिस्र के बीच समुद्री क्षेत्र में निरंतर संपर्क का एक उदाहरण है। मिस्र के नौसैनिक पोत Al Qadeer द्वारा भारतीय युद्धपोत की अगवानी, भारतीय राजदूत की INS Trishul पर मौजूदगी और ENS Bernees के साथ PASSEX ने इस यात्रा को बहुआयामी बनाया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन गतिविधियों का मुख्य परिणाम दोनों नौसेनाओं के बीच interoperability, यानी साथ मिलकर समुद्री गतिविधियों को संचालित करने की क्षमता और आपसी पेशेवर समझ को बढ़ाना रहा।
भविष्य में ऐसे नौसैनिक संपर्क भारत और मिस्र के बीच समुद्री सहयोग को बनाए रखने में भूमिका निभा सकते हैं। नियमित संवाद और अभ्यास से दोनों देशों के नौसैनिक कर्मियों को अलग-अलग संचालन प्रक्रियाओं से परिचित होने तथा अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है।
निष्कर्ष
14 से 17 सितंबर 2026 तक मिस्र के अलेक्जेंड्रिया बंदरगाह पर INS Trishul का पोर्ट कॉल भारत और मिस्र के बीच समुद्री सहयोग की एक महत्वपूर्ण गतिविधि रहा। अलेक्जेंड्रिया पहुंचने पर Al Qadeer द्वारा की गई अगवानी से यात्रा की शुरुआत हुई, जबकि Chatby War Memorial पर श्रद्धांजलि ने साझा इतिहास को सम्मान दिया।
भारतीय राजदूत सुरेश के. रेड्डी की INS Trishul के चालक दल से मुलाकात ने राजनयिक संपर्क को रेखांकित किया। वहीं ENS Bernees के साथ PASSEX ने दोनों नौसेनाओं के बीच व्यावहारिक समुद्री समन्वय और पेशेवर आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पोर्ट कॉल और PASSEX दोनों भारत तथा मिस्र की नौसेनाओं के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को आगे बढ़ाने और समुद्री सहयोग को मजबूत करने में योगदान देते हैं।
इस तरह INS Trishul की अलेक्जेंड्रिया यात्रा को भारत-मिस्र समुद्री साझेदारी में निरंतर संवाद, पेशेवर सहयोग और साझा इतिहास के सम्मान से जुड़ी एक महत्वपूर्ण गतिविधि के रूप में देखा जा सकता है।