बीकानेर में ड्रोन से गिराई गई 50 करोड़ रुपये की हेरोइन बरामद, विदेशी पिस्तौल और कारतूस भी जब्त

बीकानेर, 3 अगस्त 2026। राजस्थान के सीमावर्ती जिले बीकानेर में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए अंतरराष्ट्रीय तस्करी के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। सीमा क्षेत्र में ड्रोन के जरिए गिराई गई करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की हेरोइन, 11 विदेशी पिस्तौल और बड़ी संख्या में कारतूस बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसके अन्य साथियों और पूरे नेटवर्क की तलाश जारी है।
यह बरामदगी न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से मादक पदार्थ और हथियार भेजकर भारत में सक्रिय तस्करी गिरोहों तक पहुंचाने की साजिश रची जा रही थी।
सीमा क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों पर थी नजर
पुलिस को पिछले कुछ दिनों से सीमा क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। इसी आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ाई और संदिग्ध इलाकों में लगातार गश्त की। अभियान के दौरान एक स्थान पर संदिग्ध पैकेट मिलने के बाद तलाशी अभियान चलाया गया।
तलाशी में पैकेट से भारी मात्रा में हेरोइन, विदेशी निर्मित पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए। बरामद सामान को सुरक्षित कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।
ड्रोन के जरिए तस्करी का नया तरीका
जांच एजेंसियों के अनुसार तस्कर अब सीमा पार से सामान भेजने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। ड्रोन के माध्यम से रात के अंधेरे में मादक पदार्थ और हथियार भारतीय सीमा में गिरा दिए जाते हैं, जिन्हें बाद में स्थानीय नेटवर्क के सदस्य उठाकर आगे पहुंचाते हैं।
यह तरीका पारंपरिक तस्करी की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ड्रोन कम समय में सीमा पार कर सकते हैं और उन्हें पकड़ना आसान नहीं होता।
50 करोड़ रुपये की हेरोइन बरामद
बरामद हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ की बरामदगी से स्पष्ट संकेत मिलता है कि इसके पीछे संगठित अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह सक्रिय हो सकते हैं।
यदि यह खेप अपने गंतव्य तक पहुंच जाती तो इससे न केवल नशे का कारोबार बढ़ता बल्कि युवाओं को भी इसका गंभीर नुकसान उठाना पड़ता।
विदेशी पिस्तौल और कारतूस भी मिले
हेरोइन के साथ 11 विदेशी पिस्तौल और बड़ी संख्या में कारतूस भी बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन हथियारों का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाना था।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नशीले पदार्थों के साथ हथियारों की बरामदगी इस बात का संकेत हो सकती है कि तस्करी का नेटवर्क केवल ड्रग्स तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य आपराधिक गतिविधियों से भी जुड़ा हो सकता है।
एक आरोपी गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किस गिरोह से जुड़ा है और उसके अन्य साथी कौन हैं।
जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, बैंक लेन-देन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही हैं। उम्मीद है कि पूछताछ से पूरे नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
सीमा पार नेटवर्क की जांच तेज
पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि खेप किस स्थान से भेजी गई थी और भारत में इसे कौन प्राप्त करने वाला था। इसके अलावा ड्रोन की उड़ान के संभावित मार्ग, तकनीकी जानकारी और सीमा पार मौजूद नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
यदि जांच में अंतरराष्ट्रीय गिरोह की भूमिका सामने आती है तो संबंधित केंद्रीय एजेंसियां भी इस मामले में आगे की कार्रवाई कर सकती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से बड़ी सफलता
विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार निगरानी, आधुनिक तकनीक और खुफिया सूचनाओं के बेहतर समन्वय के कारण ऐसी बड़ी कार्रवाई संभव हो पाई है। हाल के वर्षों में सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थ भेजने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत की जा रही है।
आगे की कार्रवाई
बरामद हेरोइन, हथियार और कारतूस को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश किया जाएगा और पुलिस रिमांड लेकर उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी। साथ ही फरार आरोपियों की तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर दबिश दी जा रही है।
निष्कर्ष
बीकानेर में ड्रोन के जरिए भेजी गई लगभग 50 करोड़ रुपये की हेरोइन, 11 विदेशी पिस्तौल और कारतूस की बरामदगी राजस्थान पुलिस की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से तस्करी की चुनौती लगातार बढ़ रही है। अब जांच एजेंसियों का मुख्य लक्ष्य पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर तस्करी से जुड़े सभी आरोपियों को कानून के दायरे में लाना है। यदि इस गिरोह की पूरी कड़ी सामने आती है, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में भी मदद मिलेगी।