पीएम मत्स्य संपदा योजना से आंध्र प्रदेश को बड़ी सौगात: ₹2,328.89 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी, समुद्री निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड

0

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत आंध्र प्रदेश में ₹2,328.89 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी केवल अवसंरचना निर्माण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत की ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) को मजबूत करने की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आधुनिक मत्स्य बंदरगाह, फिश लैंडिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज और इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क जैसी सुविधाएं उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला (Value Chain) को अधिक दक्ष बनाएंगी

StockCake-River_Fish_Gathering-877358-medium

प्रस्तावना

भारत में मत्स्य पालन क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और निर्यात वृद्धि का एक महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के माध्यम से देशभर में आधुनिक मत्स्य अवसंरचना विकसित करने, मछुआरों की आय बढ़ाने और समुद्री उत्पादों के निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।

इसी दिशा में आंध्र प्रदेश को एक बड़ी उपलब्धि मिली है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत राज्य में ₹2,328.89 करोड़ की मत्स्य विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें केंद्र सरकार की ₹681.38 करोड़ की हिस्सेदारी शामिल है। इन परियोजनाओं के माध्यम से आधुनिक मत्स्य बंदरगाह, फिश लैंडिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज, आइस प्लांट और एकीकृत एक्वा पार्क जैसी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने यह जानकारी दी। साथ ही उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के समुद्री खाद्य निर्यात ने 19.72 लाख मीट्रिक टन और ₹73,890 करोड़ का रिकॉर्ड स्तर हासिल किया है।


प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना क्या है?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) वर्ष 2020 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य भारत के मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक बनाना, उत्पादन बढ़ाना, निर्यात को प्रोत्साहित करना और मछुआरों की आय में वृद्धि करना है।

योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं—

  • मत्स्य उत्पादन में वृद्धि।
  • आधुनिक अवसंरचना का निर्माण।
  • कोल्ड चेन नेटवर्क का विस्तार।
  • समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन को बढ़ावा।
  • रोजगार के नए अवसर सृजित करना।
  • निर्यात क्षमता को मजबूत करना।
  • मत्स्य संसाधनों का सतत एवं वैज्ञानिक उपयोग।

आंध्र प्रदेश को मिली बड़ी परियोजनाओं की मंजूरी

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत आंध्र प्रदेश के लिए स्वीकृत ₹2,328.89 करोड़ की परियोजनाएं राज्य के मत्स्य क्षेत्र के व्यापक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

इन परियोजनाओं में—

  • कुल स्वीकृत लागत: ₹2,328.89 करोड़
  • केंद्र सरकार का अंश: ₹681.38 करोड़

यह निवेश केवल अवसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य मत्स्य मूल्य श्रृंखला (Value Chain) को मजबूत करना भी है।


आधुनिक मत्स्य अवसंरचना का होगा विकास

योजना के तहत आंध्र प्रदेश में कई आधुनिक सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं—

1. तीन आधुनिक फिशरीज हार्बर

राज्य में 3 आधुनिक मत्स्य बंदरगाह विकसित किए जा रहे हैं।

इनसे—

  • बड़ी मछली पकड़ने वाली नौकाओं को बेहतर सुविधा मिलेगी।
  • सुरक्षित लैंडिंग संभव होगी।
  • समुद्री व्यापार को गति मिलेगी।
  • लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी।

2. छह फिश लैंडिंग सेंटर

6 फिश लैंडिंग सेंटर विकसित किए जा रहे हैं।

इन केंद्रों पर—

  • मछलियों की सुरक्षित उतराई होगी।
  • गुणवत्ता परीक्षण किया जाएगा।
  • प्राथमिक प्रसंस्करण संभव होगा।
  • बाजार तक तेजी से आपूर्ति हो सकेगी।

3. सोलह कोल्ड स्टोरेज एवं आइस प्लांट

राज्य में 16 कोल्ड स्टोरेज और आइस प्लांट बनाए जा रहे हैं।

इन सुविधाओं से—

  • मछलियों की गुणवत्ता बनी रहेगी।
  • खराब होने की संभावना कम होगी।
  • निर्यात योग्य उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर होगी।
  • किसानों और मछुआरों को बेहतर मूल्य मिलेगा।

4. एकीकृत एक्वा पार्क

योजना के अंतर्गत एक इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क भी विकसित किया जा रहा है।

इसमें—

  • प्रसंस्करण इकाइयाँ
  • पैकेजिंग सुविधाएं
  • परीक्षण प्रयोगशालाएं
  • कोल्ड चेन
  • प्रशिक्षण केंद्र
  • विपणन सहायता

जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।


आंध्र प्रदेश की मत्स्य क्षेत्र में विशेष भूमिका

आंध्र प्रदेश लंबे समय से भारत के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल रहा है।

राज्य की प्रमुख विशेषताएं—

  • लंबा समुद्री तट।
  • विकसित एक्वाकल्चर उद्योग।
  • झींगा (Shrimp) उत्पादन में अग्रणी स्थान।
  • निर्यात उन्मुख मत्स्य उद्योग।
  • लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार।

नई परियोजनाओं से राज्य की यह स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।


भारत के समुद्री खाद्य निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड

लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने समुद्री खाद्य निर्यात के क्षेत्र में नया इतिहास बनाया।

मुख्य उपलब्धियां—

  • 19.72 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात।
  • ₹73,890 करोड़ का निर्यात मूल्य।

यह अब तक का एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन माना जा रहा है।


निर्यात बढ़ने के प्रमुख कारण

भारत के समुद्री निर्यात में वृद्धि के पीछे कई कारण हैं—

आधुनिक उत्पादन प्रणाली

वैज्ञानिक मत्स्य पालन एवं आधुनिक एक्वाकल्चर तकनीकों का तेजी से विस्तार हुआ है।

बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रसंस्करण और गुणवत्ता परीक्षण से भारतीय उत्पादों की स्वीकार्यता बढ़ी है।

कोल्ड चेन का विस्तार

भंडारण और परिवहन व्यवस्था मजबूत होने से निर्यात गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

वैश्विक मांग

भारतीय झींगा और अन्य समुद्री उत्पादों की वैश्विक बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है।

सरकारी प्रोत्साहन

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों ने इस क्षेत्र को नई गति दी है।


मछुआरों को होंगे अनेक लाभ

नई परियोजनाओं से लाखों मछुआरों और मत्स्य किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।

मुख्य लाभ—

  • आधुनिक बंदरगाहों की सुविधा।
  • परिवहन लागत में कमी।
  • बेहतर बाजार उपलब्धता।
  • उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार।
  • निर्यात के नए अवसर।
  • आय में वृद्धि।
  • रोजगार के नए अवसर।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

मत्स्य पालन केवल समुद्री व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण विकास से भी सीधे जुड़ा हुआ क्षेत्र है।

इन परियोजनाओं से—

  • तटीय क्षेत्रों का विकास होगा।
  • स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को नए अवसर मिलेंगे।
  • युवाओं के लिए रोजगार बढ़ेगा।
  • सहायक उद्योगों का विस्तार होगा।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

भारत सरकार कृषि के साथ-साथ मत्स्य क्षेत्र को भी ग्रामीण विकास का प्रमुख इंजन मान रही है।

PMMSY जैसी योजनाओं के माध्यम से—

  • उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।
  • निर्यात क्षमता मजबूत हो रही है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति बेहतर बन रही है।
  • किसानों एवं मछुआरों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

भविष्य की संभावनाएं

यदि इसी प्रकार आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक मत्स्य पालन और निर्यात उन्मुख नीतियों पर कार्य जारी रहता है, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में अपनी हिस्सेदारी और मजबूत कर सकता है। आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में विकसित हो रही आधुनिक अवसंरचना अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है। साथ ही, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और कोल्ड-चेन नेटवर्क के विस्तार से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय समुद्री उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और बढ़ने की संभावना है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत आंध्र प्रदेश को ₹2,328.89 करोड़ की परियोजनाओं की मंजूरी राज्य के मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। तीन आधुनिक मत्स्य बंदरगाह, छह फिश लैंडिंग सेंटर, सोलह कोल्ड स्टोरेज एवं आइस प्लांट तथा एक एकीकृत एक्वा पार्क जैसी परियोजनाएं उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूत करेंगी। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 19.72 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों के ₹73,890 करोड़ के रिकॉर्ड निर्यात से यह स्पष्ट होता है कि भारत का मत्स्य क्षेत्र वैश्विक बाजार में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और विदेशी मुद्रा अर्जन का और भी सशक्त आधार बन सकता है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें