गाज़ा संकट: नागरिकों की पीड़ा और शांति की आवश्यकता

गाज़ा पट्टी एक बार फिर हिंसा और संघर्ष के चक्रव्यूह में फंसती नज़र आ रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने हाल ही में गाज़ा की स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इज़रायल द्वारा गाज़ा सिटी पर कब्ज़े की घोषणा इस संघर्ष को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ले जाएगी।
इस घोषणा से सबसे बड़ा ख़तरा उन निर्दोष नागरिकों को है जो पहले से ही युद्ध और विस्थापन की मार झेल रहे हैं। लाखों लोगों को एक बार फिर अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे मानवीय संकट और गहरा हो जाएगा। परिवारों का बिखरना, बच्चों का भयभीत होना और महिलाओं की असुरक्षा—यह सब एक ऐसे दौर की तस्वीर पेश करता है, जो न केवल गाज़ा बल्कि पूरी दुनिया की अंतरात्मा को झकझोर देता है।
गुटेरेस ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है। बार-बार की हिंसा और सैन्य कार्रवाइयाँ केवल आम नागरिकों के लिए मौत और विनाश लाती हैं। जरूरत है संवाद, कूटनीति और आपसी विश्वास की, ताकि गाज़ा और इज़रायल दोनों के नागरिक एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें।
आज जब दुनिया मानवता की रक्षा और शांति की दिशा में कदम बढ़ा रही है, ऐसे में गाज़ा में जारी संकट वैश्विक समुदाय से सामूहिक पहल की मांग करता है। शांति की राह कठिन हो सकती है, लेकिन यही वह मार्ग है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करेगा।
