फ़रवरी 15, 2026

भारत में शिक्षा केवल अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के भविष्य और उनके व्यक्तित्व के निर्माण से जुड़ी हुई है। इसी सोच को साकार रूप देने के लिए वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई पहल “परीक्षा पे चर्चा” आज एक राष्ट्रीय आंदोलन का स्वरूप ले चुकी है।

पहल की शुरुआत

शुरुआत में यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के परीक्षा संबंधी तनाव को कम करने और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ अपनी क्षमता को पहचानने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से आरंभ किया गया था। धीरे-धीरे यह केवल छात्रों तक सीमित न रहकर शिक्षकों और अभिभावकों को भी जोड़ने लगा।

अभूतपूर्व विस्तार

आठ संस्करणों में पहुँचते-पहुँचते परीक्षा पे चर्चा ने अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अब तक 5.11 करोड़ से अधिक छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया है। इस पहल ने विद्यार्थियों को यह समझाने में मदद की है कि परीक्षा केवल ज्ञान का परीक्षण है, जीवन का अंत नहीं।

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम

इस अभियान ने हाल ही में एक अनोखी उपलब्धि भी हासिल की है। 2025 के संस्करण में इसे गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया, जिसमें “एक महीने में सबसे अधिक लोगों के नागरिक सहभागिता मंच पर पंजीकरण” का रिकॉर्ड शामिल है। यह दर्शाता है कि देशभर में लोग इस पहल से कितनी गहराई से जुड़े हैं।

प्रभाव और महत्व

  • छात्रों के लिए: परीक्षा से पहले भय और तनाव को कम करना, आत्मविश्वास बढ़ाना।
  • शिक्षकों के लिए: विद्यार्थियों को नई शिक्षण पद्धतियों और सकारात्मक दृष्टिकोण से मार्गदर्शन करना।
  • अभिभावकों के लिए: बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालकर उन्हें सहयोग और प्रेरणा देना।

निष्कर्ष

परीक्षा पे चर्चा अब केवल एक वार्षिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बन गया है। इस पहल ने परीक्षा के दबाव को उत्सव और सीखने की प्रक्रिया में बदलकर विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को नई दिशा दी है।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि “परीक्षा पे चर्चा” ने भारत के शैक्षणिक वातावरण को तनावमुक्त और प्रेरणादायी बनाने में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।


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