फ़रवरी 15, 2026

महालया पर ममता बनर्जी की सांस्कृतिक प्रस्तुति: नवाचार और परंपरा का संगम

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पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विरासत में महालया का दिन एक विशेष महत्व रखता है। यह वह समय है जब देवी दुर्गा की पृथ्वी पर आगमन की शुरुआत होती है और ‘आगमनी’ गीतों की मधुर गूंज से वातावरण भक्तिभाव से भर जाता है। इस वर्ष, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महालया के अवसर पर एक अनूठा कदम उठाया और स्वयं रचित एवं संगीतबद्ध एक नया पूजा गीत साझा किया, जिसने बंगाल की सांस्कृतिक दुनिया में नई ऊर्जा का संचार किया।

“जागो दुर्गा, जागो दशबुजा धारिणी” — शक्ति का सजीव आह्वान

ममता बनर्जी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा:
“जागो दुर्गा, जागो दशबुजा धारिणी।”

यह पंक्ति केवल धार्मिक संदेश नहीं, बल्कि बंगाल की स्त्री शक्ति और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का प्रतीक भी है। वीडियो में बादलों और प्रकृति के सुंदर दृश्य इसे और भी अधिक आध्यात्मिक और सजीव बनाते हैं।

राजनीति से परे: रचनात्मक दृष्टि

इस गीत के माध्यम से ममता बनर्जी ने यह दिखाया कि वे सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि कवयित्री, संगीतकार और कलाकार भी हैं। उनकी बहुआयामी प्रतिभा इस प्रस्तुति में झलकती है, जो दर्शकों को यह एहसास कराती है कि बंगाल की राजनीति में सांस्कृतिक संवेदनशीलता अभी भी जीवित है।

सोशल मीडिया पर उत्साह

22 सितंबर को वीडियो साझा किए जाने के कुछ ही घंटों में इसे हजारों लोगों ने देखा। 10.7K से अधिक व्यूज़, अनगिनत रीपोस्ट और लाइक्स यह प्रमाण हैं कि जनता ने इस रचनात्मक प्रयास को सराहा। यह दिखाता है कि जब सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं को नवाचारी रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो उसका प्रभाव गहरा और दीर्घकालिक होता है।

महालया: परंपरा और नवाचार का मेल

महालया सदियों से ‘महिषासुरमर्दिनी’ कार्यक्रम के रेडियो प्रसारण के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन डिजिटल युग में, जब नेता स्वयं रचनात्मक योगदान दे रहे हैं, यह पर्व केवल परंपरा का नहीं, नवाचार का भी प्रतीक बनता जा रहा है। ममता बनर्जी का नया गीत इसी सांस्कृतिक प्रवाह का हिस्सा है, जो परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करता है।


निष्कर्ष: ममता बनर्जी की यह सांस्कृतिक पहल एक राजनेता की पारंपरिक छवि से परे जाकर संवेदनशील कलाकार की अभिव्यक्ति है। यह गीत न केवल दुर्गा पूजा की शुरुआत का संदेश देता है, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक आत्मा को नई ऊर्जा और जीवनदान भी प्रदान करता है।



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