डोनाल्ड ट्रंप का एबीसी और एनबीसी पर प्रहार: अमेरिकी मीडिया पर बढ़ती खींचतान का नया दौर

अमेरिका की राजनीति और मीडिया के बीच पुरानी तनातनी एक बार फिर सुर्खियों में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुख्यधारा के दो बड़े नेटवर्क—एबीसी और एनबीसी—पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “फेक न्यूज़ का मुख्य गढ़” करार दिया है। ट्रंप का यह बयान न केवल मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता की दिशा में उठ रहे राजनीतिक हस्तक्षेप को भी उजागर करता है।
ट्रंप का आरोप: “रेडिकल लेफ्ट के प्रचार मंच” बन चुके हैं नेटवर्क्स
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर जारी एक पोस्ट में कहा कि किसी भी ऐसे प्रस्ताव का वे विरोध करेंगे, जिससे “रेडिकल लेफ्ट झुकाव वाले नेटवर्क्स” को और व्यापक प्लेटफ़ॉर्म मिल सके। उन्होंने एबीसी और एनबीसी को “डेमोक्रेटिक पार्टी का डिजिटल हथियार” बताते हुए आरोप लगाया कि ये चैनल निष्पक्ष पत्रकारिता के बजाय संगठित राजनीतिक अभियान चला रहे हैं।
ट्रंप ने कहा,
“इन नेटवर्क्स का विस्तार बंद होना चाहिए। देश को गलत दिशा में ले जाने वाली फेक न्यूज़ को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।”
एबीसी रिपोर्टर से तीखी नोकझोंक और ‘लाइसेंस रद्द’ की चेतावनी
इस विवाद की पृष्ठभूमि कुछ दिन पहले की एक घटना से भी जुड़ी है। व्हाइट हाउस में एबीसी न्यूज की रिपोर्टर मैरी ब्रूस ने ट्रंप से जेफ़्री एपस्टीन के दस्तावेज़ों पर सवाल पूछा। प्रश्न तेज था, और प्रतिक्रिया उससे भी ज्यादा तीखी।
ट्रंप न केवल नाराज़ हुए, बल्कि उन्होंने एबीसी का प्रसारण लाइसेंस रद्द करने की धमकी भी दे डाली।
इसके बाद व्हाइट हाउस ने आधिकारिक बयान जारी कर एबीसी को “डेमोक्रेटिक प्रचार का मुखौटा पहने नेटवर्क” बताया, जिससे विवाद और गहरा हो गया।
मीडिया की स्वायत्तता बनाम सत्ता की दबाव-नीति
ट्रंप के लगातार हमलों ने अमेरिकी लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर बहस को और तीखा कर दिया है।
- आलोचकों का तर्क है कि किसी राष्ट्रपति द्वारा मीडिया संस्थानों को खुली धमकी देना लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए खतरनाक संकेत है।
- ट्रंप समर्थकों का मानना है कि मुख्यधारा मीडिया लंबे समय से पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग कर रहा है और राष्ट्रपति के खिलाफ राजनीतिक नैरेटिव गढ़ रहा है।
इस संघर्ष ने यह प्रश्न फिर से जीवंत कर दिया है कि क्या अमेरिका में प्रेस वास्तव में स्वतंत्र है या राजनीतिक हितों का उपकरण बन चुका है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप का एबीसी और एनबीसी पर हमला अमेरिका में मीडिया की भूमिका, जवाबदेही और स्वतंत्रता पर बढ़ती खींचतान का ताज़ा उदाहरण है।
यह विवाद केवल एक राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि उस व्यापक चर्चा की शुरुआत है जो यह तय करेगी कि आधुनिक अमेरिकी मीडिया कितना निष्पक्ष है और सत्ता से जुड़े दबावों के बीच कैसे काम करता है।
