फ़रवरी 15, 2026

वाशिंगटन समझौता: कांगो और रवांडा के बीच शांति का नया अध्याय

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4 दिसंबर 2025 को वाशिंगटन डी.सी. में इतिहास रच दिया गया, जब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और रवांडा ने लंबे समय से चले आ रहे तनाव और संघर्ष को समाप्त करने के लिए वाशिंगटन शांति एवं समृद्धि समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस पहल की अगुवाई अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने इसे अफ्रीका में शांति बहाल करने की दिशा में एक “अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि” बताया।


✍️ समझौते के मुख्य स्तंभ

1. स्थायी युद्धविराम

दोनों देशों ने पूर्वी कांगो में लगातार जारी झड़पों को समाप्त करने के लिए एक स्थायी और व्यापक युद्धविराम लागू करने पर सहमति जताई।

2. सशस्त्र समूहों का निरस्त्रीकरण

समझौते में मौजूद गैर-राज्य सशस्त्र समूहों को हथियार छोड़कर शांतिपूर्ण नागरिक जीवन में वापसी कराने के लिए एक संरचित योजना बनाई गई है।

3. शरणार्थियों की सुरक्षित वापसी

हजारों विस्थापित परिवारों को सुरक्षा और सम्मान के साथ घर लौटने की अनुमति देने का वादा किया गया है।

4. न्याय और जवाबदेही

युद्ध अपराधों और मानवाधिकार उल्लंघनों के दोषियों को न्याय के दायरे में लाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है।


🌍 अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया

पूर्व केन्याई राष्ट्रपति उहुरु केन्याटा ने इस समझौते को ग्रेट लेक्स क्षेत्र के लिए “ऐतिहासिक मोड़” बताया—एक ऐसा क्षेत्र जहाँ दशकों के संघर्ष ने करोड़ों जीवन प्रभावित किए हैं। समारोह में केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो, बुरुंडी और अंगोला के नेता भी मौजूद रहे, जिससे क्षेत्रीय एकता का संदेश मजबूत हुआ।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व की सराहना की और कांगो के राष्ट्रपति फेलिक्स त्शिसेकेदी तथा रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागमे को इस महत्वपूर्ण कदम के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र इस क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों का निरंतर समर्थन करेगा।


⚙️ आर्थिक सहयोग के नए अवसर

समझौते में अमेरिका और दोनों अफ्रीकी देशों के बीच रेयर अर्थ मिनरल्स के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए साझेदारी पर सहमति बनी है। इससे न केवल DRC और रवांडा की अर्थव्यवस्थाओं को नया बल मिलेगा, बल्कि वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में भी उनकी भूमिका मजबूत होगी।


🔍 चुनौतियाँ अब भी मौजूद

हालाँकि यह समझौता उम्मीद और विश्वास की नई राह खोलता है, परंतु पूर्वी कांगो के कुछ हिस्सों में हिंसा पूरी तरह रुकी नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि स्थानीय समुदाय अब भी असुरक्षा और दहशत से जूझ रहे हैं।
समझौते के अनुपालन की निगरानी के लिए एक संयुक्त मॉनिटरिंग मैकेनिज़्म स्थापित किया जाएगा, जो:

  • सेना की चरणबद्ध वापसी
  • निरस्त्रीकरण की प्रगति
  • और सभी प्रावधानों के पालन

पर नजर रखेगा।


निष्कर्ष

वाशिंगटन समझौता केवल दो देशों के बीच संघर्ष विराम नहीं, बल्कि अफ्रीकी क्षेत्र में स्थिरता, संवाद और विश्वास की नई शुरुआत है। यह कूटनीति की शक्ति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की क्षमता का भी प्रतीक है।
इस ऐतिहासिक कदम की सफलता अंततः इस पर निर्भर करेगी कि समझौते के प्रावधान जमीन स्तर पर कितनी प्रभावशीलता और ईमानदारी से लागू किए जाते हैं।


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