फ़रवरी 15, 2026

नैन्सी पेलोसी का जलवायु संकट पर तीखा हमला: “धोखा तो राष्ट्रपति खुद हैं”

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अमेरिकी राजनीति में जलवायु संकट को लेकर टकराव एक बार फिर गहरा गया है। 12 दिसंबर 2025 को पूर्व स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने एक ज़ोरदार ट्वीट के ज़रिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जलवायु परिवर्तन संबंधी बयान की न केवल आलोचना की, बल्कि एक सीधा हमला बोला। ट्रंप द्वारा जलवायु परिवर्तन को “धोखा” कहे जाने पर पेलोसी ने पलटवार करते हुए कहा— “असल में धोखा तो राष्ट्रपति ही हैं।”
उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों से लेकर पर्यावरण संगठनों तक नई बहस को जन्म दे दिया।


🌍 जलवायु संकट: वैश्विक चेतावनी और अमेरिकी नेतृत्व पर सवाल

पेलोसी ने अपने ट्वीट में पेरिस समझौते की दसवीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की मार झेल रही है, ऐसे समय में राष्ट्रपति द्वारा इसे “मिथक” या “धोखा” बताना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।
उन्होंने लिखा कि चाहे सत्ता में कौन हो, “हम एक सतत भविष्य और प्रकृति की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।”

संयुक्त राष्ट्र पहले ही जलवायु परिवर्तन को “मानवता के लिए कोड रेड” घोषित कर चुका है। अमेरिका में हाल ही में बढ़ती जंगल की आग, भीषण सूखा और रिकॉर्ड तोड़ तापमान यह दिखाते हैं कि संकट वास्तविक है और तेजी से बिगड़ रहा है।


🔥 सिर्फ राजनीति नहीं, एक नैतिक संदेश भी

पेलोसी का यह बयान केवल राजनीतिक विरोध नहीं था, बल्कि एक नैतिक चेतावनी भी थी।
उनका संदेश “For The Children” शब्दों के साथ समाप्त हुआ—जो इस बात को दर्शाता है कि जलवायु कार्रवाई आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने का मामला है, न कि किसी राजनीतिक दल की जीत-हार का।

कुछ दिन पहले ही पेलोसी, डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज़ और सीनेटर शेल्डन व्हाइटहाउस ने मिलकर जलवायु संकट पर संयुक्त चेतावनी जारी की थी। उनका स्पष्ट संदेश था—
“अब बहस का नहीं, कदम उठाने का समय है।”


🇺🇸 ट्रंप का रुख और उठता विवाद

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई बार जलवायु परिवर्तन को “धोखा” या “झूठा विज्ञान” कह चुके हैं। उन्होंने अमेरिका को पेरिस समझौते से अलग करने के लिए भी कई बार संकेत दिए हैं।
उनकी इन नीतियों की कड़ी आलोचना वैज्ञानिकों, पर्यावरण विशेषज्ञों और विपक्षी दलों ने की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह रुख न केवल वैज्ञानिक तथ्यों को नकारता है, बल्कि वैश्विक प्रयासों को कमजोर भी करता है।

पेलोसी का टकराव इस बात का प्रमाण है कि अमेरिका में पर्यावरण नीति अब केवल विज्ञान या प्रशासन का विषय नहीं रह गई है—यह एक राजनीतिक और नैतिक संघर्ष बन गया है।


🌱 निष्कर्ष

पेलोसी का यह बयान यह साफ संदेश देता है कि जलवायु संकट की अनदेखी करना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक नैतिक विफलता भी है। जब दुनिया जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए संगठित हो रही है, तब अमेरिका जैसे वैश्विक नेता का पीछे हटना पूरी दुनिया को प्रभावित करता है।

उनका ट्वीट सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि एक आह्वान भी है—
एक हरित, सुरक्षित और न्यायपूर्ण भविष्य के निर्माण के लिए एकजुट होने का।


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