यूक्रेन संकट पर पेरिस की निर्णायक पहल: ज़ेलेंस्की–मैक्रों वार्ता से बदली वैश्विक कूटनीति की दिशा

रूस–यूक्रेन युद्ध के लंबे और जटिल दौर के बीच फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ शिखर सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक अहम पड़ाव के रूप में उभरा है। इस सम्मेलन का केंद्रबिंदु यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता रही, जिसमें सुरक्षा, वायु रक्षा और कूटनीतिक भविष्य पर गंभीर मंथन किया गया।
पेरिस सम्मेलन: उद्देश्य और भागीदारी
6 जनवरी 2026 को आयोजित इस विशेष बैठक में कई यूरोपीय देशों के राष्ट्राध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, अमेरिका के विशेष राजनयिक और सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन का मुख्य लक्ष्य यूक्रेन के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना और रूस के साथ संभावित युद्धविराम की दिशा में सामूहिक रणनीति विकसित करना था।
यह बैठक केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें ठोस निर्णयों और व्यावहारिक सहयोग पर भी ज़ोर दिया गया।
ज़ेलेंस्की का स्पष्ट संदेश: सुरक्षा के बिना शांति अधूरी
यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि प्रभावी कूटनीति तभी संभव है जब उसे ज़मीनी स्तर पर सुरक्षा समर्थन मिले। उन्होंने वायु रक्षा प्रणालियों की अहमियत रेखांकित करते हुए कहा कि हवाई हमलों से नागरिकों की रक्षा इस समय यूक्रेन की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उनका जोर इस बात पर था कि शांति की हर कोशिश को मजबूत रक्षा क्षमता का आधार मिलना चाहिए, ताकि बातचीत कमजोरी नहीं बल्कि स्थिरता का संकेत बने।
मैक्रों का आश्वासन: यूरोप की जिम्मेदारी
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेन को पूर्ण समर्थन का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि यूरोप की सुरक्षा यूक्रेन की सुरक्षा से जुड़ी हुई है और फ्रांस इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगा।
दोनों नेताओं के बीच वायु रक्षा सहयोग, सैन्य सहायता विस्तार और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साझा रणनीति को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मैक्रों ने यूरोपीय देशों से भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
सम्मेलन से निकले प्रमुख निष्कर्ष
- यूक्रेन को वायु रक्षा प्रणालियों और तकनीकी सहयोग पर सहमति
- रक्षा जरूरतों का संयुक्त मूल्यांकन तंत्र विकसित करने का निर्णय
- नागरिक ढांचे को सुरक्षित रखने की साझा रणनीति
- संभावित शांति वार्ता के लिए राजनीतिक रूपरेखा तैयार करने पर सहमति
- बहुराष्ट्रीय सहयोग को संस्थागत रूप देने की पहल
दुनिया को गया स्पष्ट संदेश
पेरिस सम्मेलन ने वैश्विक समुदाय को यह स्पष्ट संकेत दिया कि यूक्रेन को लेकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय और परिणामोन्मुख है। ज़ेलेंस्की ने दोहराया कि हर अंतरराष्ट्रीय बैठक का निष्कर्ष ठोस होना चाहिए—नई क्षमताएँ, नई योजनाएँ और वास्तविक सहायता।
निष्कर्ष
पेरिस में ज़ेलेंस्की और मैक्रों की मुलाकात यूक्रेन संकट के समाधान की दिशा में एक निर्णायक मोड़ मानी जा सकती है। यह बैठक इस बात का प्रमाण है कि जब कूटनीति और सुरक्षा सहयोग एक साथ चलते हैं, तभी स्थायी शांति की संभावना बनती है। आने वाले समय में इस साझेदारी के प्रभाव न केवल यूक्रेन, बल्कि पूरी वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर दिखाई देंगे।
