फ़रवरी 16, 2026

व्यंग्य और कॉर्पोरेट संस्कृति को नई पहचान देने वाली कलम हुई खामोश

13 जनवरी 2026 का दिन वैश्विक रचनात्मक जगत के लिए एक यादगार लेकिन दुखद क्षण लेकर आया। अमेरिकी कार्टूनिस्ट और लेखक स्कॉट एडम्स, जिन्होंने दफ्तरों की रोज़मर्रा की जटिलताओं को तीखे हास्य में ढाल दिया, अब हमारे बीच नहीं रहे। लंबे समय तक प्रोस्टेट कैंसर से लड़ने के बाद 68 वर्ष की उम्र में उन्होंने जीवन की अंतिम सांस ली।


दफ्तरों की सच्चाई को कार्टून में बदलने वाला रचनाकार

स्कॉट रेमंड एडम्स का जन्म 1957 में अमेरिका में हुआ था। उन्होंने जब 1989 में ‘डिलबर्ट’ नामक कॉमिक स्ट्रिप की शुरुआत की, तब शायद ही किसी ने सोचा था कि यह साधारण दिखने वाला कार्टून कॉर्पोरेट दुनिया का प्रतीक बन जाएगा। ‘डिलबर्ट’ ने बॉस-कर्मचारी संबंध, अर्थहीन बैठकों, अव्यवस्थित प्रबंधन और दफ्तरों की अनकही परेशानियों को जिस व्यंग्यात्मक अंदाज़ में पेश किया, उसने लाखों पाठकों को खुद से जोड़ लिया।


केवल हास्य नहीं, एक सामाजिक टिप्पणी

‘डिलबर्ट’ सिर्फ हँसाने वाला कार्टून नहीं था, बल्कि यह आधुनिक कार्यसंस्कृति पर सीधा प्रहार करता था। स्कॉट एडम्स की रचनाएँ यह दिखाती थीं कि कैसे नीतियाँ, प्रबंधन और व्यवस्था अक्सर इंसानी तर्क से टकरा जाती हैं। उनकी यही ईमानदार और बेबाक दृष्टि उन्हें अन्य कार्टूनिस्टों से अलग करती थी।


वैश्विक लोकप्रियता और स्थायी प्रभाव

कुछ ही वर्षों में ‘डिलबर्ट’ सैकड़ों समाचारपत्रों में प्रकाशित होने लगा और कई भाषाओं में अनुवादित हुआ। यह कार्टून दुनिया भर के दफ्तरों में काम करने वाले लोगों के लिए एक साझा अनुभव बन गया। पोस्टर, किताबें, टीवी शो और डिजिटल प्लेटफॉर्म—हर जगह ‘डिलबर्ट’ की मौजूदगी ने स्कॉट एडम्स को एक वैश्विक पहचान दी।


रचनात्मक विरासत हमेशा जीवित रहेगी

स्कॉट एडम्स भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनका व्यंग्य, उनकी सोच और उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को दफ्तरों की सच्चाइयों पर मुस्कुराने और सोचने के लिए प्रेरित करती रहेंगी। ‘डिलबर्ट’ के पात्रों के जरिए उन्होंने जो सवाल उठाए, वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।


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