फ़रवरी 12, 2026

शीर्षक: “मध्य पूर्व की राजनीति में नई हलचल: ट्रंप-नेटन्याहू बैठक और ईरान वार्ता का भविष्य”


परिचय
12 फरवरी 2026 को वॉशिंगटन डी.सी. में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेटन्याहू की मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इस बैठक का मुख्य केंद्र ईरान के साथ संभावित समझौता और मध्य पूर्व की बदलती परिस्थितियाँ रही।


ईरान वार्ता और ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ की याद
ट्रंप ने बैठक के बाद अपने बयान में स्पष्ट किया कि ईरान के साथ वार्ता जारी रहनी चाहिए। उन्होंने 2025 में हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ईरान के लिए “अच्छा अनुभव नहीं” रहा। उस समय अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, जिसे ईरान ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया था।

यह संदर्भ यह दर्शाता है कि ट्रंप ईरान को वार्ता के लिए दबाव में लाना चाहते हैं, ताकि भविष्य में कोई ठोस समझौता हो सके।


गाज़ा और क्षेत्रीय शांति पर चर्चा
बैठक में गाज़ा और व्यापक मध्य पूर्व की स्थिति पर भी विचार-विमर्श हुआ। ट्रंप ने दावा किया कि क्षेत्र में “शांति” की दिशा में प्रगति हो रही है। यह बयान राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि गाज़ा लंबे समय से संघर्ष का केंद्र रहा है।


राजनीतिक महत्व

  • अमेरिका और इज़राइल के बीच संबंधों की मजबूती का संकेत
  • ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति
  • मध्य पूर्व में शांति की अमेरिकी प्राथमिकता

निष्कर्ष
ट्रंप-नेटन्याहू बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले महीनों में ईरान के साथ वार्ता और मध्य पूर्व की राजनीति वैश्विक चर्चा का केंद्र बनेगी। “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” की याद दिलाकर ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। वहीं, गाज़ा और क्षेत्रीय शांति पर उनका आशावादी दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि अमेरिका अपनी कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत करना चाहता है।


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