मार्च 11, 2026

कैबिनेट का बड़ा फैसला: उज्जैन को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए नया 4-लेन कॉरिडोर मंजूर

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केंद्र सरकार ने देश के सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मध्यप्रदेश में बदनावर–पेटलावद–थांदला–तिमरवानी खंड (NH-752D) पर चार लेन सड़क कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दे दी है। लगभग 80.45 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर करीब ₹3,839.42 करोड़ की लागत आने का अनुमान है। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और उज्जैन को सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ना है।

परियोजना की प्रमुख बातें

यह सड़क परियोजना भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला योजना के तहत विकसित की जाएगी। कॉरिडोर के बनने से उज्जैन और आसपास के इलाकों की सड़क संपर्क व्यवस्था काफी बेहतर होगी। इसके साथ ही यात्रियों को तेज़, सुरक्षित और सुगम यात्रा का विकल्प मिलेगा।

नई चार लेन सड़क बनने से क्षेत्र में आवागमन का समय कम होगा और लंबी दूरी की यात्रा पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगी। बेहतर सड़क ढांचे के कारण माल ढुलाई भी अधिक तेज़ और किफायती हो सकेगी।

क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा

इस परियोजना के दूरगामी आर्थिक और सामाजिक लाभ भी देखने को मिलेंगे। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद माल परिवहन की गति बढ़ेगी, जिससे व्यापार और उद्योग के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के किसानों को भी इसका फायदा मिलेगा, क्योंकि वे अपने कृषि उत्पादों को बड़े शहरों और बाज़ारों तक जल्दी पहुंचा सकेंगे। इससे उनकी आय बढ़ने की संभावना है।

पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक शहरों में से एक है। बेहतर सड़क संपर्क बनने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यहां तक पहुंचना और आसान हो जाएगा। इससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा।

रोजगार के अवसर

कॉरिडोर के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा सड़क बनने के बाद परिवहन, होटल, ढाबा और अन्य सेवाओं से जुड़े नए व्यवसाय भी विकसित हो सकते हैं।

रणनीतिक दृष्टि से महत्व

यह परियोजना मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से और अधिक मजबूती से जोड़ेगी। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पहले ही देश की सबसे आधुनिक और लंबी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में गिना जाता है। ऐसे में उज्जैन को इस मार्ग से जोड़ना क्षेत्र की लॉजिस्टिक क्षमता और निवेश संभावनाओं को बढ़ा सकता है।

निष्कर्ष

केंद्रीय कैबिनेट का यह फैसला बुनियादी ढांचा विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे आर्थिक गतिविधियों, सामाजिक संपर्क और क्षेत्रीय विकास को भी गति देती हैं। उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक बनने वाला यह चार लेन कॉरिडोर मध्यप्रदेश के विकास को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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